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हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की अनूठी मिसाल, हिंदुओं ने अफसरों को मजार तोड़ने से रोका

उत्तर प्रदेश के महोबा में हिंदुओं ने अफसरों को मजार तोड़ने से रोका.
(फाइल फोटो)
उत्तर प्रदेश के महोबा में हिंदुओं ने अफसरों को मजार तोड़ने से रोका. (फाइल फोटो)

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के महोबा (Mahoba) जिले के सालट गांव के ग्रामीणों ने हिन्दू-मुस्लिम भाईचारे (Hindu-Muslim Brotherhood) की मिसाल कायम की है. रविवार को वहां के हिंदुओं ने मजार में अपनी आस्था जताकर वन विभाग के अधिकारियों को उसे ध्वस्त करने से रोक दिया.

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उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के महोबा (Mahoba) जिले के सालट गांव के ग्रामीणों ने हिन्दू-मुस्लिम भाईचारे (Hindu-Muslim Brotherhood) की मिसाल कायम की है. रविवार को वहां के हिंदुओं ने मजार में अपनी आस्था जताकर वन विभाग के अधिकारियों को उसे ध्वस्त करने से रोक दिया. महोबा के जिला वन अधिकारी (डीएफओ) रामजी राय ने रविवार की शाम बताया कि भाजपा के चरखारी विधायक की शिकायत पर वे अपने अधीनस्थ दल के साथ कथित विवादित पीर बाबा की मजार को वन क्षेत्र की जमीन से हटाने गए थे, लेकिन वहां के हालात और आस्था देख कर सभी हैरान रह गए.

14 सितंबर तक बाउंड्री को गिराने का दिया है आदेश
सालट गांव में मजार पर उर्स के मौके पर एक समुदाय के लोगों को प्रसाद के रूप में नानवेज बिरयानी खिलाई गई थी. इसके बाद हुए विवाद के बाद रविवार को प्रभागीय वनाधिकारी रामजी राय ने गांव पहुंचकर मजार और बाउंड्री का निरीक्षण किया. निरीक्षण में बाउंड्री वन विभाग की जमीन में बनी हुई पाई गई. डीएफओ के आदेश पर वन क्षेत्रधिकारी चरखारी ने उर्स के आयोजक कल्लू पुत्र पीर मोहम्मद को नोटिस जारी कर 14 सितंबर तक बाउंड्री गिराने का आदेश दिया है.

बाउंड्री दो साल पहले बनाई गई थी लेकिन मजार बहुत पुरानी है
बाउंड्री नहीं गिराने पर विभाग उसे ध्वस्त कर उसे बनाने वाले के खिलाफ कार्रवाई करेगा. डीएफओ के अनुसार, केवल बाउंड्री को गिराने के आदेश दिए गए हैं. मजार यथावत बनी रहेगी. वहीं, ग्रामीणों ने भी इस बात की पुष्टि की है कि बाउंड्री दो साल पहले बनाई गई थी लेकिन मजार बहुत पुरानी है.



पीर बाबा की मजार हटाना मुमकिन नहीं
डीएफओ रामजी राय ने बताया कि सालट गांव में सिर्फ पांच-छह परिवार मुस्लिम हैं और करीब डेढ़ सौ साल पुरानी पीर बाबा की मजार में मुस्लिमों से ज्यादा हिंदुओं की आस्था जुड़ी है. ऐसी स्थिति में उसे हटाना मुमकिन नहीं है. डीएफओ ने बताया कि निरीक्षण में पाया गया कि गांव के सभी वर्ग के लोगों ने चंदा जुटाकर दो या तीन साल पहले वन विभाग की जमीन पर मजार की दीवार और गुम्बद का निर्माण करवाया है, जिसके तोड़ने का विरोध हिन्दू ज्यादा कर रहे हैं. बकौल डीएफओ, मजार हटाने से गांव में कायम सामाजिक सौहार्द्र के बिगड़ने का खतरा है और मुस्लिम कम, हिन्दू इसका ज्यादा विरोध करेंगे.

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