योगी राज में पुलिस के लिए सिरदर्द बना 7 लाख का इनामी बीहड़ का ये डकैत

News18 Uttar Pradesh
Updated: August 21, 2019, 4:30 PM IST
योगी राज में पुलिस के लिए सिरदर्द बना 7 लाख का इनामी बीहड़ का ये डकैत
बीहड़ में डकैत बबली कोल का आतंक

बबली कोल (Babli Kol) और यूपी पुलिस के बीच आमना-सामना कई बार हुआ, लेकिन पुलिस को सफलता हाथ नहीं लगी. यही नहीं एक एनकाउंटर में पुलिस का दरोगा भी शहीद हो गया लेकिन...

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चित्रकूट (Chitrakoot) के बीहड़ों में आतंक का पर्याय बन चुके डकैत बबली कोल अखिलेश सरकार के बाद अब योगी राज में भी पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ है. बबली कोल और यूपी पुलिस के बीच आमना-सामना कई बार हुआ, लेकिन पुलिस को सफलता हाथ नहीं लगी. यही नहीं एक एनकाउंटर में पुलिस का दरोगा भी शहीद हो गया लेकिन बबली कोल हाथ नहीं लगा. स्थिति ये है कि चित्रकूट में 7 लाख के इनामी डकैत बबली कोल के आतंक ने एक बार फिर यहां के बाशिंदों को घरों में दुबक जाने के लिए विवश कर दिया है.

वर्ष 2018 की फरवरी में चित्रकूट में डकैत बबली कोल से जंगलों में पुलिस की मुठभेड़ हो गई. मारकुंडी थाना क्षेत्र के बंदरचुआ के बड़े जंगल में पुलिस के कॉम्बिंग के दौरान ये इनकाउंटर हुआ. दोनों तरफ से आधे घंटे से गोलियों की तड़तड़ाहट से जंगल गूंज उठा. लेकिन बाद में पता चला कि इनकाउंटर में बबली कोल चित्रकूट पुलिस को एक बार​ फिर चकमा देकर फरार हो गया है. पुलिस ने एक राइफल तीन कारतूस एक मोबाइल सहित कई दैनिक उपयोग चीजों को बरामद की.

इससे पहले 2017 में चित्रकूट जिले के मानिकपुर के जंगल में भी इनामी डकैत बबली कोल और उसके गिरोह के साथ पुलिस की मुठभेड़ हुई थी. उस दौरान भी कई घंटे फायरिंग के बाद बबली कोल भागने में सफल रहा था. इसमें रैपुरा थाने में तैनात सब इंस्पेक्टर जयप्रकाश सिंह शहीद हो गए थे. इस मुठभेड़ में एक घायल डकैत भी पकड़ा गया था. वहीं मुठभेड़ में बाहिलपुरवा सब इंस्पेक्टर वीरेन्द्र त्रिपाठी को भी गोली लगी थी.

उपचुनाव की आहट के बाद सक्रिय हुआ डकैत

अब मानिकपुर विधानसभा में उपचुनाव होना है और चुनाव के पहले अपने नाम की बादशाहत और आतंक का साम्राज्य कायम करने के लिए डकैत बबली कोल ने एक बार फिर व्यापारी का अपहरण कर 50 लाख की फिरौती मांगी है. घटना के बाद से ही यूपी पुलिस में हड़कंप मचा हुआ है.

Kidnapped business man brother
अपहृत ब्रजमोहन के भाई भरत कुमार पांडेय


चित्रकूट जनपद के मानिकपुर थाना क्षेत्र के बराहा कोलान गांव में 15 अगस्त को इनामी डकैत बबली कोल व उसका साथी लवलेश कोल गांव में धमके और ब्रजमोहन पांडेय के घर पहुंच गए. घर मे ब्रज मोहन खोवा बना रहा था, तभी बबली कोल ने व्यापारी को अगवा कर लिया. डकैत ने उसकी बीवी को घर के अंदर बंद करके बाहर से कुंडी लगा दी थी. सुबह होते ही डकैत बबली कोल ने अपहृत के भाई भरत पांडेय के पास फोन लगाया और उनसे 50 लाख की फिरौती मांगी. 24 घण्टे के अंदर न देने पर उसे जान से मारने की बात कही.
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पुलिस कार्रवाई महज खानापूर्ति

उधर व्यापारी के परिजन गुहार लगाने पुलिस के पास पहुंचे तो मानिकपुर पुलिस यह कहती रही कि कहीं चला गया होगा, उसको ढूंढ़ो. अगर पुलिस का सहारा लोगे तो उसकी जान को खतरा हो सकता है. यह सुनकर परिजन वापस लौट गए जब दो दिन बाद जब मीडिया में अपहरण की खबरें छपीं, तब जाकर पुलिस अधीक्षक के हस्तक्षेप के बाद इनामी डकैत बबली कोल व लवलेश कोल के खिलाफ मानिकपुर थाने में एफआईआर लिखी गई. लेकिन इसके बाद भी पकड़ छुड़वाने के लिए कॉम्बिंग की खानापूर्ति ही की जा रही है.

50 लाख की फिरौती घटाकर की 10 लाख!

खोआ व्यापारी के अपहरण के चार दिन बीत गए लेकिन चित्रकूट पुलिस उसका सुराग नही लगा पाई. वहीं इनामी डकैत बबुली कोल परिजनों से फोन पर लगातार फिरौती की रकम को लेकर सौदेबाजी कर रहा है और अब उसने फिरौती की रकम 50 लाख से कम करते करते 10 लाख कर दी है. पुलिस का हाल ये है कि परिजनों से पैसे देकर अपने इंतजाम से छुड़वाने की हिदायत दे रहे हैं. ऐसे में लाचार परिजनों का विश्वास चित्रकूट पुलिस से उठ गया और खुद ही फिरौती की रकम का इंतजाम करने में जुट गए हैं.

दरअसल मिनी चंबल चित्रकूट में सदियों से पीढ़ी दर पीढ़ी डकैतों की समस्या चली आ रही है. पहले दस्यु डकैत ददुआ और फिर बलखड़िया और अब बबली कोल  का आतंक बना हुआ है. एक के बाद एक डकैत जन्म लेते चले आ रहे हैं लेकिन पुलिस कभी इन डकैतो का खात्मा नही कर पाई है.

अपहृत व्यापारी के भाई ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

अपहृत ब्रजमोहन के भाई भरत कुमार पांडेय कहते हैं कि बबली कोल ने पहले 50 लाख रुपए फोन कर मांगे, अब 10 लाख रुपए देने की बात कह रहा है. जब हमने उससे कहा कि 50 हजार से एक लाख रुपए तक किसी से मांग कर इंतजाम कर सकते हैं तो धमकी दे रहा है. भरत कहते हैं कि वहीं पुलिस कुछ नहीं कर रही है, उलटे कहती है कि अपने भाई को अपने स्तर से छुड़ाइए, हमारे चक्कर में कहीं उसको वह मार न डाले.

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पूर्व दस्यु सरगना जनार्दन सिंह पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हैं.


वहीं पूर्व दस्यु सरगना जनार्दन सिंह कहते हैं कि पुलिस प्रशासन कभी भी किसी भी गैंग से सीधे लड़ने को तैयार नहीं है. पुलिस चाहती है कि उन्हें गैंग का सीधे सुराग लग जाए और वो सोते मिलें और ये पहुंचे और गोली मार दें.

(इनपुट: अखिलेश सोनकर)

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First published: August 21, 2019, 4:26 PM IST
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