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5 साल से गायब था घर का लाडला, आधार कार्ड ने ऐसे लौटाईं परिवार को खुशियां

मंगलवार देर शाम मनीष अपने गांव पहुंच गया जिसके बाद परिजनों में खुशी की लहर छा गयी. उसकी बहन ने उसकी आरती उतार कर उसके हाथ मे राखी बांधी. वहीं उसके परिजन इस शुभ घड़ी के बाद काफी उत्साहित नजर आ रहे हैं.

मंगलवार देर शाम मनीष अपने गांव पहुंच गया जिसके बाद परिजनों में खुशी की लहर छा गयी. उसकी बहन ने उसकी आरती उतार कर उसके हाथ मे राखी बांधी. वहीं उसके परिजन इस शुभ घड़ी के बाद काफी उत्साहित नजर आ रहे हैं.

मंगलवार देर शाम मनीष अपने गांव पहुंच गया जिसके बाद परिजनों में खुशी की लहर छा गयी. उसकी बहन ने उसकी आरती उतार कर उसके हाथ मे राखी बांधी. वहीं उसके परिजन इस शुभ घड़ी के बाद काफी उत्साहित नजर आ रहे हैं.

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चित्रकूट. मेरा आधार मेरी पहचान... स्लोगन लिखा आधार कार्ड (Aadhar Card) एक ऐसे पिता के लिए नया सवेरा लेकर आया है जो 5 साल से गुम बेटे की आस छोड़ चुका था. उसको आधार से उम्मीद बंधी थी कि जल्द ही गुम बेटा उनकी आंखों के सामने होगा और फिर वह दिन आ गया कि 5 साल पहले गायब बेटा अब उनकी आंखों के सामने है. मामला चित्रकूट (Chitrakoot) जनपद के बरगढ़ थाना क्षेत्र के लाढ़ौता गांव का है. जहां मनीष सिंह नाम का छात्र अपने मौसिया बालेंदु सिंह जिला प्रयागराज के शंकरगढ़ के महौरिया गांव में 5 साल पहले रहकर पढ़ता था. जो रोज की तरह स्कूल के लिए अपनी साइकिल से सुबह निकला था, लेकिन वह अपने मोसिया के घर वापस नहीं आया था. जिसके बाद परिजनों ने उसकी तलाश करना शुरू कर दिया था. लेकिन उसका कहीं नहीं पता चला था.

उसकी साइकिल उसी गांव के भगदेवा चौराहे पर खड़ी हुई मिली थी. जिसके बाद परिजनों ने 5 जनवरी 2015 को प्रयागराज के शंकरगढ़ थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी और उसके बाद लगातार उसको कई शहरों में ढूंढ रहे थे. लेकिन उसका कहीं भी कुछ पता नहीं चला. हर तरीके से जब उसको ढूंढ कर थक गए तो उसके परिजन घर में बैठ गए.

लेकिन 4 सितंबर को एक ऐसी डाक उनके घर पहुंची जिससे उसके परिजन खुशी से समय नहीं रहे उस डाक में खोए हुए बेटे मनीष का आधार कार्ड था. जिसमें मोबाइल नंबर लिखा हुआ था. जिस पर परिजनों ने फोन लगाया तो उसकी खोए हुए बेटे से बात हो गई और परिजनों ने उस नंबर पर वीडियो कॉल करके उसकी पहचान भी कर ली.  जिस पर कोई भी बेटे ने कुछ दिनों पर आने के लिए भी कहा पर पीड़ित परिजनों ने बरगढ़ थाने में एक शिकायती पत्र भी दिया के आधार कार्ड में लिखे नंबर को सर्विलांस में लगाया जाए जिससे उसका पता चल जाए और जल्द खोया हुआ उनका बेटा उनके घर आ जाए.



चित्रकूट पुलिस ने  बरगढ़ थाने को सूचित कर दिया और नंबर को सर्विलांस में लगाकर उस तक पहुंचने का प्रयास कर रहे थे. ऐसे में मंगलवार देर शाम मनीष अपने गांव पहुंच गया जिसके बाद परिजनों में खुशी की लहर छा गयी. उसकी बहन ने उसकी आरती उतार कर उसके हाथ मे राखी बांधी. वहीं उसके परिजन इस शुभ घड़ी के बाद काफी उत्साहित नजर आ रहे हैं. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया के सपने को सराहा है और कहा है कि आधार कार्ड से आज उनका खोया हुआ बेटा मिल गया है. मनीष भी अपने परिवार के बीच आकर काफी खुश नजर आ रहा है.
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