ये कैसी ड्यूटी, सहायक निर्वाचन अधिकारी और उनकी पत्नी बीमार तो भी छुट्टी नहीं, अब परिवार के साथ ही निभा रहे जिम्मेदारी

प्रताप नारायण खुद भी खांसी और बुखार से पीड़ित हैं और उनकी पत्नी भी.

प्रताप नारायण खुद भी खांसी और बुखार से पीड़ित हैं और उनकी पत्नी भी.

शिक्षक प्रताप नारायण को कर्वी ब्लॉक का सहायक निर्वाचन अधिकारी बनाया गया है. वे और उनकी पत्नी खांसी और बुखार से पीड़ित हैं. उन्हें छुट्टी नहीं मिली तो वे बीमारी की हालत में ही ड्यूटी कर रहे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 10, 2021, 11:49 PM IST
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चित्रकूट. उत्तर प्रदेश के पंचायत चुनाव (UP Panchayat Election) में शिक्षकों की चुनावी ड्यूटी (Election duty) को लेकर बेहद सख्त रवैया अपनाया गया है. आलम यह है कि एक बीमार शिक्षक की चुनावी ड्यूटी भी लगाई गई है. उन्हें बुखार और खांसी (fever and cough) है. जब उन्होंने अपनी बीमारी का हवाला देकर छुट्टी चाही तो उन्हें लापरवाही का नोटिस थमा दिया गया. इसी दौरान उनकी पत्नी की भी तबियत बिगड़ गई. ऐसे में उनकी पत्नी की देखभाल करने वाला घर में कोई नहीं था. कोई रास्ता न देख अब वे अपनी पत्नी को भी ड्यूटी स्‍थल पर ले आए हैं. फिलहाल इस शिक्षक की तैनाती कर्वी विकासखंड (Karvi Block) में बतौर सहायक निर्वाचन अधिकारी (Assistant Election Officer) है.

उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में है कर्वी विकासखंड. पंचायत चुनाव के लिए यहां चित्रकूट इंटर कॉलेज के शिक्षक प्रताप नारायण श्रीवास्तव को सहायक निर्वाचन अधिकारी बनाया गया है. प्रताप नारायण ने अपनी बीमारी का हवाला देकर चुनावी ड्यूटी से छुट्टी चाही थी, लेकिन अधिकारियों ने उन्हें लापरवाही का नोटिस थमा दिया. मजबूरी में प्रताप नारायण ने कर्वी विकासखंड में अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं.

प्रताप नारायण अपने बुखार और खांसी के बावजूद जिस तरह से चुनावी ड्यूटी कर रहे हैं, वह कोरोना संक्रमण के दौर में कहीं घातक न हो जाए. फिलहाल, उनकी पत्नी को भी बुखार और खांसी है. घर पर उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं, इसलिए बीमार प्रताप नारायण अपनी बीमार पत्नी को भी कार्यालय ले आए और अब इसी हाल में वह काम कर रहे हैं.

उनका कहना है कि 37 साल की अपनी नौकरी में उन्होंने कभी कोताही नहीं बरती. लेकिन अधिकारी अब भी उनकी और उनकी पत्नी की तबीयत की गंभीरता नहीं समझ रहे. इस मामले में जब विभागीय अधिकारियों से रिपोर्टर ने बात की तो अधिकारियों ने कुछ भी बोलने से मना कर दिया.
फिलहाल, बीमार सहायक अधिकारी रोज अपनी बीमार पत्नी को कार्यालय लाकर कामकाज कर रहे हैं. ऐसी हालत में भी छुट्टी न देने वाले अधिकारियों की यह संवेदनहीनता कहीं बाकी लोगों पर भारी न पड़ जाए. जिस तरह से प्रताप नारायण और उनकी पत्नी बुखार और खांसी से पीड़ित हैं, अगर यह कोरोना के लक्षण हुए तो यहां चुनावी ड्यूटी में लगे अन्य मतदानकर्मियों को इसका खमियाजा भुगतना पड़ सकता है.
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