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शहादत का इंतकाम नहीं ले पाई पुलिस, बबुली कोल के खिलाफ धीमा पड़ा ऑपरेशन

बबुली कोल (फाइल फोटो)
बबुली कोल (फाइल फोटो)

उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश में आतंक का पर्याय बने 7 लाख के इनामी डकैत बबुली कोल के सामने यूपी पुलिस सरेंडर कर​ती नजर आ रही है.

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उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में आतंक का पर्याय बने 7 लाख के इनामी डकैत बबुली कोल के सामने यूपी पुलिस का ऑपरेशन धीमा नजर आ रहा है. एक दरोगा की शहादत और एक अन्य के घायल होने के बाद भी उत्तर प्रदेश पुलिस बैकफुट पर नजर आ रही है.

जानकारी के अनुसार, तमाम आला अफसरों ने जंगल छोड़ शहर का रुख कर लिया है. सिर्फ अकेले एसपी चित्रकूट ही अब कॉम्बिंग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं.

24 अगस्त की अल सुबह जब बबुली कोल और उसके गैंग की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने निहीचिरैया के जंगलों में जाल बिछाया. तड़के शुरू हुए इस इनकाउंटर में डकैतों ने पुलिस को चौंकाते हुए भारी फायरिंग झोंक दी, जिसमें सब इंस्पेक्टर जेपी सिंह बुरी तरह घायल हो गए.



जब तक उन्हें अस्पताल पहुंचाया जाता, उनकी मृत्यु हो गई. दरोगा की शहादत की खबर लखनऊ पहुंची और सीएम योगी से लेकर तमाम पुलिस के आलाधिकारियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी. इस दौरान प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार ने बताया कि आॅपरेशन जारी है.
इस समय लग रहा था कि दरोगा की शहादत के बाद बबुली कोल का खात्मा अब नजदीक ही है. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. कई घंटे चले इस इनकाउंटर में पुलिस की तरफ से छन-छन कर खबरें आती रहीं. पता चला कि एक अन्य दरोगा वीरेंद्र त्रिपाठी भी घायल हो गए हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है. वहीं पुलिस ने चार डकैतों, जिनमें एक घायल भी था को पकड़ने का दावा किया.

इनकाउंटर तो शाम तक खत्म हो गया लेकिन उसके बाद बबुली कोल पुलिस के हाथ नहीं लग सका. इसके बाद कॉम्बिंग में पीएसी की कोबरा टीम भी जंगलों में उतार दी गई. लेकिन हाथ कुछ नहीं लगा. कई दिनों के आॅपरेशन के बाद अब पता चला ​है कि पुलिस के बड़े अफसर मैदान में नहीं दिख रहे हैं.

ये सभी चित्रकूट से लौट चुके हैं. इलाहाबाद के एडीजी के बाद अब डीआईजी बांदा ने भी लगभग मैदान छोड़ दिया है. इन्होंने औपचारिकता निभाते हुए चित्रकूट पुलिस को कॉम्बिंग का पूरा जिम्मा सौंप दिया है. इस समय मानिकपुर थाना क्षेत्र में निहीचिरैया के जंगलों में भारी फोर्स के साथ एसपी चित्रकूट ही कॉम्बिंग कर रहे हैं.

 
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