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बाबा तुलसी के मुख से कब निकला राम का नाम? फिर कैसे बन गए राम भक्त तुलसी 

रामचरितमानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास के मुख से जन्म लेते ही राम का नाम निकला. श्री राम की भक्ति में बाबा तुलसी लीन ह ...अधिक पढ़ें

रिपोर्ट – धीरेन्द्र शुक्ला
चित्रकूट : गोस्वामी तुलसीदास का जन्म वर्ष 1497 में चित्रकूट के राजापुर में हुआ था . इनके पिता आत्माराम और माता थीं हुलसी. कहा जाता है कि नौ महीने के बजाय तुलसी मां के गर्भ में बारह माह रहे. जन्म लेते ही उनके मुख से राम शब्द निकला. कहते हैं कि उनकी माता ने किसी अनिष्ट की आशंका से नवजात तुलसी को अपनी दासी चुनियां के साथ उसकी ससुराल भेज दिया . अगले ही दिन उनकी मां की मृत्यु हो गई . तुलसी जब मात्र 6 वर्ष के थे, तो चुनियां का भी देहांत हो गया. मान्यता है कि भगवान शंकर की प्रेरणा से स्वामी नरहरिदास ने बालक तुलसी को ढूंढ निकाला और उनका नाम रामबोला रख दिया . तुलसीदास का विवाह रत्नावली के साथ हुआ. रात्रि में पत्नी के मायके पहुंचने पर – जब पत्नी रत्नावली ने अपने तुलसी को धिक्कारा, तभी से तुलसी प्रभु श्रीराम की भक्ति की ओर उन्मुख हो गए.

गुण-अवगुण की व्याख्या गोस्वामी तुलसीदास ने श्रीराम की कथा जन-सुलभ बनाने के लिए रामचरितमानस की रचना की. इसमें उन्होंने सामान्य आदमी के गुण-अवगुण की व्याख्या बडे ही सुंदर शब्दों में की है. बालकांड में चौपाई है-
साधु चरित सुभचरित कपासू । निसर बिसद गुन मय फल जासू ।। ,
सहि दुख परछिद्र दुरावा । बंदनीय जेहिं जग जस पावा ।

अर्थात सज्जन पुरुषों का चरित्र कपास के समान नीरस, लेकिन गुणों से भरपूर होता है. जिस प्रकार कपास से बना धागा सुई के छेद को स्वयं से ढककर वस्त्र तैयार करता है, उसी प्रकार संत दूसरों के छिद्रों (दोषों) को ढ़ंकने के लिए स्वयं अपार दुख सहते हैं. इसलिए ऐसे पुरुष संसार में वंदनीय और यशस्वी होते हैं. उन्होंने सत्संगति की महत्ता पर भी बल दिया है. वे मानते हैं कि राम की कृपा के बिना व्यक्ति को सत्संगति का लाभ नहीं मिल सकता है .

चित्रकूट के राजापुर में दूरदराज से भारी संख्या में तुलसी के भक्त पहुचते हैं . राजापुर में बाबा तुलसी के जीवन से संबंधित सभी चीजे आज भी मौजूद है.

Tags: Lord Ram, Ramayan

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