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सरकार के लिए चुनौती बना ई-टेंडर सिस्‍टम, इस वजह से अधिकारी करते हैं कंप्यूटर से छेड़छाड़

News18 Uttar Pradesh
Updated: June 24, 2019, 10:50 AM IST
सरकार के लिए चुनौती बना ई-टेंडर सिस्‍टम, इस वजह से अधिकारी करते हैं कंप्यूटर से छेड़छाड़
ई-टेंडर प्रक्रिया में हुए घोटाले से परेशान है यूपी सरकार. (फाइल फोटो)

अपनी प्रतिष्ठा को बचाने के प्रयास में सरकार ने इसके बाद भ्रष्ट अधिकारियों पर राज्य भर में कड़ी कार्रवाई शुरू की और यूपीएसडब्ल्यूसी के प्रबंध निदेशक आलोक सिंह को निलंबित किया.

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राज्य में व्याप्त भ्रष्टाचार के बारे में गंभीरता से काम कर रहे हैं और उनका इरादा भ्रष्टाचार को जड़ से उखाड़ फेंकने का है. लेकिन यूपी के शीर्ष अधिकारियों ने सरकारी स्वामित्व वाले यूपी स्टेट वेयरहाउसिंग कॉपोरेशन (यूपीएसडब्ल्यूसी) की निविदा में अनुकूल कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए सरकारी कंप्यूटर प्रणाली से कथित तौर पर छेड़छाड़ की है.

ई-टेंडर गिरोह का पता कॉपोरेशन के मुरादाबाद क्षेत्रीय कार्यालय में चला है और यह पूरे प्रदेश में फैला हुआ है. हैरानी की बात ये है कि इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र वाराणसी भी शामिल है. जबकि इस खुलासे के बाद योगी आदित्यनाथ की सरकार पर भी सवाल उठाता है, जो पारदर्शी सरकार का दावा करती है.

यूपीएसडब्ल्यूसी के प्रबंध निदेशक आलोक सिंह निलंबित
बहरहाल, अपनी प्रतिष्ठा को बचाने के प्रयास में सरकार ने इसके बाद भ्रष्ट अधिकारियों पर राज्य भर में कड़ी कार्रवाई शुरू की और यूपीएसडब्ल्यूसी के प्रबंध निदेशक आलोक सिंह को निलंबित किया और उनके करीबी संजीव कुमार को चुना. वह ( संजीव कुमार) क्षेत्रीय प्रबंधक स्तर के अधिकारी हैं. जबकि अब 12 से ज्यादा अधिकारी एक उच्चस्तरीय समिति की जांच के दायरे में हैं. हालांकि इससे पहले वेयरहाउस में करीब 16.56 करोड़ रुपये के बीजों की खरीद के लिए धन की निकासी के लिए फर्जी रसीद का इस्तेमाल करने का घोटाला सामने आया था.

मुख्यमंत्री योगी के आदेश पर कड़ी कार्रवाई
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राज्य में दो दशक से व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. जबकि खुलासे में साफ हुआ है कि वेयरहाउस में समाजवादी पार्टी और बसपा की सरकार के दौरान जमकर घोटाले हुए हैं. हालांकि अब सरकारी योजनाओं और परियोजनाओं से जुड़े बड़ी संख्या में भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने सख्‍त रूख अपना लिया है. यही नहीं, वह जल्द ही कानून-व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा करेंगे और थानों (पुलिस स्टेशनों), तहसीलों और अस्पतालों का औचक निरीक्षण करेंगे, जो भ्रष्टाचार का अड्डा बन गए हैं.

ऐसे हुआ खुलासायूपीएसडब्ल्यूसी की एक विभागीय जांच में पाया गया है कि अधिकारियों ने ई-निविदाओं में हेरफेर करने के लिए कंप्यूटर प्रणाली से छेड़छाड़ की है. इसमें ट्रांसपोर्टेशन व हैंडलिंग वाले भी शामिल हैं. जबकि कुछ पक्षों को फायदा पहुंचाने के लिए अनुबंध की शर्तों व नियमों को बदला गया. ऐसी निविदाओं के ऑनलाइन रखे जाने के बाद किया गया. इसके अतिरिक्त बाद के चरण में अधिकारियों ने भी दरों में बदलाव किया और कुछ कारोबारियों के पक्ष में डेटा में भी हेरफेर किया गया.

1950 में हुई थी यूपीएसडब्ल्यूसी की स्‍थापना
यूपीएसडब्ल्यूसी की स्थापना 1950 के दशक में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा की गई, जिससे लाखों किसानों व सरकारी एजेंसियों को कृषि उपज, बीज और कृषि उपकरणों के भंडारण, बिक्री और खरीद में मदद मिल सके. जबकि वर्तमान में इसके राज्य भर में 156 वेयरहाउस हैं, लेकिन इनमें से अधिकांश भ्रष्‍टाचार से जूझ रहे हैं.

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First published: June 24, 2019, 10:41 AM IST
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