चम्बल के नए हथियार, बंदूक नहीं अब लैपटॉप-मोबाइल फोन से फैला रहे दहशत

नासिर हुसैन | News18Hindi
Updated: August 30, 2019, 12:26 PM IST
चम्बल के नए हथियार, बंदूक नहीं अब लैपटॉप-मोबाइल फोन से फैला रहे दहशत
प्रतीकात्मक फोटो- चम्बल के बीहड़ में कुछ इसी तरह के ऊंचे-ऊंचे टीले हैं जिन्हें साइबर ठगों ने आजकल अपना ठिकाना बना लिया है.

चम्बल के बीहड़ों में डकैतों की जगह साइबर ठगों ने ले ली है. बंदूकों की जगह अब यहां लैपटॉप के की-बोर्ड की आवाज़ें और मोबाइल की रिंग टोन ज्यादा सुनाई पड़ती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 30, 2019, 12:26 PM IST
  • Share this:
चम्बल के बीहड़ों में अब बंदूकें शांत हो चुकी हैं. आखिरी डकैत जगन गुर्जर भी जेल की सलाखों के पीछे पहुंच चुका है. खास चम्बल (Chambal) के डकैतों के लिए बना राजस्थान डकैती एक्ट (आरडीए) भी आखिरी बार जगन पर भी लगाया गया था. पुलिस की टीमें भी अब बीहड़ों की खाक छानते हुए नहीं दिखाई देती हैं. लेकिन खास बात यह है कि चम्बल के बीहड़ों में डकैतों (Dacait) की जगह साइबर ठगों ने ले ली है. बंदूकों की जगह अब यहां लैपटॉप (Laptop) के की-बोर्ड की आवाज़ें और मोबाइल (Mobile) की रिंग टोन ज्यादा सुनाई पड़ती है. ऊंचे-ऊंचे मिट्टी के टीलों के बीच झोपड़ी में बैठे साइबर ठग देशभर में दहशत फैला रहे हैं. यूपी पुलिस (UP Police) की साइबर (Cyber) यूनिट (आगरा ज़ोन) (Agra Zone) के मुताबिक इस वक्त चम्बल के बीहड़ों में करीब 20 गैंग सक्रिय हैं. दो गैंग को टीम ने हाल ही में पकड़ा है.

दो दिन पहले यूपी पुलिस की साइबर यूनिट (आगरा ज़ोन) ने 24 लोगों के एक और गिरोह का खुलासा किया है. यह गिरोह मोबाइल पर एनआरआई लड़कियों से बात कराने और उनके साथ डेटिंग कराने के नाम पर लोगों से ठगी करता था. पहले रजिस्ट्रेशन के नाम पर पैसे लिए जाते थे. उसके बाद डेटिंग के लिए कार, होटल और दूसरी सुविधाओं के नाम पर बैंक खाते में रुपये डलवाए जाते थे. ठगी के दौरान बीहड़ में नेटवर्क रुकावट न बने इसके लिए यह ठग कई-कई कंपनियों की सिम का इस्तेमाल करते हैं.

चम्बल के बीहड़ में उतरे कौन हैं यह साइबर अपराधी

यूपी पुलिस की साइबर यूनिट (आगरा ज़ोन) के इंस्पेक्टर शैलेश कुमार सिंह की मानें तो यूपी के बाह इलाके से होकर चम्बल नदी बहती है. नदी से लगे ही बीहड़ हैं. अक्सर देशभर में साइबर अपराधी ट्रेस हो रहे हैं. उसमे से कुछ की लोकेशन चम्बल के बीहड़ की आती है. अभी कुछ दिन पहले ही हमारी टीम ने बाह में छापा मारकर दो गिरोह को गिरफ्तार किया था. इस गिरोह की शिकायत भी यूपी के बाहर से आई थी. नदी से लगे करीब 20 से अधिक ऐसे गांव हैं जहां के रहने वाले साइबर अपराधी बीहड़ों में बैठकर ठगी का धंधा चला रहे हैं.

प्रतीकात्मक फोटो- पुलिस के अनुसार इसी चम्बल नदी के आसपास ऐसे करीब 20 गांव हैं जहांं के साइबर ठग देशभर में लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं.


चम्बल में बैठकर देशभर में ऐसे बनाते हैं शिकार

चम्बर के बीहड़ में सक्रिय हुए साइबर अपराधी एयरपोर्ट, कंपनियों में नौकरी, मोबाइल टॉवर लगवाने और लड़कियों से बातचीत करने और उनके साथ डेटिंग करने आदि के नाम पर लोगों को ठग रहे हैं. पहले रजिस्ट्रेशन तो फिर दूसरी कार्रवाई के नाम पर रुपये ऐंठते हैं. जब तक लोग इनकी चाल को समझ नहीं पाते और इनके कहे अनुसार चलते हैं तब तक यह सामने वाले से बात करते हैं.
Loading...

चम्बल के बीहड़ में बैठकर ऐसे चलाते हैं नेटवर्क

साइबर एक्सपर्ट इंस्पेक्टर शैलेश कुमार सिंह की मानें तो आईजी ज़ोन आगरा ए. सतीश गणेश के नेतृत्व में काम कर रही उनकी टीम चम्बल में सक्रिय साइबर अपराधियों के बारे में काफी जानकारी इकट्ठी कर चुकी है. और भी कई तरह की जानकारियां जुटाई जा रही हैं. इनके नेटवर्क के बारे में बात करें तो यह सबसे पहले किसी भी राज्य की रजिस्टर्ड दो मोबाइल सिम खरीदते हैं. सिम फर्जी आईडी पर होती हैं या किसी से को रुपये का लालच देकर उससे सिम ले लेते हैं. एक बैंक खाता किराए पर ले लेते हैं.

प्रतीकात्मक फोटो- पुलिस से बचने के लिए यह साइबर ठग नदी के किनारे बीहड़ों को अपना ठिकाना बना रहे हैं.


फिर इंटरनेट पर सर्च कर उस राज्य में काम करने वाली विज्ञापन एजेंसी से संपर्क करते हैं. नौकरी और मोबाइल टॉवर लगवाने का विज्ञापन निकलवाते हैं. विज्ञापन में वही दो मोबाइल नम्बर दे देते हैं. यह नम्बर फर्जी आईडी पर लिए गए होते हैं. कॉल आने का सिलसिला शुरु हो जाता है और चम्बल में बैठे यह साइबर ठग लोगों को शिकार बनाना शुरु कर देते हैं.

इसलिए चम्बल के बीहड़ को बनाया ठिकाना

इंस्पेक्टर शैलेश बताते हैं कि बीहड़ों में मिट्टी के इतने ऊंचे-ऊंचे टीले हैं कि उनके पीछे कौन है और कौन नहीं यह देखना बहुत मुश्किल होता है. इतना ही नहीं नदी किनारे का इलाका इतना दलदली है कि वहां चलना भी दूभर हो जाता है. और जब तक पुलिस घेराबंदी करती है साइबर ठग वहां से रफूचक्कर हो जाते हैं. स्थानीय होने के चलते यह इलाके के चप्पे-चप्पे से वाकिफ होते हैं.

ये भी पढ़ें-

40000 हिन्‍दुओं का एक सवाल- वो कौन हैं जो हमें मिजोरम में नहीं रहने दे रहे

कौन हैं यह 40 हजार हिन्दू शरणार्थी जो रोज 600 ग्राम चावल और 5 रुपये में कर रहे गुजारा

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए आगरा से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: August 30, 2019, 11:12 AM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...