देवरिया कांड: सीएम योगी से मिलीं मंत्री रीता बहुगुणा जोशी, ताबड़तोड़ कार्रवाई जारी

दरअसल, मामले में महिला एवं बाल कल्याण विभाग और जिला प्रशासन की लापरवाही सामने आई है. सवाल यह उठ रहे हैं कि 23 जून 2017 को मान्यता खत्म होने के बाद 30 जुलाई 2018 को एफआईआर क्यों कराई गई?

News18 Uttar Pradesh
Updated: August 6, 2018, 2:37 PM IST
देवरिया कांड: सीएम योगी से मिलीं मंत्री रीता बहुगुणा जोशी, ताबड़तोड़ कार्रवाई जारी
महिला एवं बाल विकास मंत्री रीता बहुगुणा जोशी की फाइल फोटो
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Updated: August 6, 2018, 2:37 PM IST
देवरिया के मां विंध्यवासिनी बालिका संरक्षण गृह में लड़कियों से देह व्यापार का खुलासा होने पर सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ महिला एवं बाल विकास मंत्री रीता बहुगुणा जोशी को तलब किया. मुख्यमंत्री ने रीता बहुगुणा जोशी से मामले में मंगलवार शाम तक पूरी रिपोर्ट तलब की है. जिसके बाद प्रमुख सचिव महिला कल्याण रेणुका कुमार पूरी टीम के साथ देवरिया जाएंगी.

सीएम से मुलाकात के बाद रीता बहुगुणा जोशी ने प्रेस कांफ्रेंस कर जानकारी दी कि मामले में पूर्व डीपीओ अभिषेक पांडेय को निलंबित कर दिया गया है. जबकि समाज कलायन विभाग के डीपीओ नीरज कुमार और अनुज सिंह के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं. दोनों को ही अभिषेक पांडेय की जगह समाज कल्याण विभाग का अतिरिक्त कार्यभार दिया गया था. वहीं मुख्यमंत्री ने डीएम सुजीत कुमार को हटा दिया है.

प्रमुख सचिव महिला कल्याण रेणुका कुमार के नेतृत्व में दो सदस्यीय टीम हेलीकाप्टर से देवरिया के लिए रवाना हो गईं हैं. दोनों ही मंगलवार शाम तक अपनी रिपोर्ट देंगी.

दरअसल, मामले में महिला एवं बाल कल्याण विभाग और जिला प्रशासन की लापरवाही सामने आई है. सवाल यह उठ रहे हैं कि 23 जून 2017 को मान्यता खत्म होने के बाद 30 जुलाई 2018 को एफआईआर क्यों कराई गई? इतना ही नहीं 30 जुलाई को लिखी गई एफआईआर पर पुलिस ने कार्रवाई क्यों नहीं की. फिलहाल रविवार रात दर्ज हुई एफआईआर में शारिरिक छेड़छाड़ और पॉक्सो की धारा बढ़ाई गई है.

उधर, मामले में मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने कहा है कि ये संरक्षण गृह अनाधिकृत रूप से चल रहा था. पहले भी कई बार इस संरक्षण गृह को बंद करने के लिए नोटिस दिए गए. उन्होंने कहा कि मामला बेहद गंम्भीर है, हर बिंदु पर जांच की जाएगी. उन्होंने कहा कि देह व्यापार होता था या नहीं? ये रिपोर्ट आने के बाद पता चलेगा.

डॉ रीता जोशी ने कहा कि हमने लखनऊ से एक टीम वहां भेजी है. जिलाधिकारी पूरे मामले की खुद जांच कर रहे हैं. प्रमुख सचिव, महिला और बाल कल्याण से शाम तक रिपोर्ट मांगी गई है.

बता दें रविवार शाम संरक्षण गृह से भागी एक लड़की ने पुलिस को यह जानकारी दी तो हड़कंप मच गया. पुलिस ने रात में ही संरक्षण गृह पर छापा मारा तो 42 में से 18 लड़कियां गायब मिलीं. पुलिस ने 24 लड़कियों को मुक्त कराते हुए संचालिका और उसके पति को गिरफ्तार कर लिया है.

उधर डीएम सुजीत कुमार कहते हैं कि कई बार शेल्टर होम में घुसने की कोशिश की गई लेकिन प्रशासन को सफलता नहीं मिली. फिलहाल मौके पर छानबीन की जा रही है, सभी कमरों की तलाशी ली जा रही है.

पुलिस अधीक्षक रोहन पी कनय ने बताया कि मां विंध्यवासिनी महिला एवं बालिका संरक्षण गृह नाम के एनजीओ की सूची में 42 लड़कियों के नाम दर्ज हैं, लेकिन छापे में मौके पर केवल 24 मिलीं. बाकी 18 लड़कियों का पता लगाया जा रहा है. नारी संरक्षण गृह के बारे में लंबे समय से शिकायत मिल रही थी.

बता दें अनियमितताओं के कारण इस शेल्टर होम की मान्यता जून-2017 में समाप्त कर दी गई थी. सीबीआई ने भी संरक्षण गृह को अनियमितताओं में चिह्नित कर रखा है. संचालिका हाईकोर्ट से स्थगनादेश लेकर इसे चला रही है.

उधर प्रदेश के डीजीपी ओपी सिंह ने कहा है कि अवैध संरक्षण गृह की सूचना के बाद पुलिस ने छापा मारकर 24 लड़कियों को मुक्त कराया है. एसपी देवरिया को दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं.
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