देवरिया शेल्टर होम के क्लर्क का दावा, इन वजहों से लगा देह व्यापार का आरोप

संदीप ने बताया कि यहां वे लड़कियां हैं, जो घर से अपने प्रेमी के साथ भागकर आई थीं. जब शेल्टर होम में उनके प्रेमी से मिलने नहीं दिया जाता था तो यह लड़कियां इसका विरोध करती थीं. इन लोगों ने मिलकर शेल्टर होम के खिलाफ साजिश रचते हुए देह व्यापार करवाने का आरोप लगाया है.

NAVEEN LAL SURI | News18Hindi
Updated: August 11, 2018, 12:10 PM IST
देवरिया शेल्टर होम के क्लर्क का दावा, इन वजहों से लगा देह व्यापार का आरोप
सांकेतिक तस्वीर
NAVEEN LAL SURI | News18Hindi
Updated: August 11, 2018, 12:10 PM IST
उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में मां विन्ध्यवासिनी शेल्टर होम में बच्चियों के साथ देह व्यापार कराने का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया था. देवरिया शेल्टर होम में साल 2010 से क्लर्क के पद पर काम करने वाले संदीप ने न्यूज़18 से बातचीत में कई अहम खुलासे किए है. संदीप ने दावा किया कि संस्था में कोई गलत काम नहीं होता था. फिलहाल इस मामले की गंभीरता को देखते हुए योगी सरकार ने आनन-फानन में एसआईटी गठन करके जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश की है.

मां विन्ध्यवासिनी शेल्टर होम में काम करने वाले संदीप ने कहा, ' शेल्टर होम की मैनेजर गिरिजा त्रिपाठी हम लोगों को हमेशा आधी सैलरी देती थी. संदीप बताते हैं कि मुझे हर महीने 14 हजार रुपये देने की बात कही गई थी, लेकिन मुझे 7 हजार रुपये दिए जाते थे. वह भी 3-4 महीने में एक बार.'

शेल्टर होम के हर गतिविधियों को बहुत नजदीक से नजर रखने वाले इस कर्मचारी ने दावा किया कि जिला प्रशासन के द्वारा लायी गई लड़कियों को ही यहां रखा जाता था. बच्चियों के द्वारा सेक्स रैकेट चलाने का आरोप लगाने के सवाल पर संदीप ने कहा कि सारे आरोप बेबुनियाद हैं.

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संदीप ने बताया कि यहां वे लड़कियां हैं, जो घर से अपने प्रेमी के साथ भागकर आई थीं. जब शेल्टर होम में उनके प्रेमी से मिलने नहीं दिया जाता था तो यह लड़कियां इसका विरोध करती थीं. इन लोगों ने मिलकर शेल्टर होम के खिलाफ साजिश रचते हुए देह व्यापार करवाने का आरोप लगाया है. देवरिया पुलिस पर बोलते हुए संदीप ने कहा कि शेल्टर होम में जिला प्रशासन के अधिकारी आते-जाते थे. वे शेल्टर होम की संचालिका गिरिजा त्रिपाठी से मुलाकात करके वापस लौट जाते थे.

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क्लार्क संदीप की फोटो


शेल्टर होम में लग्जरी गाड़ियों के आने के सवाल पर संदीप ने खुलासा किया कि बगल में होटल ट्यूलिप है. वहां जिला प्रशासन के अधिकारी बैठक करते हैं. उस दौरान अधिकारियों की गाड़ियां आती-जाती हैं. शेल्टर होम में कोई लग्जरी गाड़ी नहीं आती थी.

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देवरिया शेल्टर होम की एक पीड़िता ने न्यूज18 से बातचीत में खुलासा किया था कि शेल्टर होम के पीछे वाली गली में चार पहिया गाड़ी शाम को 4 बजे आकर रुकती थी. उसके बाद उसमें संरक्षण गृह की बड़ी दो लड़कियों को भेजा जाता था. उनके साथ छोटी बच्चियां भी भेजी जाती थीं. सभी लोग सुबह 6 बजे के करीब वापस लौटते थे. सुबह उनके हाथों में 500 से 1500 रुपए तक दिए जाते थे.

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उधर, देवरिया पुलिस ने मां विंध्यवासिनी बालिका संरक्षण गृह मामले में मुख्य आरोपी संचालिका गिरिजा त्रिपाठी के गोरखपुर स्थित वृद्धाश्रम को पुलिस ने सील कर दिया है. आरोपी की पुत्री कंचन लता त्रिपाठी को हिरासत में लेकर पुलिस पूछताछ कर रही है.

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