देवरिया में बीजेपी कैंडीडेट सत्य प्रकाश मणि त्रिपाठी ने आखिर कैसे दी बड़े-बड़े धुरंधरों को मात

देवरिया उपचुनाव में बीजेपी प्रत्याशी सत्य प्रकाश मणि त्रिपाठी
देवरिया उपचुनाव में बीजेपी प्रत्याशी सत्य प्रकाश मणि त्रिपाठी

UP Assembly Election 2020: देवरिया (Deoria) की सियासत पर नजर रखने वालों का मानना है कि राजनीतिक रूप से मजबूत कई लोगों को पछाड़कर सत्य प्रकाश मणि ने बाजी मारी है. उनके टिकट मिलने से पहले पांच नाम सबसे ऊपर थे.

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देवरिया. उत्तर प्रदेश विधानसभा उपचुनाव (UP Assembly By-Election) में देवरिया सीट (Deoria Seat) से भाजपा (BJP) का टिकट लेने वालों की लम्बी फेहरिस्त थी. एक से बढ़कर एक नाम रेस में थे. लखनऊ से लेकर दिल्ली तक धमाचौकड़ी मची थी. यही वजह रही कि भाजपा को इस सीट से टिकट की घोषणा करने में काफी देरी भी हुई. 6 सीटों के उम्मीदवारों की पहली लिस्ट के बाद उसे और 24 घंटे लगे देवरिया से टिकट फाइनल करने में लेकिन, इस जद्दोजहद में बाज़ी मारी एक ऐसे व्यक्ति सत्य प्रकाश मणि त्रिपाठी ने जिनके टिकट मिलने को सुनकर जिले में ज्यादातर लोग चौंक गए हैं.

कई दावेदारों को पीछे छोड़ा

देवरिया के स्थानीय पत्रकार पवन मिश्रा ने बताया कि वैसे तो सत्य प्रकाश मणि त्रिपाठी टिकट की रेस में थे लेकिन, उनका नाम उतनी दमदारी से ऊपर नहीं था. कई ऐसे लोग थे, जिनके टिकट मिलने की प्रबल संभावना थी. भाजपा ने सभी दिग्गजों को छोड़कर जिसे मैदान में उतारा है, उनके बारे में जानने लायक तो है. सत्य प्रकाश मणि त्रिपाठी लम्बे समय से भाजपा के लिए काम कर रहे हैं. उनके इसी समर्पण ने उन्हें उपचुनाव में टिकट का सेहरा पहनाया है.



शिक्षा से गहरा नाता
सत्य प्रकाश एक ऐसे परिवार से आते हैं, जिसमें राजनीतिक लोग भी रहे लेकिन, उससे ज्यादा ऐसे लोग हैं, जिनका शिक्षा के जगत में काम रहा है. उनके पिता ब्लाक प्रमुख रहे तो उनके भाई अमरकंटक विश्वविद्यालय के कुलपति हैं. ये पहले गोरखपुर विवि में रह चुके हैं. खुद डॉ सत्य प्रकाश देवरिया के संत विनोबा पीजी कॉलेज में राजनीति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष हैं. वे पहली बार विधानसभा के रण में उतरेंगे.

20 साल पहले शुरू किया राजनीतिक सफर

सत्य प्रकाश मणि का राजनीतिक सफर बीस साल पहले शुरू हुआ था. तब वे देवरिया से जिला पंचायत सदस्य चुने गए थे. उन्होंने अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया था. उनके पिता योगेन्द्र मणि त्रिपाठी देवरिया के बैतालपुर के ब्लॉक प्रमुख थे. जिला पंचायत सदस्य रहने के बाद सत्य प्रकाश मणि कॉलेज ज्वाइन कर लिए. 2001 में उन्होंने संत विनोबा पीजी कॉलेज में मानदेय पर पढ़ाना शुरू किया. 2003 में वे परमानेण्ट हो गए. पठन-पाठन का काम चलता रहा लेकिन राजनीतिक काम भी करते रहे.

टिकट पाने की होड़ में थे ये नाम

पिछले बीस सालों से देवरिया में भाजपा का झण्डा उठाये रखे. इस बीच उन्हें पार्टी संगठन में छोटी मोटी जिम्मेदारियां भी मिलती रहीं लेकिन अब पार्टी ने बड़ी जिम्मेदारी दी है. स्थानीय पत्रकार पवन मिश्रा ने बताया कि राजनीतिक रूप से मजबूत कई लोगों को पछाड़कर सत्य प्रकाश मणि ने बाजी मारी है. उनके टिकट मिलने से पहले पांच नाम सबसे ऊपर थे. पहले नंबर पर थे दिवंगत भाजपा विधायक जनमेजय सिंह के बेटे अजय कुमार सिंह उर्फ पिंटू. इनके अलावा पूर्व मंत्री कामेश्वर उपाध्याय के दामाद डॉ. अभय मणि त्रिपाठी भी लाइन में थे. पूर्व पत्रकार, भाजपा नेता और सरकार के मीडिया सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी का नाम भी चर्चा में था. इसके अलावा रवीन्द्र प्रताप मल्ल और डॉ अजय मणि त्रिपाठी भी रेस में थे लेकिन, टिकट पाने में सत्य प्रकाश मणि ने बाजी मारी.
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