Diwali 2020: चित्रकूट में बनते हैं गाय के गोबर के दीपक, जानें इसकी खासियत

चित्रकूट में परंपरागत रूप से मिट्टी के दीए बनते थे.
चित्रकूट में परंपरागत रूप से मिट्टी के दीए बनते थे.

चित्रकूट (Chitrakoot) में परंपरागत रूप से मिट्टी के दीए बनते थे जो दीपदान के दौरान तुरंत ही पानी में डूब जाते थे.  अब यहां महिलाओं को गोबर के दीए बनाने का प्रशिषण दिया जा रहा है.

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चित्रकूट. वैसे तो पूरे बुंदेलखंड में दीपावली (Diwali 2020) के पर्व पर दीपदान करने की परंपरा है, लेकिन चित्रकूट में तो दीपदान का विशेष ही महत्व है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार लंका विजय के बाद भगवान राम जब अयोध्या वापस लौट रहे थे तो अयोध्या से पहले उन्होंने चित्रकूट में अपना पुष्पक विमान उतारा था और यहां के साधु-संतों ने राम के स्वागत में दीप मालिकाएं सजाई थीं. दीपावली के दिन देश के कोने-कोने से लोग आकर यहां प्रवाह मान मंदाकिनी नदी के तटों पर और कामदगिरि पर्वत पर दीप मालिकाएं सजाते हैं.

चित्रकूट में परंपरागत रूप से मिट्टी के दीए बनते थे जो दीपदान के दौरान तुरंत ही पानी में डूब जाते थे. चित्रकूट में शोभन सरकार बायो फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी ने महोबा हमीरपुर बांदा और चित्रकूट बुंदेलखंड के इन चारों जिलों में राष्ट्रीय आजीविका मिशन द्वारा गठित स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को गाय के गोबर से दीपक बनाने का प्रशिक्षण दे उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की पहल शुरू की थी. चारों जनपदों के स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं ने यहां आकर गाय के गोबर से दीपक और गणेश लक्ष्मी की मूर्तियां बनाने का प्रशिक्षण प्राप्त किया था और अपने अपने जिलों में बड़ी संख्या में गाय के गोबर से दीपक बनाने लगी थी.

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गोबर के दीपक की खासियत
गाय के गोबर से बने दीपक वजन में बेहद हल्के होने की वजह से कई घंटों तक पानी में बहुत आराम से तैरते रहते हैं. पानी में घुलने के बाद दीपक का गोबर जब नदी में जाएगा तो जलीय पौधों के लिए खाद का काम करेगा और इससे जीव-जंतुओं को किसी प्रकार की  समस्या भी नहीं होगी. जिला प्रशासन ने स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा बनाए गए ऐसे दीप को को बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध कराया है. इस बार चित्रकूट में दीपदान के लिए आने वाले श्रद्धालु बड़ी संख्या में इन दीपों का प्रयोग करेंगे. गोबर से बने इन दीप का प्रयोग से जहां पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं होगा वहीं गाय के गोबर से बने उत्पादों के लोकप्रिय होने से लोग अपने जानवरों को सड़कों पर नहीं छोड़ेंगे. गोवंश मुनाफा देने वाले जानवर साबित होने लगेंगे जिससे सरकार के लिए मुसीबत साबित होने वाले अन्ना जानवरों की समस्या भी धीरे धीरे खत्म हो जाएगी.
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