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SAMARTH APP से दिव्यांग बच्चों की मॉनिटरिंग करेगा शिक्षा विभाग, होगा ये फायदा

SAMARTH APP से दिव्यांग बच्चों की मॉनिटरिंग करेगा शिक्षा विभाग, होगा ये फायदा

दिव्यांग बच्चों को मुख्य धारा से जोड़ने की कवायद में जुटा है यूपी का स्कूल शिक्षा विभाग (फाइल फोटो)

दिव्यांग बच्चों को मुख्य धारा से जोड़ने की कवायद में जुटा है यूपी का स्कूल शिक्षा विभाग (फाइल फोटो)

यूपी का स्कूल शिक्षा विभाग अब समर्थ ऐप (Samarth App) के माध्यम से दिव्यांग बच्चों को मुख्य धारा से जोड़ने की कवायद में जुटा है, मकसद है इन बच्चों की शिक्षा को बेहतर करने के साथ दूसरे बच्चों में दिव्यांगों के लिए सम्मान का भाव पैदा करना.

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लखनऊ. शिक्षा विभाग (Education Department) अब समर्थ ऐप से ऑनलाइन दिव्यांग बच्चों (Children with disabilities) की मॉनिटरिंग करेगा. साथ ही विभाग प्राइमरी स्कूलों में पढ़ने वाले और ड्रॉप आउट दिव्यांग बच्चों को स्कूलों में ऐसा माहौल और सुविधाएं मुहैया कराने की कोशिश कर रहा है जिससे उनकी स्कूलों में संख्या बढ़े. राज्य परियोजना निदेशक विजय किरण आनंद ने बताया कि विभाग तकनीक का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल कर दिव्यांग बच्चों को मुख्य धारा से जोड़कर उनकी शिक्षा को बेहतर करने के साथ-साथ दूसरे बच्चों के अंदर भी दिव्यांगों के लिए सम्मान का भाव पैदा कर सके.

दिव्यांग बच्चों का होगा आइडेंटिफिकेशन
अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार के मुताबिक सबसे पहले स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की हेल्थ कंडीशन की स्क्रीनिंग, उनका आइडेंटिफिकेशन (चिन्हीकरण), रिफरल और उपचार के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की बाल स्तरीय टीम का माइक्रोप्लान तैयार किया जाएगा. प्लान तैयार करने में फिजियोथेरेपिस्ट और स्पेशल एजुकेटर्स की मदद ली जाएगी. इसी प्लान के तहत आगे बच्चों को स्वास्थ्य सुविधाएं भी दी जाएंगी. इनकी स्क्रीनिंग में डिस्ट्रिक्ट डिसेबिलिटी रिहैबिलेटेशन सेंटर और कंपोजिट रीजनल सेंटर की भी मदद ली जाएगी.

फरवरी तक होगी बच्चों की चेकलिस्ट तैयार
उन्होंने बताया कि स्कूल के अध्यापक बच्चों की दक्षता, क्रियाशीलता और कार्यकुशलता की जांच चेकलिस्ट फरवरी तक तैयार कर लें. अगर चेकलिस्ट में किसी भी तरह की बाधा आती है तो उसे स्पेशल एजुकेटर्स कि मदद से बच्चे में दिव्यांगता का आइडेंटिफिकेशन भी करना होगा. आइडेंटिफिकेशन चेकलिस्ट समर्थ ऐप पर अपलोड करनी होगी. ऐप के डेटाबेस को आधार बनाकर दिव्यांग बच्चों का प्लान तैयार होगा और उसी आधार पर समावेशी शिक्षा, होम बेस्ड एजुकेशन और थेरेपी सेवाएं दी जाएंगी. बेसिक शिक्षा अधिकारी और खंड शिक्षा अधिकारी को रोजाना ऐप की मॉनिटरिंग करनी होगी. वहीं ड्रॉप आउट या आउट ऑफ स्कूल छात्रों का हाउस होल्ड सर्वेक्षण और शारदा कार्यक्रम के जरिए उनका चिन्हीकरण किया जाएगा. इसके बाद बच्चों को डिस्ट्रिक्ट मेडिकल बोर्ड और डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल, मेडिकल असेसमेंट कैम्प से दिव्यांगता प्रमाणपत्र दिया जाएगा.

पुस्तकें और उपकरण भी मुहैया कराएंगे
दिव्यांग छात्रों को उपकरण देने के लिए शिक्षा विभाग मेजरमेंट और डिस्ट्रिब्यूशन कैम्प लगाएगा, जिसमें छात्रों को मोबिलिटी केन, डेजीप्लेयर, ब्रेल किट, स्मार्ट केन, ट्राईसाइकल, व्हील चेयर, क्रचेस, कैलीपर्स, रोलेटर, सीपी चेयर, मल्टी सेंसरी इंटीग्रेटेड एजुकेशन किट और हियरिंग एड दिए जाएंगे. इसके अलावा छात्रों को पुस्तकें, लर्निंग मटीरियल भी दिए जाएंगे.

NCERT तैयार करेगा पाठ्यक्रम
बच्चों के लिए एससीईआरटी उनकी बौद्धिक क्षमता के अनुसार पाठ्यक्रम तैयार करेगा. बौद्धिक दिव्यांगों के लिए पाठ्यक्रम तैयार किया जा रहा है, वहीं प्राइमरी कक्षाओं के लिए साल 2020-21 और साल 2021-22 तक पाठ्यपुस्तक तैयार करने की योजना है. इसके अलावा बच्चों को समेकित शिक्षा के तहत होने वाली गतिविधियों के लिए इनरोल किया जाएगा, ताकि पढ़ाई के अलावा भी उनका विकास किया जा सके.

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Tags: Disabilities, Lucknow news, School Education Department, Uttar pradesh news

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