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बुलंदशहर हिंसा: वीरता की मिसाल है सुबोध का परिवार, बहन बोलीं- पिता भी हुए थे शहीद

सुनीता सिंह ने कहा कि सुबोध से पहले उनके पिता ने भी ऐसे ही जान गंवाई थी. उनकी भी मौत झांसी में ऐसे ही हुई थी. उन्हें भी गोली लगी थी, जिसके बाद उनका इलाज आगरा में हो रहा था. यहां उन्होंने अंतिम सांस ली.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 4, 2018, 1:18 PM IST
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बुलंदशहर हिंसा में मारे गए इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह के एटा स्थित पैतृक जैथरा गांव में लोगों में भारी आक्रोश है. लोगों ने मामले में साजिश का आरोप लगाने के साथ ही बताया कि सुबोध का परिवार वीरता की मिसाल है. इससे पहले सुबोध के पिता राम प्रताप सिंह की भी ऐसे ही मौत हुई थी. बहन सुनीता सिंह ने कहा कि सुबोध कुमार सिंह कोई मामूली हस्ती नहीं थे. पूरा परिवार वीरता की मिसाल है. यूपी सरकार को शहीद का दर्जा देने के साथ ही गांव में शहीद स्मारक बनाया जाना चाहिए.

सुनीता सिंह ने कहा कि सुबोध से पहले उनके पिता ने भी ऐसे ही जान गंवाई थी. उनकी भी मौत झांसी में ऐसे ही हुई थी. उन्हें भी झांसी में गोली लगी थी, जिसके बाद उनका इलाज आगरा में हो रहा था. यहां उन्होंने अंतिम सांस ली.

इसके अलावा परिजनों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि अभी तक कोई मिलने नहीं आया. मृतक सुबोध कुमार सिंह की बहन सुनीता सिंह ने कहा, " मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हमेशा गौ-गौ-गौ चिल्लाते रहते हैं. खुद आकर गौरक्षा क्यों नहीं करते हैं. शर्म की बात है. अफसोस है मुझे इस बात का. गौ हमारी माता है. लेकिन गौ एक जानवर है उसी के लिए मेरे भाई ने जान दे दी. हमें पैसे नहीं चाहिए. हमारा भाई एक जाबांज अफसर था."



उन्होंने आरोप लगाया कि सुबोध कुमार दादरी के अखलाक हत्याकांड की जांच कर रहे थे. इसी वजह से उनकी हत्या हुई. यह पुलिस की साजिश है. उन्होंने भाई को शहीद का दर्जा दिए जाने की मांग करते हुए कहा कि पैतृक गांव में उनका स्मारक बनाया जाए. उन्होंने कहा कि सरकार का कोई प्रतिनिधि अभी तक घर नही पहुंचा है. मृतक इंस्पेक्टर की बहन ने बताया कि शहीद के पिता राम प्रताप सिंह की भी झांसी में गोली लगने से मौत हुई थी. वो भी शहीद हुए थे.
चाचा राम अवतार सिंह ने कहा कि उनके भतीजे की हत्या एक साजिश है. उन्होंने आशंका जाहिर करते हुए कहा कि सुबोध कुमार अखलाक हत्याकांड के जांच अधिकारी थे. हो सकता है साजिश के तहत हत्या की गई है. उधर बेटे अभिषेक सिंह ने कहा कि मेरे पिता चाहते थे कि मैं एक अच्छा नागरिक बनूं जो धर्म के नाम पर समाज हिंसा न फैलाए. आज मेरे पिता की मौत हिंदू-मुस्लिम विवाद में हो गई.

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