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Etah News: प्रैक्टिस छोड़कर डॉक्टर बहू ने शुरू की खेती, स्ट्रॉबेरी की फसल से हो रही मोटी कमाई

Etah News: प्रैक्टिस छोड़कर डॉक्टर बहू ने शुरू की खेती, स्ट्रॉबेरी की फसल से हो रही मोटी कमाई

पेशे से डॉक्टर एटा बहू दीपाली कर रही हैं खेती

पेशे से डॉक्टर एटा बहू दीपाली कर रही हैं खेती

Etah News: डॉ. दिपाली ने अपने एक हेक्टेयर खेत में स्ट्रॉबेरी की खेती की है जो कि अपने आप में जिले के लिए मिसाल है, क्योंकि इससे पहले जनपद एटा में किसी ने भी इस तरह की खेती नहीं की है.

एटा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) द्वारा देश में चलाए जा रहे ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मिशन शक्ति’ अभियान की मिसाल एटा (Etah) में एक डॉक्टर बहू ने पेश की है. पेशे से डॉक्टर होने के बावजूद डॉ. दिपाली (Dr Deepali) ने प्रैक्टिस छोड़कर खेती में हाथ आजमाया है. उन्होंने बंजर भूमि में स्ट्रॉबेरी (Strawberry Farming) की खेती करके दिखा दिया है कि महिलाएं पुरुषों से बिल्कुल भी कम नहीं है. यदि मन में किसी कार्य को करने की इच्छा शक्ति हो तो कोई भी काम असंभव नहीं है. डॉ. दिपाली  ने अपने एक हेक्टेयर खेत में स्ट्रॉबेरी की खेती की है जो कि अपने आप में जिले के लिए मिसाल है. क्योंकि इससे पहले जनपद एटा में किसी ने भी इस तरह की खेती नहीं की है.

डॉ. दीपाली और उनके पति भी दिल्ली में डॉक्टर हैं, लेकिन उसके बावजूद वो अपने ससुर के साथ कंधे से कंधा मिलाकर गांव में स्ट्रॉबेरी की खेती कर रही हैं. डॉ. दीपाली महाराष्ट्र की रहने वाली हैं, जहां उनके  पिता भी स्ट्रॉबेरी की खेती करते हैं. उन्होंने अपने पिता से ही प्रेरणा लेकर मन में ठान लिया कि यदि महाराष्ट्र में इसकी खेती हो सकती है तो उत्तर प्रदेश में भी क्यों नहीं? उनका कहना है कि महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश का मौसम लगभग एक जैसा है, इसलिए यदि महाराष्ट्र में स्ट्रॉबेरी की खेती हो सकती है तो उत्तर प्रदेश में भी हो सकती है. यही बात उन्होंने अपने दिल में बैठा कर उत्तर प्रदेश के जनपद एटा के अपने गांव बावसा में आकर बंजर भूमि में स्ट्रॉबेरी की खेती की शुरुआत की.

पिता और ससुर  का सहयोग
डॉ. दिपाली बताती हैं कि महाराष्ट्र में कल्चर दूसरे तरह का है, जबकि उत्तर प्रदेश में कल्चर दूसरा होने के बावजूद मेरे पति और मेरे ससुर द्वारा  मेरा लगातार सहयोग किया जा रहा है. जिसकी वजह से मुझे खेती करने में कोई समस्या नहीं हो रही है. दिपाली का ये भी कहना है कि उन्होंने एक हेक्टेयर में करीब 9 से 10 लाख की लागत लगाकर खेती शुरू की है. वो अभी तक लगभग पांच लाख  रुपये की स्ट्रॉबेरी बेच चुकी हैं. उनको अभी उम्मीद है कि दो माह से अधिक तक का समय है, जिससे करीब 18 से 20 लाख रुपये की आमदनी होगी.

लॉकडाउन में शुरू की खेती
डॉ. दिपाली का कहना है कि कोरोना के चलते लॉकडाउन में वह गांव आई थीं, तो उनके पिता जो महाराष्ट्र में स्ट्रॉबेरी की खेती करते हैं उनसे प्रेरणा लेकर उन्होंने यूपी में भी स्ट्रॉबेरी की खेती करने का बीड़ा उठाया. इससे पहले उन्होंने कई महीने इस बात पर शोध किया कि इसे कैसे किया जाता है, कहां बेचा जाता है और इसका मार्केट कहां-कहां है? अभी वह दिल्ली, आगरा और कानपुर में स्टॉबेरी बेचने के लिए भेजती हैं.

ससुर ने कही ये बात
डॉ. दिपाली के ससुर कॉलेज में प्रिंसिपल के पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं. वह भी अपनी पुत्रवधू को अपनी बेटी मान कर उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खेती में सहयोग कर रहे हैं. आगरा मंडल के एटा जिला में जहां महिलाओं को घर से बाहर निकल कर काम करने की आजादी नहीं है, वहां वह अपनी पुत्रवधू के साथ हर जगह सहयोग कर रहे हैं. उनका कहना है कि मेरी पुत्रवधू डॉक्टर है और मेरा बेटा भी डॉक्टर है, लेकिन उसके बावजूद मेरी पुत्रवधू ने मुझसे कहा कि मैं खेती करना चाहती हूं, तो मैंने पहले मैंने उसे मना किया, लेकिन उसने कहा कि नहीं पापा जी मैं स्ट्रॉबेरी की खेती करनी चाहती हूं. फिर तो मैंने उसका सहयोग किया.

सरकार से मदद की अपील
दिपाली कहती हैं कि अभी तक उनको जिला प्रशासन द्वारा इस खेती को करने के लिए कोई मदद नहीं मिली है. महाराष्ट्र में इस तरह की खेती करने के लिए क्रॉप लोन सहित अन्य कई अनुदान भी मिलते हैं, लेकिन जिला प्रशासन की अनदेखी के चलते अभी तक उन्हें कोई भी सरकारी लाभ नहीं मिला है. यदि उनको सरकारी आर्थिक सहायता मिल जाए तो इस खेती को और आगे भी बढ़ा सकती हैं.

Tags: Etah news, Up news in hindi

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