पंचतत्व में विलीन हुआ जम्मू में शहीद एटा का लाल

परिजनों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश देखने को मिला की कोई भी मंत्री या सरकारी अफसर उनकी सुध लेने नहीं पहुंचा.

News18 Uttar Pradesh
Updated: June 14, 2018, 3:19 PM IST
पंचतत्व में विलीन हुआ जम्मू में शहीद एटा का लाल
एटा में शहीद रजनीश यादव का हुआ अंतिम संस्कार
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Updated: June 14, 2018, 3:19 PM IST
जम्मू के सांबा सैक्टर के चमलियाल में पाकिस्तान की नापाक गोलीबारी में देश के चार जाबांज शहीद हो गए, जिसमें एटा के वीर सपूत रजनीश यादव भी शामिल हैं. शहीद रजनीश यादव का पार्थिव शरीर गुरुवार सुबह उनके पैतृक गांव जैथरा थाना क्षेत्र के सदियापुर पहुंचा. शहीद का शव पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया. शहीद के परिजनोँ का रो-रोकर  बुरा हाल था.

शहीद के पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शनों के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा. वहीं परिजनों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश देखने को मिला की कोई भी मंत्री या सरकारी अफसर उनकी सुध लेने नहीं पहुंचा. जिसके बाद परिजनों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और गृहमंत्री राजनाथ सिंह के पहुंचने पर शहीद का अंतिम संस्कार करने की बात कही.

परिजनों और ग्रामीणों में शहीद के प्रति स्थानीय प्रशासन खासकर जिलाधिकारी अमित किशोर और एसएसपी अखिलेश चौरसिया के न पहुंचने को लेकर भी भारी आक्रोश देखा गया.

न्यूज18 पर खबर चलने के बाद प्रभारी मंत्री अतुल गर्ग, राज्यसभा सांसद हरनाथ सिंह और सभी विधयक मौके पर पहुंचे और शहीद को श्रद्धांजलि दी. प्रभारी मंत्री ने शहीद की पत्नी अलका यादव को 20 लाख का चेक भी सौंपा. 5 लाख रुपये का चेक शहीद के पिता राजवीर सिंह को दिया गया. जिसके बाद शहीद रजनीश कुमार को राजकीय सम्मान के साथ सलामी दी गई.

प्रभारी मंत्री ने शहीद के परिजनों की पेट्रोल पंप, एक सदस्य को सरकारी नौकरी समेत सभी मांगों को मान ली. जिसके बाद शहीद का अंतिम संस्कार किया गया. शहीद के 3 साल के बेटे दर्श कुमार ने मुखाग्नि दी.

आपको बता दें मंगलवार की रात्रि जम्मू के सांबा सेक्टर के चमलियाल में पाक फायरिंग में पेट्रोलिंग के दौरान गोली लगने से रजनीश कुमार शहीद हो गए थे. रजनीश परिवार में दो भाई और दो बहनों में सबसे बड़े थे. रजनीश यादव के अंदर बचपन से ही देश सेवा का जज्बा कूट कूटकर भरा था.

पिता राजवीर यादव ने अपने होनहार बेटे की शादी 2012 में अलका यादव से करवा दी थी. 2013 में रजनेश बीएसएफ में एएसआई के पद पर भर्ती हो गए थे. शहीद रजनेश अपने पीछे मां बाप दो भाई, बहन, पत्नी व 3 वर्ष का बेटा छोड़ गए हैं.

गौरतलब है कि दो महीने बाद ही शहीद के घर में बहन की शादी होने वाली थी. रजनीश अवकाश लेकर घर आने वाले थे, लेकिन इससे पहले ही वे शहीद हो गए.
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