इटावा: ड्यूटी करने में अक्षम पाये जाने पर 5 पुलिसवालों को जबरन किया रिटायर

स्क्रीनिंग कमेटी ने इन 5 पुलिसवालों को ड्यूटी करने में अक्षम पाया
स्क्रीनिंग कमेटी ने इन 5 पुलिसवालों को ड्यूटी करने में अक्षम पाया

इटावा के SSP आकाश तोमर ने बताया कि ड्यूटी करने में अक्षम पाए जाने के कारण इन पांच पुलिसकर्मियों (Police) को जबरन रिटायर (Retire) किया गया.

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इटावा. उत्तर प्रदेश के इटावा में स्क्रीनिंग के बाद पुलिस के 5 जवानों (Police Jawan) को सेवा से मुक्त (Retire) कर दिया गया है. इन पुलिसकर्मियों को शारीरिक तौर पर कमजोर पाया गया, जिसके बाद स्क्रीनिंग कमेटी की रिर्पोट के आधार पर इन्हें सेवामुक्ति दे दी गई. जिले में इस तरह की पहली कार्रवाई है, जिसमें 5 पुलिसवालों को एक साथ रिटायर्ड कर दिया गया.

इटावा के एसएसपी आकाश तोमर ने बताया कि ड्यूटी करने में अक्षम पाए जाने के कारण इन पांच पुलिसकर्मियों को रिटायर किया गया. शासन के आदेश पर सीओ सिटी राजीव प्रताप सिंह की निगरानी में बनाई गई कमेटी ने स्क्रीनिंग में इन पांच पुलिसकर्मियों को ड्यूटी करने में शारीरिक रूप से अक्षम पाया. रिपोर्ट के आधार पर एसएसपी ने इन्हें सेवामुक्त कर दिया.

सीएम के आदेश पर कार्रवाई 
इन पुलिसकर्मियों में दो मुख्य आरक्षी नागरिक पुलिस, दो मुख्य आरक्षी चालक और एक मुख्य आरक्षी स्थानीय अभिसूचना इकाई शामिल हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर उत्तर प्रदेश के सरकारी विभागों में भ्रष्ट और अक्षम कर्मचारियों को चिह्नित कर उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दिये जाने का काम किया जा रहा है. भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे या अक्षम पाये गए पुलिस के 50 वर्ष से अधिक उम्र जवान या अधिकारी की स्क्रीनिंग कर जबरन रिटायर कराने के आदेश सीएम ने पिछले दिनों दिये.
सिपाही से लेकर इंस्पेक्टर स्तर तक की स्क्रीनिंग


इस बाबत पुलिस महानिदेशक की ओर सभी जिलों के एसपी को दिशा निर्देश भेजा गया, जिसमें 31 मार्च 2020 को 50 वर्ष की उम्र पूरी करने वाले पुलिसकर्मियों की स्क्रीनिंग करने के लिए कहा गया था. सिपाही से लेकर इंस्पेक्टर स्तर तक की स्क्रीनिंग की गई. जिसमें इटावा में 5 जवानों को अक्षम पाया गया और उन्हें जबरन रिटायर्ड किया गया.

बता दें कि गृह विभाग की एक समीक्षा बैठक में सीएम ने भ्रष्ट और अक्षम पुलिसकर्मियों पर नाराजगी जतायी थी. तब उन्होंने कहा था कि प्रदेश को ऐसे पुलिसकर्मियों की जरूरत नहीं है, जो अपनी नौकरी और व्यवस्था के प्रति ईमानदार नहीं हैं. इस सिलसिले में पिछले वर्ष भी सभी जोनल पुलिस प्रमुखों को पत्र भेजा गया था.
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