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इटावा : वन डिस्ट्रिक वन प्रोजेक्ट के तहत सीएम योगी आदित्यनाथ करवा सकते हैं मिनी सूत मिल की स्थापना

बीजेपी एमएलए सरिता भदौरिया ने सीएम योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजा था, जिसके संदर्भ में हथकरधा विभाग से रिर्पोट मांगी गई है. (File Photo)
बीजेपी एमएलए सरिता भदौरिया ने सीएम योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजा था, जिसके संदर्भ में हथकरधा विभाग से रिर्पोट मांगी गई है. (File Photo)

इटावा में मिनी सूत मिल की स्थापना की मांग मुख्यमंत्री से की गई थी. सीएम की ओर से सकारात्मक रुझान मिलने से ऐसा माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इटावा में मिनी सूत मिल की स्थापना हो सकती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 24, 2020, 6:25 PM IST
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इटावा. मिनी सूत मिल के लिए मुख्यमंत्री की ओर से सकारात्मक रुझान मिले हैं. वन डिस्ट्रिक वन प्रोजेक्ट योजना (ODOP) में वस्त्र उद्योग को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के इटावा (Etawah) जिले में मिनी सूत मिल की स्थापना की मांग मुख्यमंत्री से की गई थी. सीएम की ओर से सकारात्मक रुझान मिलने से लोगों में आशा की किरण जग गई है. ऐसा माना जा रहा है कि अगर सब कुछ सही रहा तो आने वाले दिनों में इटावा में मिनी सूत मिल की स्थापना हो सकती है. आपको बता दें कि इटावा सदर से भारतीय जनता पार्टी की एमएलए सरिता भदौरिया ने इस बाबत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भी भेजा है, जिसके संदर्भ में हथकरधा विभाग से रिर्पोट मांगी गई है.

भाजपा सदर विधायक सरिता भदौरिया ने न्यूज 18 से कहा कि ओडीओपी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) की प्राथमिकताओं में है. उत्पाद के लिए उद्योग की परिकल्पना का उद्देश्य यही है कि उसकी पहचान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो. इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे. उद्यम से जुड़े कारोबारियों की आर्थिक सेहत भी सुधरेगी. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस बारे में प्रमुख सचिव हथकरघा और वस्त्र उद्योग से रिपोर्ट मांगी है. मिनी सूत मिल की स्थापना उद्योग के लिए संजीवनी होगी. साथ ही मृतपाय होते जा रहे हथकरघा उद्योग को उड़ान भरने का अवसर मिलेगा.

2500 करघा संचालित हैं



इटावा जिले में हथकरघा वस्त्र का काम आजादी के समय से भी पहले से होता चला आ रहा है. यहां वस्त्र उत्पाद की छोटी बड़ी कुल मिलाकर 222 व्यक्तिगत और सहकारी समितियां हैं. 2500 करघा संचालित हैं. समितियों में प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष लगभग 8000 व्यक्तियों को रोजगार प्राप्त हो रहा है. वस्त्र उत्पाद (हैंडलूम और पावरलूम) को जनपद का विशिष्ट उत्पाद माना जाता है. राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वस्त्र उत्पाद के कारण इटावा की विशिष्ट पहचान रही है. इसी कारण से राज्य सरकार ने वस्त्र उत्पाद को ओडीओपी योजना में चयनित किया है.
तीन दशक से बंद है सूत मिल

इटावा में पहले कभी सूत मिल हुआ करती थी. तब यहां के बुनकरों को सस्ती दरों पर सूत मिल जाता था. करीब तीन दशक से सूत मिल बंद पड़ी है. अब बुनकरों को सूत मंगवाने के लिए राजस्थान, दिल्ली और साउथ के राज्यों सहित दूसरे प्रांतों पर निर्भर रहना पड़ता है. बाहर से सूत मंगाना महंगा पड़ता है. इसलिए प्रतिस्पर्धा में यहां बना वस्त्र उत्पाद अपेक्षाकृत महंगा हो जाता है. यदि मिनी सूत मिल यहीं स्थापित हो जाए तो इससे सूत सस्ता मिलने लगेगा. वस्त्र उत्पादों की डिमांड बाजार में बढ़ने लगेगी. जिससे सीधा लाभ यहां के बुनकरों को मिलने लगेगा.

102 करोड़ में बेचने की दे दी इजाजत

अखिलेश सरकार के समय से (1999 से) बंद चल रही इटावा की सूत मिल की जमीन आवासीय कॉलोनी बनाने के लिए दे दी गई. इस जमीन की बिक्री के वक्त इस बात का कोई ध्यान नही रखा गया कि यहां के बुनकरों को क्या होगा? साल 2014 में अखिलेश सरकार ने इटावा सूत मिल की जमीन को एक सौ दो करोड़ में आवास विकास परिषद को बेचने की हरीझंडी दे दी. सूत मिल के बेचे जाने के बाद ही इटावा की पहली और एकमात्र औधौगिक ईकाई हमेशा के लिए बंद हो गई.

1967 में स्थापित की गई थी मिल

मुख्यमंत्री चंद्रभान गुप्त ने 1967 में इटावा में सूत मिल स्थापित कराई थी. यह मिल 265 बीघा जमीन में बनी थी. इटावा-मैनपुरी मार्ग पर यूपी कोऑपरेटिव स्पिनिंग मिल के नाम से बनी सूत मिल बंद होने से सैकड़ों परिवार बदहाल हैं. बुनकर अफरोज बताते हैं कि पहले इटावा की सूत मिल से ही सूत मिल जाता था जो बहुत ही सस्ता हुआ करता था. लेकिन आज इतना मंहगा पड़ता है कि मुनाफा गायब हो जाता है. इटावा बीबर्स स्टोर के सचिव मोहन वर्मा का कहना है कि इटावा में अगर मिनी सूत मिल का निर्माण होता है, तो यह हर हाल में बुनकरों के लिए मुफीद होगा.
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