सावित्री बाई, छोटेलाल के बाद अब इटावा के बीजेपी सांसद अशोक दोहरे ने खोला मोर्चा

बीजेपी सांसद का आरोप है कि भारत बंद के बाद पूरे देश व यूपी में पुलिस दलितों का जमकर उत्पीड़न कर रही है.

News18 Uttar Pradesh
Updated: April 6, 2018, 3:54 PM IST
सावित्री बाई, छोटेलाल के बाद अब इटावा के बीजेपी सांसद अशोक दोहरे ने खोला मोर्चा
इटावा से बीजेपी सांसद अशोक दोहरे
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Updated: April 6, 2018, 3:54 PM IST
बीजेपी के अंदर ही दलित नेताओं ने अपना विरोध का सुर बुलंद करना शुरू कर दिया है. पिछले दिनों बहराइच की सांसद सावि​त्री बाई फुले ने एससी, एसटी एक्ट को लेकर अपनी ही सरकार को घेरा. इसके बाद बीजेपी के रॉबर्ट्सगंज से सांसद छोटेलाल का नाम भी इस लिस्ट में जुड़ गया. इसी क्रम में नया नाम इटावा के बीजेपी सांसद अशोक दोहरे का भी है, जो दलित उत्पीड़न से आहत हैं. अशोक दोहरे ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और अपना शिकायती पत्र सौंपा.

बीजेपी सांसद का आरोप है कि भारत बंद के बाद पूरे देश व यूपी में पुलिस दलितों का जमकर उत्पीड़न कर रही है. उन्होंने कहा कि झूठे मामलों में दलितों को फंसाया जा रहा है. पत्र में बीजेपी सांसद ने लिखा है कि, 'अनुसूचित जाति व जनजाति के लोगों पर पूरे भारत वर्ष, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में सरकार और स्थानीय पुलिस द्वारा इन वर्गों के लोगों पर अत्याचार किया जा रहा है और झूठे मुकदमों में फंसाया जा रहा है. पुलिस निर्दोष लोगों को घरों से निकाल कर जतिसूचक शब्दों द्वारा मारपीट व अपमानित करके उन्हें गिरफ्तार कर रही है. जिसकी वजह से इन वर्गों में रोष व असुरक्षा की भावना बढती जा रही है.'



कौन हैं अशोक दोहरे?

इटावा के बीजेपी सांसद अशोक दोहरे औरैया जनपद के ग्राम रमपुरा के रहने वाले हैं. विगत वर्ष 2000 तक यह अजीतमल ब्लॉक में ग्राम पंचायत अधिकारी के पद पर तैनात रहे. बीएसपी सुप्रीमो मायावती से प्रभावित होकर वर्ष 2000 में सरकारी नौकरी से इस्तीफा देकर बीएसपी में शामिल हो गए.

2002 में बीएसपी की टिकट पर औरैया की अजीतमल विधानसभा से चुनाव लड़े और हार गए. फिर 2007 में इसी विधानसभा से चुनाव लड़े और जीते. मायावती ने इन्हें कैबिनेट मंत्री भी बनाया. बीएसपी सरकार में कुछ मंत्रियों से मनमुटाव हुआ ओर 5 अक्टूबर 2013 में बीजेपी में शामिल हो गए. 2014 के लोकसभा चुनाव में अशोक दोहरे इटावा सीट से बीजेपी के सांसद चुने गए. दोहरे जब से सांसद बने हैं, इटावा की जनता को इनके दर्शन तक नहीं हुए. इटावा की जनता के लिए यह लापता सांसद के रूप में अब अपनी पहचान रखते हैं.

सावित्री बाई और छोटेलाल भी उठा चुके हैं दलित उत्पीड़न का मुद्दा

इससे पहले बीजेपी के रॉबर्ट्सगंज सांसद छोटेलाल ने प्रधानमंत्री को जो पत्र लिखा है, उसमें लिखा है कि सपा सरकार के दौरान जब गुंडा राज चल रहा था, तब उन्होंने अपने भाई और आदिवासी दलित नेता जवाहर खरवार को चंदौली में नौगड़ ब्लॉक का प्रमुख पद जिताया. बीजेपी की यह अकेली जीत थी. लेकिन आज अपनी ही सरकार में उनके भाई को ब्लॉक प्रमुख पद से हटाने की साजिश हो रही है. इसमें बीजेपी के ही नेताओं के सहयोग से बसपा ने अविश्वास प्रस्ताव लाया है. उन्होंने कहा कि ये मसला दो महीने पूर्व का है.

9 मार्च को चुनाव हुआ और भूमाफिया, गुंडे की पत्नी को ब्लॉक प्रमुख के पद पर बिठा दिया गया. सांसद ने आरोप लगाया कि दोष सिर्फ इतना था कि उन्होंने सामन्य सीट पर दलित को प्रमुख बनाया. इस संबंध में वह बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ महेंद्र नाथ पांडेय से भी मिले, जो चंदौली से सांसद हैं. दो बार संगठन महामंत्री सुनील बंसल से भी मिले. यही नहीं वह क्षेत्रीय अध्यक्ष से लेकर जिला अध्यक्ष तक से गुहार लगाई. प्रभारी मंत्री से मिले, लेकिन किसी ने कोई मदद नहीं की.

वहीं 1 अप्रैल को बहराइच सांसद सावित्री बाई फुले ने लखनऊ में एक विशाल रैली कर अपने तेवर साफ कर दिए. उन्होंने कहा अगर आरक्षण से छेड़छाड़ हुई तो वह बर्दाश्त नहीं करेंगी. उन्होंने कहा था कि अगर आरक्षण ख़त्म हुआ तो कोई दलित विधायक और सांसद नहीं बन सकेगा.

(इनपुट: संदीप मिश्रा)
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