पंचायत चुनाव के बहाने परिवार को एकजुट करने में जुटे शिवपाल सिंह यादव

पंचायत चुनावों के मद्देनजर शिवपाल सिंह यादव पारिवारिक एकजुटता की बात कह रहे हैं मगर अखिलेश इसके इच्छुक नहीं दिखते (फाइल फोटो)

पंचायत चुनावों के मद्देनजर शिवपाल सिंह यादव पारिवारिक एकजुटता की बात कह रहे हैं मगर अखिलेश इसके इच्छुक नहीं दिखते (फाइल फोटो)

शिवपाल सिंह यादव (Shivpal Singh Yadav) के परिवारिक एकता के वकालत के क्रम में प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) की ओर जारी उम्मीदवारों की लिस्ट में भतीजे अभिषेक यादव को सैफई 2 से जिला पंचायत सदस्य का टिकट दिया गया है. जबकि इससे पहले, समाजवादी पार्टी की ओर से जारी की गई सूची में भी अभिषेक यादव का नाम सैफई 2 से जिला पंचायत सदस्य उम्मीदवार के तौर पर है

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इटावा. लंबे वक्त से परिवारिक एकता की वकालत कर रहे प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव (Shivpal Singh Yadav) ने पंचायत चुनाव (UP Panchayat Election) के बहाने एक बार फिर परिवारिक एकता की वकालत की है. इसके इतर शिवपाल के रिश्ते अभी भी उनके भतीजे समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) से ठीक नहीं हैं, इसको लेकर तरह-तरह की चर्चाएं आम है. परिवारिक एकता के वकालत के क्रम में प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) की ओर जारी उम्मीदवारों की लिस्ट में भतीजे अभिषेक यादव को सैफई 2 से जिला पंचायत सदस्य का टिकट दिया गया है. जबकि इससे पहले, समाजवादी पार्टी की ओर से जारी की गई सूची में भी अभिषेक यादव का नाम सैफई 2 से जिला पंचायत सदस्य उम्मीदवार के तौर पर है.

ऐसे में बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि जब शिवपाल सिंह यादव ने अपना अलग दल खड़ा कर लिया है तो फिर वो अपने भतीजे की ओर क्यों रूख कर रहे हैं, वो भी तब जब वो समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के पक्ष में खड़े हैं. असल मे शिवपाल अपने भतीजे अभिषेक यादव को जिला पंचायत अध्यक्ष निर्वाचित कर के पारिवार की सहानूभूति बटोरना चाहते हैं. इसीलिए वो अभिषेक के पक्ष में आ खड़े हुए हैं.

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जिला पंचायत चुनाव में सपा और प्रसपा एक हो जाये
अपने निर्वाचन क्षेत्र जसवंतनगर में अपनी पार्टी की जिला पंचायत सदस्य उम्मीदवार सीमा यादव के समर्थन में एक सभा को संबोधित करते हुए शिवपाल यह कह चुके हैं कि वो ऐसा चाहते हैं कि जिला पंचायत चुनाव में सपा और प्रसपा एक हो जाये. शिवपाल ने अपने भतीजे निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष अभिषेक यादव को फिर से जिला पंचायत अध्यक्ष बनवाने की अपील की, इसी चुनाव से परिवार के एका की शुरुआत हो. प्रसपा प्रमुख ने समाजवादी पार्टी और परिवार में फिर से एक होने की पहल करते हुए अपने भतीजे निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष अभिषेक यादव को फिर से जिला पंचायत अध्यक्ष बनाने की अपील की. उनका कहना है कि उनकी मंशा जिला पंचायत चुनाव मिलकर सपा-पीएसपी एक साथ लड़ें. वो यह नहीं चाहते है कि विरोधी पार्टी का कोई जिला पंचायत अध्य्क्ष बने.

इटावा समाजवादी पार्टी का गढ़ माना जाता है. जब से समाजवादी पार्टी से अलग होकर शिवपाल यादव ने अपनी पार्टी प्रसपा बनाई है वो लगातार एक होने का प्रयास करते हुए दिख रहे हैं. शिवपाल ने इस दफा पारिवारिक एकता के लिए अपने भतीजे अभिषेक यादव को इसका माध्यम बनाया है. उन्होंने एक बार फिर से अभिषेक को जिला पंचायत अध्यक्ष बनाने की ठानी है ताकि पारिवार के सदस्य बड़े स्तर पर उनके पक्ष में खड़े हो सकें.

पंचायत चुनाव के बहाने सही सभी परिवारिक सदस्य एकजुट हो जायें



शिवपाल सिंह यादव कई दफा भतीजे अभिषेक यादव को जिला पंचायत अध्यक्ष बनाने की चर्चा अपनी लोगों से कर चुके हैं. प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) की ओर से जारी उम्मीदवारों की लिस्ट में भतीजे अभिषेक यादव को सैफई 2 से टिकट दिया गया है. जबकि इससे पहले, समाजवादी पार्टी की लिस्ट में अभिषेक यादव का नाम सैफई 2 से जिला पंचायत सदस्य उम्मीदवार के तौर पर है. शिवपाल यह भी कहने से नहीं चूके कि वो चाहते हैं कि जिला पंचायत चुनाव के बहाने ही सही सभी परिवारिक सदस्य एकजुट हो जायें, यह बहुत अच्छा रहेगा. लेकिन अगर किसी कारण भी सभी एकजुट नहीं हो सकेंगे तो उनका रास्ता अलग और सपा का रास्ता अलग होगा. इसी के साथ इटावा में ऐसा कहा जा रहा है कि शिवपाल ओर अभिषेक दोनों मिलकर पंचायत चुनाव लड़ रहे हैं जो कहीं ना कहीं फायदे का जरूर होगा.

असल में वर्ष 2019 के संसदीय चुनाव से पूर्व शिवपाल सिंह यादव ने सपा से अलग हुए बिना ही अपने दल प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) का सृजन कर लिया था, और फिरोजाबाद संसदीय सीट पर समाजवादी पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार रामगोपाल यादव के बेटे अक्षय यादव के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरने का फैसला कर के हर किसी को हैरत में डाल दिया. चुनाव प्रचार के दरम्यान शिवपाल पूरे संसदीय इलाके में अपने बेटे आदित्य यादव और पत्नी सरला के साथ वोट मांगते रहे जबकि सपा-बसपा गठबंधन के सयुक्त प्रत्याशी अक्षय के लिए मुलायम सिंह यादव के अलावा अखिलेश यादव वोट मांगने गये लेकिन कांटे की टक्कर में शिवपाल सिंह की जमानत नहीं बच सकी. जबकि करीब सवा तीन लाख वोट पाने के बावजूद भी अक्षय बीजेपी के उम्मीदवार के मुकाबले चुनाव हार गये थे.

शिवपाल के प्रस्ताव पर अभी तक अंतिम मुहर भी नहीं लग सकी

जिसके बाद शिवपाल के खिलाफ पार्टी की ओर से विधानसभा सदस्यता रद्द करने की प्रकिया शुरू की लेकिन पारिवारिक दबाव में यह याचिका वापस ले गई जिसके बाद भी यह बात चल निकली कि अगला विधानसभा चुनाव सपा-प्रसपा एकजुट होकर लड़ सकते हैं. लेकिन बात आगे नहीं बढ़ पाती है.

शिवपाल सिंह यादव सपा से गठबंधन कर के चुनाव लड़ने को लालायित दिखाई दे रहे हैं. लेकिन उनके प्रस्ताव पर अभी तक कोई अंतिम मुहर भी नहीं लग सकी है.

होली पर ऐसी उम्मीद थी कि शिवपाल और अखिलेश एक साथ होली मंच पर होंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ.  शिवपाल ने होली की महफिल अपने पिता सुधर सिंह के नाम से बने स्कूल में लगाई. उनकी इस दूरी को लेकर अखिलेश यादव से सवाल पूछा गया तो उन्होंने सीधा और सपाट जबाब दिया कि आज कहीं और होली खेल रहे होंगे, उससे आगे कहीं और होली खेलने का इरादा होगा. अखिलेश की इस बात में दम इसलिए नजर आता है कि शिवपाल सिंह यादव अपने समर्थकों के बीच एक सभा में साफ-साफ कह चुके हैं कि वर्ष 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी हर हाल में सरकार में होगी, भले ही कोई भी सरकार गठित हो.
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