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इटावा: जमीन विवाद में दंबगों की पिटाई से मरणासन्न दो महिलाओं के साथ परिजनों ने SSP आवास पर किया प्रदर्शन

एसएसपी आवास पर पीड़ित महिलाओं के साथ प्रदर्शन करते परिजन
एसएसपी आवास पर पीड़ित महिलाओं के साथ प्रदर्शन करते परिजन

पीड़ितों का आरोप है कि इस मामले में स्थानीय थाना भी आरोपियों (Accused) की ही मदद कर रहा है. जबकि दूसरे पक्ष के लोगों ने उनकी जमीन पर कब्जा कर लिया है.

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इटावा. उत्तर प्रदेश के इटावा (Etawah) में दंबगों की पिटाई से मरणासन्न दो महिलाओं को एसएसपी आवास के बाहर लिटाकर लोगो ने प्रदर्शन (Protest) किया. गत 8 दिसंबर को दबंगों ने वारदात को अंजाम दिया. लेकिन 5 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की. इससे नाराज परिवारवाले रविवार को दोनों महिलाओं के साथ एसएसपी आवास पहुंचे और प्रदर्शन किया. एसएसपी आवास के सामने लोगों की भीड़ जुटने पर एक पल के पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया.

जानकारी के मुताबिक भर्थना इलाके के रामायन गांव में पट्टे की जमीन को लेकर दो परिवारों में लंबे समय से विवाद चल रहा है. इसको लेकर दोनों पक्षों में झगड़े भी हो चुके हैं. गत 8 दिसंबर को एक बार फिर झगड़ा हुआ. इस दौरान दूसरे पक्ष के लोगों ने विजय रैदास की पत्नी पूजा और राहुल रैदास की पत्नी गीता की पिटाई कर दी. पिटाई से दोनों के प्राइवेट पार्ट से ब्लीडिंग होने लगी.

पीड़ितों का आरोप है कि इस मामले में स्थानीय थाना भी आरोपियों की ही मदद कर रहा है. जबकि दूसरे पक्ष के लोगों ने उनकी जमीन पर कब्जा भी कर लिया है. पीड़ितों के मुताबिक उसका परिवार पट्टे की इस जमीन पर करीब 20 साल से खेती कर रहा है.



एसपी ग्रामीण ओमवीर सिंह ने बताया कि पीड़ितों की शिकायत पर पुलिस अधिकारी को जांच के लिए मौके पर भेजा गया है. पीड़ित महिलाओं को इलाज के अस्पताल भेज दिया गया है. पूरा मसला जमीन विवाद से जुड़ा हुआ है.
पुलिस उपाधीक्षक चंद्रपाल सिंह ने बताया कि पीड़ित परिवार की ओर से इस सिलसिले में स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज नहीं कराई गई. शिकायत दर्ज होने पर पुलिस जरूर कार्रवाई करती. अब एसएसपी आवास पर प्रदर्शन के बाद इसकी शिकायत पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है. मामले की छानबीन की जा रही है.

पुलिस उपाधीक्षक के मुताबिक जिस जमीन को लेकर विवाद है, वो जमीन पीड़ित परिवार की है ही नहीं. लेकिन ये लोग उसमें गेंहू लगा चुके हैं. इसलिए जमीन के मूल मालिक के अलावा ग्रामीणों ने भी इन्हें फसल काटने की छूट दे दी है. फिर कब्जा छोड़ने को कहा है.
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