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अन्नदाता अन्न की तलाश में कर रहे पलायन, प्रशासन खामोश

लगातार कुदरत से मिल रही उपेक्षा के बाद किसानों का बुरा हाल है। गत वर्षों पर अगर गौर करें तो बुन्देलखंड का किसान कभी बाढ़, कभी सूखे की मार झेल रहा है जिससे उनके सामने अपनी जीविका चलाने का भीषण संकट आ खड़ा हुआ है।
लगातार कुदरत से मिल रही उपेक्षा के बाद किसानों का बुरा हाल है। गत वर्षों पर अगर गौर करें तो बुन्देलखंड का किसान कभी बाढ़, कभी सूखे की मार झेल रहा है जिससे उनके सामने अपनी जीविका चलाने का भीषण संकट आ खड़ा हुआ है।

लगातार कुदरत से मिल रही उपेक्षा के बाद किसानों का बुरा हाल है। गत वर्षों पर अगर गौर करें तो बुन्देलखंड का किसान कभी बाढ़, कभी सूखे की मार झेल रहा है जिससे उनके सामने अपनी जीविका चलाने का भीषण संकट आ खड़ा हुआ है।

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लगातार कुदरत से मिल रही उपेक्षा के बाद किसानों का बुरा हाल है। गत वर्षों पर अगर गौर करें तो बुन्देलखंड का किसान कभी बाढ़, कभी सूखे की मार झेल रहा है जिससे उनके सामने अपनी जीविका चलाने का भीषण संकट आ खड़ा हुआ है।

उस पर भी सरकारी महकमे की कार्य प्रणाली ने किसानो को पलायन के लिए मजबूर कर दिया है। आलम ये है की जनपद जालौन में एक गाँव बूढा हो गया यानी गांव के युवा रोजगार की तलाश में गांव छोड़ कर यहाँ से पलायन कर गए और गांव में रह गए बुजुर्ग लोग।

गांव में नही है कोई युवा



यूँ तो बुंदेलखंड अति पिछड़ा क्षेत्र है लेकिन यहां के जालौन जनपद में कई ऐसे गाँव है जो विकास की बाट जोह रहे हैं। वहीं जालौन में एक ऐसा भी गाँव है जहां कोई युवा नहीं है जिसका कारण लगातार हो रही फसल की बर्बादी है। जालौन का बघावली गांव ऐसा है जहां के युवा रोजगार की आस में पलायन शुरू का चुके है जिससे गांव में चारों ओर सिर्फ बुजुर्ग ही दिखाई देते हैं। गांव में ढूंढने से भी युवा नहीं मिल रहे हैं, पिछले दिनों बेमौसम बारिश से खड़ी फसल बर्बाद हो गई , आलम ये रहा की यहाँ के किसान ने आत्मह्त्या करनी शुरू कर दी।
रोजगार की गारंटी लेकिन नहीं मिलता काम

बघावली गांव की हकीकत जाने तो यह गांव ऐसा है जहां रोजगार गारन्टी के तहत मनरेगा का कार्य तो शुरू हुआ लेकिन गांव के ग्रामीणों को मनरेगा में काम नहीं मिला।

लगभग 1000 की आबादी वाले इस गांव में 100 लोगों के पास जॉब कार्ड हैं लेकिन पिछले 5 सालों से उन्होंने कभी मनरेगा में कार्य नहीं मिला। सरकारी उपेक्षा के शिकार इस गाँव के ग्रामीण लक्ष्मण, बाला प्रसाद, फूल सिंह, रूप सिंह, नन्हे सिंह, जगदीश, गयाप्रसाद सहित कई ग्रामीण गांव से पलायन कर गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली, हरियाणा में मजदूर कर रहे हैं।

कई घर तो ऐसे है जिनमे पूरी तरह ताले लटके हुए हैं। गांव के बुजुर्गों का कहना है की इतनी बड़ी त्रासदी के बाद जिलाप्रसाशन का कोई अधिकारी हम लोगों की शुध लेने नहीं आया।

वहीं पलायन को लेकर जिलाधिकारी राम गणेश का कहना है की पलायन जैसी घटनाओ पर प्रशासन नजर बनाये हुए है और मनरेगा के तहत ग्रामीणों को काम देकर पलायन रोका जाएगा।

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