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कृषि बिल को लेकर इटावा में सड़क पर उतरे किसान, आगरा- लखनऊ एक्सप्रेस वे पर लगाया जाम

कृषि बिल को लेकर इटावा में सड़क पर उतरे किसान
कृषि बिल को लेकर इटावा में सड़क पर उतरे किसान

मुकुट सिंह ने किसानों (Farmer) और जनता से अपील करते हुए कहा कि यह जीवन-मरण की लड़ाई है. अभी नहीं तो कभी नहीं, इन काले कानूनों से गुलामी और भुखमरी के दिन लौटेंगे.

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इटावा. यूपी में किसान बिल (New Agriculture Law) को लेकर किसानों (Farmers) का आंदोलन जारी है. इसी कड़ी में शनिवार को इटावा (Etawah) में आक्रोशित किसान सड़क पर उतर आए और मार्च करते हुए आगरा लखनऊ एक्सप्रेस वे पर जाम लगा दिया. एक्सप्रेस वे पर जाम की सूचना मिलने पर यूपीडा और पुलिसकर्मी पहुंचे और किसानों को समझाकर जाम खुलवाने का प्रयास किया गया. बाद में किसानों की भीड़ सर्विस रोड पर उतर गई. इसके बाद वाहनों का आवागमन शुरू हो सका.

सुबह होते ही ताखा तहसील के किसानों ने आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे चैनल नंबर-124 पर आवागमन ठप करा दिया. एक्प्रेसवे पर वाहनों का निकलना बंद होने से लंबी कतार लग गई और जाम लग गया. किसानों ने कृषि बिल, बिजली के निजीकरण का विरोध करते हुए पहले आगरा से लखनऊ की ओर जाने वाले मार्ग को जाम किया. इसके बाद किसानों ने लखनऊ से आगरा की ओर जाने वाली लेन को भी जाम कर दिया. पुलिस ने किसानों को समझाकर किसी तरह एक्सप्रेस वे से हटाकर यातायात सामान्य कराया.

किसान सभा के अध्यक्ष नाथूराम यादव की अगुवाई में काऔ गांव के पास सैंकड़ों की तादात में आसपास के गांव वाले एक्सप्रेस वे पर उतर पड़े. जिससे आवागमन बाधित हो गया. किसान संघर्ष समिति के देशव्यापी आह्वान पर किसान सभा ने इटावा में एक्सप्रेस वे हाईवे-2, मैनपुरी रोड कुम्हावर रोड आदि सहित कई स्थानों पर जाम लगाकर पुतला दहन, प्रदर्शन व सभा कर तीनों काले कृषि कानूनों-बिजली बिल की वापसी, धान की लूट, पराली एवं दिल्ली बॉर्डर पर किसानों के दमन जैसे मुद्दे उठाते हुए मोदी सरकार को चेतावनी दी. किसानों ने कहा कि काले कृषि कानून रद्द ना किए गये तो भारत बंद में पूरी ताकत से भागीदारी की जायेगी.



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उत्तर प्रदेश किसान सभा के महामंत्री मुकुट सिंह ने काले कृषि कानूनों को खेती किसानी के लिए सर्वनाशी बताते हुए कहा कि मोदी सरकार कारपोरेटस की भलाई के लिए भ्रम फैलाकर किसानों को बांटना चाह रही है. यह आंदोलन पूरे देश का है, इन काले कानूनों से किसान ही नहीं 80 फीसदी उपभोक्ता भी बुरी तरह प्रभावित होंगे. उन्होने दिल्ली बॉर्डर पर किसानों के उत्पीड़न की कड़ी निंदा की. मुकुट सिंह ने किसानों और जनता से अपील करते हुए कहा कि यह जीवन-मरण की लड़ाई है. अभी नहीं तो कभी नहीं, इन काले कानूनों से गुलामी और भुखमरी के दिन लौटेंगे. हम एकजुट होकर किसान आंदोलन का साथ देना होगा.

(रिपोर्ट- दिनेश शाक्य)
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