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UP News: इटावा की नेशनल चंबल सेंचुरी के जंगलों में लगी भीषण आग, ग्रामीणों ने दिखाया दम

इटावा में राष्ट्रीय चंबल सेंचुरी में आग लगने से हड़कंप मच गया है
इटावा में राष्ट्रीय चंबल सेंचुरी में आग लगने से हड़कंप मच गया है

Fire in Forest: चकरनगर के बंशरी राउनी के समीप राष्ट्रीय चंबल सेंचुरी (National Chambal Sanctuary) जंगल में भीषण आग लग गई. फायर ब्रिगेड मौके तक न पहुंच पाने के कारण आग बुझाने में नाकामयाब रही. इसके बाद ग्रामीणों ने जिम्मा संभाला. अग्निकांड के पीछे लकड़ी माफिया पर शक.

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इटावा. उत्तर प्रदेश के इटावा (Etawah) जिले में राष्ट्रीय चंबल सेंचुरी (National Chambal Sanctuary) के जंगल में हाल ही लगी भीषण आग ने दो हेक्टेयर भूमि पर खड़े सैकड़ों वृक्ष जलाकर राख कर दिए. फायर ब्रिगेड की गाड़ी जंगल में मौके तक नहीं पहुंच पाई, नतीजतन ग्रामीणों ने भारी मशक्कत और कड़ी मेहनत के बाद आग पर काबू पाया. इसके बावजूद जंगल में कई जगह आग धधकती दिख रही है, जिस पर निगरानी रखने के आदेश कर्मचारियों को दिए गए हैं. इस घटना के पीछे जंगल और लकड़ी माफिया भी शक के घेरे में है. चंबल सेंचुरी के वार्डन दिवाकर श्रीवास्तव का दावा है कि करीब आधे एकड़ जंगल में आग से नुकसान पहुंचा है. आग पर काबू पा लिया गया है और नुकसान का आकलन किया जा रहा है.

चकरनगर के बंशरी राउनी के समीप सेंचुरी जंगल में आग की लपटें देख कर दौड़े गांव वालों ने आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन आग काबू से बाहर होते देख सेंचुरी विभाग के कर्मचारियों को सूचित किया, सूचना पर पहुंची फायर ब्रिगेड की गाड़ी के मौके तक न पहुंच पाने के कारण आग बुझाने में नाकामयाब रही. इसके बाद खुद ग्रामीणों ने फिर हिम्मत जुटाई और आग बुझाने में अपना पूरा दम लगा दिया. काफी देर तक कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू तो पा लिया गया, फिर भी वह देर रात कई जगह धधकती देखी गई, कोशिश की जा रही है कि आग और न फैले.





लकड़ी माफिया पर शक


इस घटना से सेंचुरी विभाग की करीब दो हेक्टेयर भूमि में खड़े पेड़ पौधे जलने का अनुमान लगाया जा रहा है. जंगल के आसपास रहने वाले लोग भी डरे हुए और चिंतित हैं. सेंचुरी वार्डन दिवाकर श्रीवास्तव ने विभाग के कर्मचारी लगाकर धधकती आग पर नियंत्रण रखने की हिदायत दी है. सूत्रों की माने तो जंगल कटान के बाद लकड़ी माफिया निशानदेही मिटाने के लिए जंगल में आग लगाकर ठूंठ व बचे अवशेष को नष्ट करते हैं. सेंचुरी क्षेत्र के अंतर्गत जंगल में आग लगने का यह कोई पहला मामला नहीं है, बल्कि हर वर्ष ही इसी तरह जंगल जलता है और विभाग के अधिकारी जांच की बात करते हैं. बाद में नतीजा वही ढाक के तीन पात नजर आता है.
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