सीएम योगी का करप्‍शन के खिलाफ सख्‍ती का दिखा असर, जेल जाने के डर से पौधारोपण घोटाले के आरोपियों ने लौटाई रकम

घोटाले की राशि वापस होने के बाद भी जारी रहेगी जांच.

सीएम योगी आदित्‍यनाथ (CM Yogi Adityanath) का करप्‍शन के खिलाफ सख्‍ती का असर दिख रहा है. इसी वजह से इटावा में पौधारोपण घोटाले के दोषियों ने जेल जाने के डर से साढ़े 12 लाख रुपये की राशि वापस कर दी है.

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इटावा. उत्‍तर प्रदेश के इटावा (Etawah) में सीएम योगी आदित्‍यनाथ (CM Yogi Adityanath) की करप्‍शन को लेकर चल रही लड़ाई का असर सरकारी कर्मियों में दिखने लगा है. करीब साढ़े 12 लाख के पौधारोपण घोटाले (Plantation Scam) में प्रशासनिक कार्यवाही के बाद जेल जाने के डर से आरोपी सरकारी कर्मियों ने पूरी रकम को वापस कर दिया है. योगी सरकार में यह पहला मौका है, जब किसी भी घोटाले के बाद पूरी की पूरी रकम वापस की गई है.

सीडीओ ने दर्ज कराया था मामला
सीडीओ ने जांच के बाद दो सरकारी कर्मियों के खिलाफ ऊसराहार थाने में करप्‍शन एक्ट समेत कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था. भले ही रकम वापस कर दी गई हो, लेकिन विभागीय जांच के अलावा पुलिस जांच जारी रहेगी. इटावा के मुख्य विकास अधिकारी राजा गणपति आर ने यह जानकारी दी. उन्होंने स्पष्ट किया कि भले ही घोटाले की रकम वापस की दी गई है, लेकिन विभागीय और पुलिस जांच में कोई रियायत नहीं होगी. साथ ही बताया कि पंचायत विभाग के लेखाकार धर्मेद्र वर्मा के खिलाफ बर्खास्त करने के अलावा खंड विकास अधिकारी के खिलाफ शासन को रिपोर्ट भेज दी गई है. जबकि कागजों पर वृक्षारोपण कराकर हड़पे गये साढ़े 12 लाख रुपये मुकदमा दर्ज होने के बाद फर्मों ने सरकारी खातों में जमा करा दिये हैं. इस बाबत फर्म द्वारा तर्क दिया गया कि उन्होंने समय से वृक्षारोपण नहीं करा पाया था. बड़ा सवाल यह है कि आखिर शासन को वृक्षारोपण कराने की रिपोर्ट जुलाई महीने में कैसे सत्यापित कराकर भेज दी गयी थी. हालांकि अभी मामले में भरथना क्षेत्राधिकारी स्तर पर जांच की जा रही है.

ये है पूरा मामला
विकास खंड ताखा क्षेत्र की 17 ग्राम पंचायतों में कागजों पर वृक्षारोपण कराकर विकास खंड कर्मचारियों और फर्मों ने मिलकर 12 लाख 44 हजार 832 रुपये का घोटाला कर लिया था. मामले में खंड विकास अधिकारी ताखा पीएन यादव की तहरीर पर एकाउंटेंट धर्मेंद्र कुमार, सहायक लेखाकार मनरेगा शिवशंकर और ग्रीन वर्ड नर्सरी एटा के मालिक प्रेम सिंह प्रियंका ट्रेडर्स के मालिक यादवेन्द्र सिंह सहित पांच लोगों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत 6 नवंबर को मुकदमा दर्ज कराया गया था. मुकदमा दर्ज होने के बाद मामले की विवेचना क्षेत्राधिकारी भरथना चंद्र पाल सिंह द्वारा की जा रही है. वहीं, फर्जीवाड़ा में फर्मों द्वारा मनरेगा के खाते में बिना काम के ही हड़पी गई धनराशि को वापस किया गया है. जबकि 12 नवंबर को मनरेगा के पंजाब नेशनल बैंक की शाखा साबितगंज में वापस भेजा गया जिसके संदर्भ में फर्म द्वारा तर्क दिया गया कि वह समय से काम नहीं करा सके. वहीं मुख्य विकास अधिकारी राजा गणपति आर ने बताया कि भ्रष्टाचार को लेकर सख्त कार्रवाई की जा रही है. फर्मों द्वारा हड़पी गयी राशि जमा करायी गयी है. पुलिस की विवेचना अपने स्तर पर जारी रहेगी. दरअसल, विकास खंड ताखा की 17 ग्राम पंचायतों में कागजों पर वृक्षारोपण करके लाखों रुपए के घोटाले में गबन की गयी धनराशि को दोबारा खाता में भेजकर समय से काम नहीं करा पाने को लेकर जो तर्क दिया जा रहा है, वह आरोपियों को बचाने का तो खेल नहीं है?

यही नहीं, जब कई चरणों में सत्यापन होने के बाद फर्जी बिल लगाकर काम पूरा होना दिखाया जा चुका था और भुगतान भी लिया जा चुका था, तो फिर यह तर्क अपने में हास्यास्पद ही है. वहीं, सबसे खास बात यह है कि जुलाई महीने में शासन को कार्य पूर्ण होने के बाद किए गये भुगतान की रिपोर्ट भी भेजी जा चुकी थी और तो और जिला स्तर पर बनाई गई कमेटी ने भी मामले में घोटाला होना स्वीकार कर लिया था और खंड विकास अधिकारी ताखा पीएन यादव की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए थे. साथ ही शासन स्तर पर रिपोर्ट भेजी गई थी. पौघारोपण घोटाले को लेकर धारा 420,467,468,471,409 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है. विकासखंड ताखा में इस वर्ष कोरोना काल मे कागजों पर सत्रह ग्राम पंचायतों में साढ़े बारह लाख रुपये का पौधरोपण के नाम पर मनरेगा का धन डकार लिया गया.

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