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इटावा लोकसभा क्षेत्रः 15 साल बाद जिसने BJP को जिताया अब वही बना दुश्मन

कांग्रेस उम्‍मीदवार अशोक कुमार दोहरे
कांग्रेस उम्‍मीदवार अशोक कुमार दोहरे

2014 के बीजेपी उम्मीदवार अशोक कुमार दोहरे बीजेपी को नुकसान पहुंचा सकते हैं. ऐसे में सपा उम्मीदवार को काफी फायदा मिल सकता है.

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इटावा समाजवादी पार्टी का गढ़ बन गया था. 1999 आम चुनाव के बाद से लगातार 2009 तक सपा उम्मीदवार इस सीट को जीतते रहे. 2014 आम चुनाव में मोदी लहर के साथ बीजेपी उम्मीदवार अशोक कुमार दोहरे 15 साल बाद इटावा में कमल खिलाने में सफल रहे. लेकिन 2019 लोकसभा चुनावों की पहली जानकारी यही है कि इटावा में इस वक्त बीजेपी पर सबसे ज्यादा हमला अशोक कुमार दोहरे ही बोल रहे हैं.

पांच साल का कार्यकाल पूरा होने से पहले ही अशोक कुमार दोहरे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर बीजेपी पर दलित विरोधी पार्टी होने का आरोप लगाया था. इसी के बाद से उनके का टिकट कटना तय माना जा रहा था. तभी उन्होंने कांग्रेस का हाथ थाम लिया और बीजेपी के सामने खड़े हो गए.

इटावा लोकसभा चुनाव 2019 में प्रमुख उम्मीदवार
इटावा में इस बार त्रिकोणीय चुनाव हुए. यहां चौथे चरण में 29 अप्रैल को मतदान हो गए थे. इसमें बीजेपी उम्मीदवार राम कठेरिया और गठबंधन में सपा उम्मीदवार कमलेश कठेरिया के बीच कड़ी टक्कर हुई. लेकिन कांग्रेस उम्मीदवार व वर्तमान सांसद अशोक कुमार दोहरे ने बीजेपी को खासा नुकसान पहुंचाया है.
इटावा लोकसभा चुनाव 2014 के नतीजे


आम चुनाव 2014 बीजेपी के अशोक कुमार दोहरे को कुल 4,39,646 वोट मिले थे. उन्होंने सपा के ही सपा के प्रेमदास कठेरिया को हराया था. कठेरिया को 2,66,700 वोट मिले थे. लेकिन पिछली बार बसपा उम्मीदवार अजय पाल सिंह जाटव ने भी 1,92,804 वोट हासिल किए थे. इस बार सपा-बसपा एक साथ हैं. जबकि पिछली बार कांग्रेस उम्मीदवार हंस मुखी कोरी को 13,397 की तुलना में इस बार कहीं ज्यादा वोट मिलने की उम्‍मीद है.

बीजेपी उम्मीदवार राम कठेरिया


इटावा लोकसभा सीट का समीकरण
उत्तर प्रदेश की इटावा सीट इटावा जिले के अंतरगत आती है. इसमें कुल इटावा, भरथना, दिबियापुर, औरैया और सिकन्दरा पांच विधानसभाएं आती हैं. इसमें एक सपा और चार बीजेपी के कब्जे में हैं. ऐसे में बीजेपी के लिए यह सीट आसान मानी जाती है लेकिन अशोक कुमार दोहरे बीजेपी को नुकसान पहुंचा सकते हैं. ऐसे में सपा उम्मीदवार को काफी फायदा मिल सकता है.

2017 के विधानसभा चुनाव के वक्त जारी हुई मतदाता सूची के अनुसार यहां 1721858 वोटर हैं. जबकि 2011 के जनगणना के अनुसार इस क्षेत्र की आबादी 2374473 है. यह क्षेत्र ग्रामीण प्रधान है. यहां 76.36 फीसदी ग्रामीण लोग हैं. लेकिन 23.64 यहां शहरी आबादी भी है. इसमें अनुसूचित जाति के 26.79 फीसदी वोट बेहद मूल्यवान हैं. यहां के 7 फीसदी मुस्लिम वोटर भी निर्णायक भूमिका में हैं.

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