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चलती ट्रेन के सामने लेट गया आदमी, बेटे ने कहा- नोटबंदी है सुसाइड की वजह

मृतक दवा व्यपारी के बेटे ने कह कि अगर पुलिस इटावा थाने से संपर्क करती तो आज उसके पिता का अंतिम संस्कार लावारिश के रूप में नहीं होता. ये जसवंतनगर पुलिस की लापरवाही है.

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इटावा के दिल्ली हावड़ा रेल मार्ग पर एक शख्स ने ट्रेन के नीचे लेटकर आत्महत्या कर ली. शख्स रेल की पटरी पर आता है और सामने से आती ट्रेन को देखकर रेलवे ट्रेक पर ही लेट जाता है. पलक झपकते ही यात्री ट्रेन शख्स के ऊपर से गुजर जाती है. ट्रेन के नीचे आकर सुसाइड करने वाला शख्स इटावा शहर का दवा व्यापारी है. इसका नाम अशोक कुमार गुप्ता बताया गया है.

मृतक के परिजनों ने बताया कि अशोक कुमार गुप्ता को पिछले दिनों नोटबंदी के कारण अपने दवा व्यापार में घाटा हो गया था. जिससे वो परेशान थे. गत 16 मार्च को वो घर से निकल गए थे. देर रात वापस न आने पर अगले दिन 17 मार्च को परिजनों ने इनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट सदर कोतवाली में दर्ज करा दी. इधर घर से निकले दवा व्यापारी ने उसी दिन 16 मार्च को ट्रेन के नीचे कटकर आत्महत्या कर ली. इस आत्महत्या की घटना पास के ही एक ढाबे के सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई.

पुलिस ने मौके से दवा व्यापारी की लाश बरामद की और मोरचरी में रख दी. लेकिन कोतवाली जसवंतनगर पुलिस ने इस लाश की जानकारी जनपद के दूसरे थानों को नहीं दी. जिसके चलते लाश की शिनाख्त नहीं हो सकी. इसके बाद पुलिस ने लाश का लावारिश के रूप में अंतिम संस्कार कर दिया. जब ढाबे वाले की सूचना पर सीसीटीवी को मृतक के परिजनों ने देखा तब उन्होंने कोतवाली जसवंतनगर पुलिस से संपर्क किया.



मृतक के कपड़ों से परिजनों ने दवा व्यापारी अशोक गुप्ता की पहचान की. मृतक के परिजनों ने साफ कहा है कि पुलिस ने दवा व्यपारी की लाश मिलने का सही ढंग से प्रचार प्रसार नहीं किया. मृतक दवा व्यपारी के बेटे ने कह कि अगर पुलिस इटावा थाने से संपर्क करती तो आज उसके पिता का अंतिम संस्कार लावारिश के रूप में नहीं होता. ये जसवंतनगर पुलिस की लापरवाही है.
एसएसपी ने इस मामले में जांच के आदेश दे दिए हैं. एसएसपी अशोक त्रिपाठी का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है. अगर पुलिसकर्मियों की तरफ से कोई लापरवाही की गई है तो कार्रवाई की जाएगी.
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