मदर्स डे विशेष : कितनी मुश्किल रही चंबल मे मां बनने वाली महिला डकैतों की ज़िंदगी?

महिला डाकू के लिए सांकेतिक तस्वीर.

महिला डाकू के लिए सांकेतिक तस्वीर.

Happy Mother's Day : खास मौके पर खास तौर से उन दस्यु सुंदरियों की दास्तान, जिन्होंने बीहड़ों की सभी बाधाओं के बीच शिशुओं को जन्म दिया. यही नहीं, कुछ ने मिसाल रची तो कुछ आज भी बच्चों के भविष्य के लिए जूझ रही हैं.

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इटावा. चंबल के बीहड़ों में मजबूरी के चलते डाकू बनी महिलाओं के लिए मातृत्व हासिल करना बेहद चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन कई ऐसे नाम रहे, जिन्होंने तमाम कठिनाइयों का सामना करते हुए यह फैसला किया. एक तो बी​हड़ों में लंबी दूरियां पैदल तय करने की मजबूरी और उस पर पुलिस का खतरा, आप समझ सकते हैं कि चंबल में किसी महिला डाकू के गर्भवती होने पर ही उसे कितनी मुश्किलों से जूझना पड़ा होगा. लेकिन चुनौतियां इससे कहीं ज़्यादा रहीं.

यह फैक्ट है कि कई डाकू अपने एकाकी जीवन में महिलाओं को साथ रखते थे. यह बात और है किसे जबरन और किसे प्रेमवश रखा गया. चंबल घाटी में डाकुओं का सिक्का हमेशा से अकेला नहीं चला. उनके साथ ऐसी महिलाएं रही हैं, जिनके नाम से इलाके के लोग कांपते रहे और आज भी उनके नाम की चर्चाएं होती हैं.

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बच्चों के लिए जूझ रही हैं दस्यु सुंदरियां?
चंबल में दस्यु सुंदरियों की दहशत का पूरा इतिहास रहा. इनमें से कई महिला डकैत बाद में पुलिस की गोली खाकर या तो मारी गईं या फिर हिरासत में ली गईं या कुछ ने आत्मसमर्पण किया. इनमें से कुछ महिला डकैत आज समाज में नए सिरे से जीने के रास्ते खोज रही हैं तो कई अपने बच्चों को समाज में सम्मानजनक स्थान दिलाने की जद्दोजहद कर रही हैं. मां बनने वाली महिला डकैतों की अनसुनी और विशेष कहानियां.

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मदर्स डे पर उन दस्यु सुंदरियों की कहानी जो मां भी रहीं या हैं.

मां ने बेटे को पुलिस अफसर बनाकर रची मिसाल



चंबल घाटी के कुख्यात डकैत छविराम की पत्नी ने तमाम संघर्षों के बाद अपने बेटे को समाज में जो सम्मान दिलाया, उसकी दूसरी मिसाल मिलना मुश्किल है. डकैत छविराम की पत्नी संघर्षों से कभी नहीं घबराई. उन्होंने अपने बेटे अजय पाल यादव को पढ़ाया-लिखाया. आज अजयपाल यादव उत्तर प्रदेश पुलिस में सब इंस्पेक्टर हैं.

पहली दस्यु सुंदरी की कहानी

चंबल के इतिहास में पुतलीबाई का नाम पहली महिला डकैत के रूप में दर्ज है।. बीहड़ों में पुतलीबाई का नाम एक बहादुर और आदर्शवादी महिला डकैत के रूप में सम्मानपूर्वक लिया जाता है. गरीब मुस्लिम परिवार में जन्मी गौहरबानो को परिवार का पेट पालने के लिए नृत्यांगना बनना पड़ा. इस पेशे ने उसे नया नाम दिया था, पुतलीबाई.

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खूबसूरत पुतलीबाई का प्रेम प्रसंग कुख्यात सुल्ताना डाकू के साथ हुआ था. दोनों के प्रेम से जन्मी थी एक बेटी, जिसका नाम तन्नो रखा गया था. इसी बीच, पूछताछ के नाम पर पुलिस के टॉर्चर से परेशान होकर पुतलीबाई सब छोड़कर सुल्ताना के साथ बीहड़ों में गई तो फिर नहीं लौटी. पुलिस एनकाउंटर में सुल्ताना डाकू के मारे जाने के बाद पुतलीबाई गिरोह की सरदार बनी और 1950 से 1956 तक बीहड़ों में उसका जबर्दस्त आतंक रहा.

पुतलीबाई पहली महिला डकैत थी, जिसने गिरोह के सरदार के रूप में सबसे ज्यादा पुलिस से मुठभेड़ की. बताया जाता है कि एक पुलिस मुठभेड़ में गोली लगने से पुतलीबाई को अपना एक हाथ गंवाना पड़ा था. बावजूद इसके उसकी गोली चलाने के हुनर में ज़ंग नहीं लगा. सुल्ताना की मौत के बाद कई डाकू उससे शादी करना चाहते थे, लेकिन पुतलीबाई ने हर प्रस्ताव ठुकराया. पुतलीबाई बीहड़ में नहीं, लेकिन बीहड़ से रिश्ते के बाद ही मां बनी थी.

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पुतलीबाई की कहानी पर एक से ज़्यादा फ़िल्में बनीं.

बैंडिट क्वीन सीमा परिहार ने उठाईं मुश्किलें

एक वक्त था जब बीहड़ों में सीमा के नाम का सिक्का चलता था. बीहड़ों में फूलनदेवी की परंपरा में अगला नाम मानी जाने वाली सीमा पहली महिला डकैत थी, जिसने बीहड़ में रहते हुए शिशु को जन्म दिया था. वास्तव में सीमा की कहानी तब शुरू हुई थी, जब उसे कुख्यात दस्यु सरगना लालाराम उठाकर ले गया था. लालाराम ने गिरोह के निर्भय गुर्जर से सीमा की शादी करवाई लेकिन बात बनी नहीं और सीमा कुछ ही समय बाद लालाराम के साथ रहने लगी.

लालाराम से एक बेटा होने की बात कबूलने वाली सीमा बताती है कि उसके बेटे का नाम सागर है, जो आज बेहतर भविष्य के लिए पढ़ाई कर रहा है. साल 2000 में लालाराम के मारे जाने के कुछ ही महीनों बाद सीमा ने आत्मसमर्पण किया था. फिलहाल, जमानत पर चल रही सीमा परिहार औरैया में रहते हुए राजनीति में सक्रिय है. फूलनदेवी के चुनाव क्षेत्र मिर्जापुर से लोकसभा चुनाव लड़ चुकी सीमा टेलीविजन शो बिग बॉस में हिस्सा ले चुकी है.

इन डाकुओं की बीवियां भी बनीं मां

सीमा परिहार के बाद डकैत चंदन की पत्नी रेनू यादव, डकैत सलीम गुर्जर की प्रेमिका सुरेखा उर्फ सुलेखा और जगन गुर्जर की पत्नी कोमेश गुर्जर ने भी चंबल के बीहड़ों में रहते हुए मातृत्व हासिल किया. इनकी रोचक कहानियां भी संक्षेप में जानिए.

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दस्यु सुंदरी सीमा परिहार की चर्चित तस्वीर.

1. मूल रूप से उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के बदनपुरा की सुरेखा लंबे समय तक जेल में रहने के बाद अब गांव में रह रही है. 14 साल की जेल काटने के बाद सुरेखा सिलाई करके बेटे का भविष्य सुधारने मे लगी है. हाल में हुए पंचायत चुनाव मे भी प्रधान पद के लिए सुरेखा की उम्मीदवारी की संभावना थी लेकिन ऐन वक़्त पर उसने इनकार कर दिया.

2. साल 2005 में औरैया में पुलिस मुठभेड़ में मारे गये कुख्यात डकैत चंदन यादव गैंग की महिला डकैत रेनू यादव ने भी एक बेटी को जन्म दिया. रेनू की बेटी अपनी नानी के पास औरैया के मंगलीपुर गांव मे रह रही है.

3. अरविन्द गुर्जर और रामवीर गुर्जर दोनों के साल 2005 में बबली और शीला से डाकू जीवन में ही बीहड़ में शादी रचाई थी. रामवीर की बीवी शीला ने नर्मदा नाम की बेटी को जन्म दिया. आज नर्मदा अपनी मां के साथ मध्य प्रदेश के इंदौर में पढ़ाई कर भविष्य संवारने में जुटी है.

4. राजस्थान के कुख्यात डकैत जगत गुर्जर के गैंग की महिला डकैत कोमेश गुर्जर भी बीहड़ में रहकर मां बनी. धौलपुर ज़िले के पूर्व सरपंच छीतरिया गुर्जर की बेटी कोमेश अपने पिता की हत्या का बदला लेने के लिए बंदूक उठाई थी. जगन के साथ उसका प्रेम हुआ. दोनों की प्रेम कहानी अब भी सुनी सुनाई जाती है.

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पुलिस हिरासत में महिला दस्यु साधना पटेल. (File Photo)

शादीशुदा और दो बच्चों के बाप जगन के साथ कोमेश की प्रीत ऐसी लगी कि साढ़े चार फुट लंबी कोमेश को जगन की ढाल कहा जाने लगा. कहते हैं कि जब 2008 में धौलपुर के समरपुरा में कोमेश का इलाज चल रहा था, तब पुलिस ने उसे पकड़ लिया था. कोमेश की जुदाई जगन से बर्दाश्त नहीं हुई थी इसलिए उसने जेल में कोमेश से मिल पाने की आस में ही आत्मसमर्पण किया था.

ये नाम भी आते रहते हैं याद

अस्सी के दशक में सीमा परिहार के आतंक के बाद लवली पांडे, अनीता दीक्षित, नीलम गुप्ता, सरला जाटव, सुरेखा, बसंती पांडे, आरती, सलमा, सपना सोनी, रेनू यादव, शीला इंदौरी, सीमा यादव, सुनीता पांडे, गंगाश्री आदि ने बीहड़ में दस्तक दी, लेकिन किसी को सीमा जैसा नाम नहीं मिला. हालांकि सीमा परिहार के मुकाबले एक समय लवली पांडेय ज्यादा खतरनाक साबित हुई थी. सरला, नीलम और रेनू के अलावा अन्य पुलिस की गोलियों का शिकार हुईं.

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