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इटावा: सवालों के घेरे में रहा है सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी में OSD का पद

हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कुलपति के विशेष कार्य अधिकारी गुरजीत सिंह कल्सी को हटा दिया था और निर्देश दिए थे कि नियम विरुद्ध ढंग से ओएसडी के पद पर नियुक्त करने वाले अधिकारी का उत्तर दायित्व निर्धारित कर उसके खिलाफ भी कार्रवाई का आदेश दिया है.
हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कुलपति के विशेष कार्य अधिकारी गुरजीत सिंह कल्सी को हटा दिया था और निर्देश दिए थे कि नियम विरुद्ध ढंग से ओएसडी के पद पर नियुक्त करने वाले अधिकारी का उत्तर दायित्व निर्धारित कर उसके खिलाफ भी कार्रवाई का आदेश दिया है.

हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कुलपति के विशेष कार्य अधिकारी गुरजीत सिंह कल्सी को हटा दिया था और निर्देश दिए थे कि नियम विरुद्ध ढंग से ओएसडी के पद पर नियुक्त करने वाले अधिकारी का उत्तर दायित्व निर्धारित कर उसके खिलाफ भी कार्रवाई का आदेश दिया है.

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इटावा. समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) के गृहगांव मे स्थापित सैफई मेडिकल यूनीवसिर्टी के ओएसडी (OSD) पर तैनात गुरजीत सिंह कल्सी (Gurjeet Singh Kalsi) को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्तर पर बर्खास्त करने के बाद चर्चाओ को बाजार गर्म हो चला है. ऐसा कहा गया है कि सैफई मेडिकल यूनीवसिर्टी मे अपने स्थापना के समय से ही ओएसडी का पद स्वीकृत ना होने के बाद में भी ओएसडी पद की तैनाती रही, लेकिन इसके बावजूद भी वह पद हमेशा सवालों के घेरे में और चर्चाओं में बना रहा.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मामले का संज्ञान लिये जाने के बाद और उसकी बर्खास्तगी के आदेश जारी किये जाने के बाद अब यूनीवसिर्टी प्रशासन बचाव की मुद्रा में आ गया है और लखनऊ पीजीआई की नियमावली का हवाला देकर खुद को पाक साफ साबित करने का प्रयास कर रहा है. बता दें कि एक दिन पूर्व ही सैफई मेडिकल यूनीवसिर्टी के कुलाधिपति एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कुलपति के विशेष कार्य अधिकारी गुरजीत सिंह कल्सी को हटा दिया था और निर्देश दिए थे कि नियम विरुद्ध ढंग से ओएसडी के पद पर नियुक्त करने वाले अधिकारी का उत्तर दायित्व निर्धारित कर उसके खिलाफ भी कार्रवाई का आदेश दिया है.

गुरजीत सिंह कलसी 31 अगस्त 2020 की यूनीवसिर्टी से वित्त नियंत्रक के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद कुलसचिव सुरेश चंद्र शर्मा ने 3 सितंबर 2020 को पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड के माध्यम से ओएसडी पद पर तैनाती कर दी. पूर्व ओएसडी जयशंकर प्रसाद 65 साल की उम्र में सितंबर 2018 में सैफई मेडिकल यूनीवसिर्टी में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी के तौर पर नियुक्ति हुए जबकि शासन ने संविदा पर रखने हेतु 65 साल के व्यक्ति को रखने से मना कर फाइल को अनुमोदन नहीं दिया था. लेकिन शासन के आदेश को दरकिनार कर 1 वर्ष तक जयशंकर प्रसाद मुख्य प्रशासनिक अधिकारी बने रहे.



2019 में मेडिकल यूनीवसिर्टी की बैठक में दोबारा कुलपति ने जयशंकर प्रसाद को भूतपूर्व सैनिक कल्याण के मार्फत संविदा पर 48 हजार वेतनमान पर रखवा कर विश्वविद्यालय का ओएसडी नियुक्त करवा दिया. मेडिकल यूनीवसिर्टी के पूर्व ओएसडी जयशंकर प्रसाद के पुत्र और पूर्व सफाई फर्म साबरीन चौधरी के मालिक सिराज चौधरी के बीच करीब 13 मिनट की ऑडियो में फर्म को दोबारा बहाल करने के एवज में साढ़े 5 लाख रुपया पहुंचने के बाद भी काम न होने का ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने पर कुलपति ने आडियो की जांच कराकर कार्रवाई की बात कही थी.
इसी बीच जांच रिपोर्ट आने के पहले ही ओएसडी जयशंकर प्रसाद ने इस्तीफा दे दिया था. कुल मिलाकर जिस तरह से अपनी खामी को छिपाने के लिये सफाई दी जा रही है वह लोगों के गले नहीं उतर रही है. मेडिकल यूनीवसिर्टी के अधिनियम की धारा-48 में उल्लेख है कि जब तक सैफई मेडिकल यूनीवसिर्टी मे नियमावली नहीं बन जाती तब तक संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान लखनऊ की नियमावली का पालन किया जायेगा.

16 जून 2006 को गर्वनिंग बॉडी की हुई बैठक में इसका अनुमोदन लिया गया. संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ की नियमावली के नियम-97 के अनुसार कि यदि संस्थान को किसी संकाय के सदस्य या किसी अन्य संकाय से भिन्न अधिकारी की सेवाओं की आवश्यकता हो तो अधिवर्षता पर सेवानिवृत्ति के पश्चात् नियोजक ऐसे व्यक्ति को पुनः नियोजित कर सकता है. कोरोना महामहारी में कोरोना कमेटी ही समस्त निर्णय लेने के लिये सक्षम थी.

कोरोना कमेटी की 2 सितंबर 2020 को हुई बैठक में कल्सी को ओएसडी पद पर नियुक्त किये जाने का निर्णय लिया गया था. इन्हीं सब कारणों के कारण जीएस कल्सी की नियुक्ति ओएसडी के पद पर 11 माह के लिये की गयी थी, जैसा कि पूर्व ओएसडी की नियुक्ति हेतु कार्यपरिषद द्वारा अनुमोदन है. इस प्रकार ओएसडी जीएस कल्सी की नियुक्ति नियमानुसार की गयी है. कुलपति प्रो.राजकुमार ने मुख्यमंत्री के निर्णय पर सवाल उठाते हुए कहा कि बेसक शासन स्तर पर कार्यवाही की गई हो फिर भी लेकिन ओएसडी की नियुक्ति नियमानुसार की गयी है इसको लेकर शासन को स्पष्ट किया जायेगा.
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