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समाजवादी पार्टी के गढ़ इटावा में आरक्षण से प्रभावित हो सकता है दिग्गज हस्तियों का सियासी वजूद

सपा के गढ़ इटावा में आरक्षण से प्रभावित हो सकता है दिग्गज हस्तियों का सियासी वजूद

सपा के गढ़ इटावा में आरक्षण से प्रभावित हो सकता है दिग्गज हस्तियों का सियासी वजूद

पंचायत चुनाव की आहट के साथ ही समाजवादी पार्टी के गढ़ इटावा में आरक्षण की प्रकिया को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है. यहां ग्रामीण सियायत के मुकाम पर कायम कुछ नेताओं को लगता है कि इस बार आरक्षण प्रकिया से कई महत्वपूर्ण माने जाने वाले राजनीतिकों के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 27, 2021, 5:08 PM IST
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इटावा. उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव की आहट के साथ ही समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के गढ़ इटावा (Etawah) में आरक्षण की प्रकिया को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है. यहां ग्रामीण सियायत के मुकाम पर कायम कुछ नेताओं को लगता है कि इस बार आरक्षण (Reservation) प्रकिया से कई महत्वपूर्ण माने जाने वाले राजनीतिकों के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं. यह इसलिए कहा जा रहा है कि क्योंकि प्रभावित होने वाले राजनीतिक लोगों ने अपने प्रभाव के कारण अपने-अपने इलाकों को कभी भी सही ढंग से आरक्षित नहीं होने  दिया.

उत्तर प्रदेश के इटावा मे पंचायत चुनाव की आहट के साथ ही जिला पंचायत अध्यक्ष पद का आरक्षण तय हो चुका है. अब क्षेत्र पंचायत प्रमुखों और ग्राम पंचायत प्रधानों के पदों की आरक्षण सूची का हर किसी को इंतजार है. फिलहाल आरक्षण की अंतिम सूची दो मार्च को जारी होगी. आरक्षण की प्रकिया को अंतिम रूप देने के लिए पंचायत विभाग के अधिकारियों और कर्मियों की बड़ी टीम समायोजन लगी हुई है. इस प्रक्रिया को लेकर यहां से चुनाव लडऩे वाले कई प्रभावशाली दावेदारों में बेचैनी दिख रही है. 1995 से अभी तक अनारक्षित रहीं सीटों को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित करने की नीति से खलबली मची हुई है. ब्लाक प्रमुखी की दावेदारी करने वाले उम्मीदवारों में भारी उथल पुथल है.

इन ब्लाकों पर रहा है सपा का कब्जा



अभी तक सामान्य या पिछड़ा वर्ग के संभावित दावेदार जिन ब्लाकों से तैयारी कर रहे थे वहां अब आरक्षण की संभावनाओं ने सारे समीकरण उलट- पुलट कर दिए हैं. सबकी निगाहें इस बार सैफई, जसवंतनगर और भरथना क्षेत्र पंचायत प्रमुख सीट पर लगी हैं. तीनों ब्लाक ऐसे हैं जहां सपा के प्रभावशाली नेताओं का एकाधिकार रहा है. इस बार भाजपा सत्ता में है ऐसे में देखना यह है कि भाजपा इन परिवारों के एकाधिकारों को कहां तक चुनौती दे पाती है. इटावा जिले में बढ़पुरा, चकरनगर, भरथना, ताखा, सैफई, जसवंतनगर, महेवा और बसरेहर कुल आठ क्षेत्र पंचायतें हैं. अधिकांश सीटों पर सपा का दबदबा कायम होता आया है. बढ़पुरा, महेवा और चकरनगर में भाजपा अपनी उपस्थिति दर्ज कराती रही.
मुलायम परिवार ही रहा काबिज
वर्ष 1994 में सैफई ब्लाक बनने के बाद सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के भतीजे रणवीर सिंह यादव पहले ब्लॉक प्रमुख बने. वे लगातार ब्लॉक प्रमुख रहे . 2001 में उनके निधन के बाद सैफई परिवार के ही धर्मेंद्र यादव ने यह सीट संभाली. धर्मेंद्र यादव के सांसद बन जाने के बाद रणवीर सिंह के सुपुत्र तेज प्रताप सिंह यादव ब्लॉक प्रमुख बने. वे भी जब मैनपुरी से सांसद चुन गए तो उनकी मां मृदुला यादव ब्लॉक प्रमुख का पद संभाल रहीं हैं. इसी तरह से जसवंतनगर में अब प्रसपा नेता प्रो. बृजेश यादव के परिवार का एकाधिकार रहा है. पहले उनके पिता रामपाल सिंह यादव उसके बाद स्वयं बृजेश यादव और अब उनके बेटे मोंटी यादव ब्लॉक प्रमुख हैं.

भरथना में पूर्व सांसद प्रदीप यादव का इस पद पर एकाधिकार रहा है. पहले वे स्वयं ब्लॉक प्रमुख रहे. अब उनके पिछले कई सालों से उनके भाई हरिओम यादव ब्लॉक प्रमुख हैं. बढ़पुरा और महेवा ब्लॉक ऐसे हैं जहां भाजपा के ब्लाक प्रमुख बने.

नए आरक्षण से प्रभावित होंगीं पंचायतें
अभी तक बढ़पुरा अनुसूचित जाति, चकरनगर महिला सामान्य, भरथना अनारक्षित, ताखा अनुसूचित जाति महिला, सैफई ओबीसी, जसवंतनगर ओबीसी, महेवा अनारक्षित और बसरेहर ओबीसी के लिए आरिक्षत है. अब आरक्षण की प्रक्रिया चल रही है. शासन के निर्देशों के अनुसार एक मार्च तक जिलाधिकारी के स्तर से आरक्षण सूची प्रस्तावित कर शासन को भेजी जाएगी. दो मार्च को आरक्षण सूची का प्रकाशन होगा . इसके बाद आपत्तियां आमंत्रित करने उनका निस्तारण करने के बाद 14 मार्च तक अंतिम प्रकाशन होगा.  नया आरक्षण सपा और भाजपा के चुनावी गणित को बनाने और बिगाडऩे वाला भी साबित हो सकता है.

चक्रानुक्रम से बदलेगी तस्वीर
उत्तर प्रदेश में पंचायत राज अधिनियम के अंतर्गत 1995 के पंचायत चुनाव में आरक्षण लागू हुआ था. जिसमें 33 प्रतिशत सीट सभी वर्गों में महिलाओं के लिए तथा 27 प्रतिशत अन्य पिछड़ा वर्ग और 22 प्रतिशत अनुसूचित जाति/जनजाति के लिए आरक्षण का प्रावधान किया गया था. चक्रानुक्रम के अनुसार प्रत्येक चुनाव में आरक्षण लागू होगा. इटावा में आठ ब्लाकों में कुल 471 ग्राम सभाओं मे से सैकड़ों ग्राम सभाओं में, 1995,2000, 2005,2010, 2015 के चुनावों में चक्रानुक्रमानुसार आरक्षण होने के बाद भी अनुसूचित जाति को आरक्षण नहीं मिल सका. लेकिन, शासन के निर्देशानुसार 2021 के पंचायत चुनाव में वीआईपी ग्राम सभा आरक्षित हो सकती हैं.  24 जिला पंचायत सदस्य में से बढ़पुरा प्रथम अभी तक एससी आरक्षण से वंचित है. इस कारण इसका एससी के लिये आरक्षित होना तय है. इसके आलावा पाच या 6 जिला पंचायत सदस्य एससी के लिये आरक्षित होंगे.
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