• Home
  • »
  • News
  • »
  • uttar-pradesh
  • »
  • Etawah Tuesday Special: हनुमान जी के 'जिंदा' होने का एहसास कराती है इटावा के पिलुआ मंदिर की मूर्ति

Etawah Tuesday Special: हनुमान जी के 'जिंदा' होने का एहसास कराती है इटावा के पिलुआ मंदिर की मूर्ति

इटावा में मौजूद है बजरंगबली का चमत्कारिक मंदिर

इटावा में मौजूद है बजरंगबली का चमत्कारिक मंदिर

Etawah News: मंगलवार को बुढ़वा मंगल के अवसर पर बड़ी तादाद में हनुमानभक्त रात से ही यहां पहुंचना शुरू हो गये हैं. जिनकी सुरक्षा के लिए करीब 300 के आसपास पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है.

  • Share this:

इटावा. पवनपुत्र बजरंगबली के चमत्कारों के अनंत किस्से दुनिया भर में मशहूर हैं, लेकिन महाभारत कालीन सभ्यता से जुड़े उत्तरप्रदेश में इटावा के बीहड़ों में स्थित पिलुआ महावीर मंदिर केे बारे में मिथक और धारणा है कि इस मंदिर की हनुमान मूर्ति सैकड़ों सालों से उनके जिंदा होने का एहसास कराती नजर आती है. मंगलवार को बुढ़वा मंगल के अवसर पर बड़ी तादाद में हनुमानभक्त रात से ही यहां पहुंचना शुरू हो गये है. जिनकी सुरक्षा के लिए करीब तीन सौ के आसपास पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है. मंदिर परिसर के बाहर बड़ी तादाद में पूजा साग्रमी के अलावा प्रसाद आदि की दुकानें भी सज गई है.

ऐसा कहा जाता है कि साल में एक बार बुढ़वा मंगल के दिन यहां पर उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तराखंड समेत देश के विभिन्न राज्यों के अलावा विदेशों से भी बड़ी संख्या में हनुमानभक्त पूजा अर्चना करने के लिए आते है. हनुमान मंदिर के मुख्य मंहत हरभजन दास का कहना है कि वैसे तो हनुमान जी की लेटी हुई मूर्ति इलाहबाद में भी है, लेकिन जैसी मूर्ति यहां पर है ऐसी दूसरी मूर्ति देश और दुनिया के किसी भी दूसरे हिस्से में नहीं है.

दावे कैसे-कैसे
हनुमान जी की इस प्रतिमा के मुख में हर वक्त पानी भरा रहता है. कितना भी प्रसाद मुंह में डालो पूरा प्रसाद मुंह में समा जाता है. आज तक किसी को पता नहीं चला कि यह प्रसाद जाता कहां हैं. महाबली हनुमान जी की प्रतिमा लेटी हुई है और लोगों की माने तो ये मूर्ति सांस भी लेती है और भक्तो के प्रसाद भी खाती है.

हनुमान जी खुद जीवित रूप में विराजमान!
कहा जाता है यहां हनुमान जी खुद जीवित रूप में विराजमान हैं. बीहड़ में स्थापति हनुमान मंदिर की मूर्ति अपने आप में कई चमत्कार समेटे हुए है, लेकिन आज तक इसके इस रहस्य का कोई पता नहीं लगा पाया कि इसके मुखार बिंदु में प्रसाद के रूप में जाने वाला दूध, पानी और लडडू आखिरकार जाता कहां है. इसको चमत्कार नहीं तो और क्या कहा जायेगा।

भक्तों की धारणा
हनुमान भक्तों का यह भी दावा है कि हनुमान जी इस मंदिर में जीवित अवस्था में है तभी एकांत में सुनने पर प्रतिमा से सांसें चलने की आवाज सुनाई देती है. बताया जाता है कि हनुमान जी के मुख से राम नाम की ध्वनि भी सुनाई देती है. बजरंगबली के ऐसे चमत्कारों के बारे में सुनकर एवं देखकर लोगों का विश्वास उनमें और भी ज्यादा बढ़ जाता है.

ऐसी है मान्यता
मान्यता है कि इस मंदिर में जो भी बजरंगबली के दर्शन करता है, उसके जीवन में कभी कष्ट नहीं आते हैं. हनुमान जी की मूूर्ति इतनी प्रभावशाली है कि इनकी आंखों में देखते ही लोगों की परेशानियां हल हो जाती हैं. इन्हें लगाया जाने वाला कई गुणा भोग भी इनके उदर को नहीं भर पाता है. यमुना नदी के किनारे बसे महाभारत कालीन सभ्यता से जुड़े यहां के बीहड़ में बंजरगबली के मंदिर में हनुमान जी की एक ऐसी मूर्ति स्थापित है, जिसके चमत्कार के आगे हर कोई नतमस्तक है. सैलून से कोई भी श्रद्धालु इस मूर्ति का मुख भरने का साहस नहीं कर पाया है.

मूर्ति उदगम की कथा
इस मूर्ति के उदगम के बारे में कहा जाता है कि प्रतापनेर के राजा हुक्म तेजप्रताप सिंह को ऐसा सपना आया, जिसमें इस मूर्ति के इसी स्थान पर निकले होने की बात बताई गई. इसके बाद राजा ने इस मूर्ति को अपने महल में स्थापित करने की कोशिश की, लेकिन राजा हार गया और हनुमान जी की मूर्ति आज अपने स्वरूप में हनुमान भक्तों की आस्था का केंद्र बना हुआ है. यह चमत्कारिक मंदिर चौहान वंश के अंतिम राजा हुक्म देव प्रताप की रियासत में बनाया गया था.

पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

हमें FacebookTwitter, Instagram और Telegram पर फॉलो करें.

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन

टॉप स्टोरीज