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UP Panchayat Chunav 2021: आरक्षण से बदले सियासी समीकरण, अपने ही गढ़ में सपा के सामने कड़ी चुनौती

इस बार ब्‍लॉक प्रमुख के चुनाव में सपा के सामने भाजपा और प्रसपा की कड़ी चुनौती होगी.

इस बार ब्‍लॉक प्रमुख के चुनाव में सपा के सामने भाजपा और प्रसपा की कड़ी चुनौती होगी.

Uttar Pradesh Gram Panchayat Aarakshan List: यूपी पंचायत चुनाव के लिए जिलेवार आरक्षण सूची जारी होने के बाद इटावा में राजनीतिक समीकरण बदलते दिखाई दे रहे हैं. इस बार चुनाव में समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के सामने पंचायतों में एकाधिकार बनाए रखने की चुनौती है.

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इटावा. समाजवादी गढ़ कहे जाने वाले उत्तर प्रदेश के इटावा में पंचायत चुनाव (UP Panchayat Chunav 2021) में आरक्षण प्रकिया लागू होने के बाद नई चुनौती खड़ी हो गयी है. यह ऐसी चुनौती है जिसमें पंचायतों में पार्टी के अस्तित्व को बरकरार के लिए खासी मशक्क्त करनी पड़ सकती है. इटावा जिले की आठ क्षेत्र पंचायतों में पिछले दो दशक से भी ज्यादा समय तक समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) का दबदबा रहा. सैफई, जसवंतनगर, बसरेहर, ताखा और भरथना कुल चार क्षेत्र पंचायतें तो ऐसी हैं जो अभी तक अपराजेय रही हैं. इन इलाकों में केवल सपा के ही प्रत्याशी ही चुनाव में जीतते रहे हैं. जबकि कोई दूसरा दल सपा की मजूबती के कारण टिक नहीं सका है.

इसके इतर बीहड़ इलाके से ताल्लुक रखने वाले ब्लॉक बढ़पुरा, महेवा और चकरनगर में जरूर कभी भाजपा तो कभी सपा का दांव चलता रहा. वहीं, ताखा में एक बार कांग्रेस काबिज रही, लेकिन भाजपा यहां कभी अपना वजूद कायम नहीं कर सकी. ताखा में एक बार को छोड़कर बाकी सभी चुनावों में सपा ही काबिज रही. वर्ष 1995 से लगातार 2015 तक के चुनावों में सपा ही सपा दिखाई देती रही.

कुछ यूं बदल रही है राजनीति
अब राजनीति की बयार बदलने से चुनाव का परिदृश्य भी पहली बार बदलने जा रहा है. सैफई सीट अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित हो जाने से अब यहां 25 सालों से सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के परिवार का एकाधिकार इस बार टूटने जा रहा है. इसके इतर दूसरे ब्लॉकों में अपनी स्थिति को बचाने में सपा को इस बार विरोधियों के अलावा अपनों की चुनौतियों का सामना भी करना पड़ेगा. प्रसपा और सपा के बीच चल रही जुबानी जंग का सेमीफाइनल पंचायत चुनाव होगा.
इस बार सबसे बड़ी चुनौती सपा के सामने है. सपा को भाजपा के अलावा प्रसपा से भी लड़ना पड़ सकता है. वैसे तो भरथना में पूर्व सांसद प्रदीप यादव और जसवंतनगर में प्रोफेसर बृजेश यादव के परिवार का ही एकाधिकार रहा है. इस बार देखना यह है कि इस एकाधिकार को भाजपा तोड़ पाती है या नहीं. भरथना में पूर्व सांसद प्रदीप यादव के भाई हरिओम यादव ब्लाक प्रमुख हैं और वह इस समय सपा में हैं. वहीं, जसवंतनगर में प्रोफेसर बृजेश यादव के पुत्र अनुज यादव मोंटी ब्लॉक प्रमुख हैं. वे इस समय शिवपाल सिंह यादव के नजदीकी होने के कारण प्रसपा में हैं. तीसरी सीट बसरेहर की है, जहां सपा प्रमुख अखिलेश यादव के फूफा डॉ.अजंट सिंह यादव ब्लॉक प्रमुख हैं.



इस बार जसवंतनगर को सामान्य महिला, भरथना को अन्य पिछड़ा वर्ग और बसरेहर को अनारक्षित की श्रेणी में रखा गया है. इन तीनों सीटों पर पुराने प्रत्याशी फिर से मैदान में आ सकते हैं. उनके लिए आरक्षण बदल जाने से कोई समस्या नहीं है. जसवंतगनर, ताखा, भरथना और बसरेहर में सपा और प्रसपा के बीच अगर जोर आजमाइश होने लगी तो मुकाबला काफी रोचक और दूरगामी नतीजों वाला होगा.

भाजपा ने झोंकी ताकत
भाजपा ने पूर्व में बढ़पुरा, चकरनगर, महेवा में समय समय पर अपने प्रत्याशी जिताए हैं. यहां भाजपा और सपा के बीच कभी हम तो कभी तुम का दौर चलता रहा है. अब इन सीटों पर भाजपा पूरी ताकत लगाएगी. बढ़पुरा को अन्य पिछड़ा वर्ग, महेवा को अनुसूचित जाति, ताखा को अन्य पिछड़ी जाति महिला और चकरनगर को अनारक्षित की श्रेणी में रखा गया है. यही वजह है कि यहां भाजपा अपना जातीय समीकरण फिट करने की कोशिश करेगी. इस बार का ब्लॉक प्रमुख चुनाव काफी दिलचस्प और रोचक होगा. वैसे समाजवादी पार्टी को चुनौती देने के लिए भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह पिछले दिनों इटावा मुख्यालय पर भाजपा के प्रमुख नेताओं के बीच एक अहम बैठक कर सभी भाजपाईयों को इस बात का संकेत दे चुके हैं कि उनको हर हाल में अधिक से अधिक सीटों पर पार्टी के प्रत्याशियों को जीता हुआ देखना है.
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