Etawah News: एक सीट के सहारे भाजपा का जिला पंचायत अध्यक्ष पद काबिज होने का दावा? कर रहा है हर किसी को हैरान

समाजवादी गढ़ उत्तर प्रदेश के इटावा में जिला पंचायत सदस्यों के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को करारी हार का सामना पहले की करना पड़ा है

Uttar Pradesh News: इटावा में समाजवादी पार्टी और प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया ने मिलकर के जिला पंचायत सदस्यों का चुनाव लड़ा, जिसमें 20 सदस्य जीत करके आए जब कि बहुजन समाज पार्टी और भारतीय जनता पार्टी का एक एक सदस्य निर्वाचित हुआ है इसके इतर दो निर्दलीय सदस्यों की भी जीत हुई है.

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इटावा. समाजवादी गढ़ इटावा में जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में एक बार फिर से मुलायम परिवार को चुनौती देने वाला कोई सामने आते हुए नहीं दिख रहा है. फिर भी भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह के इस दावे कि इटावा जिला पंचायत अध्यक्ष उनकी पार्टी का होगा. इस दावे को हर कोई बड़ी हैरत से देख रहा है, क्योंकि भाजपा के पास चुनाव में उतरने के लिए मात्र एक सीट है जबकि नामंकन के लिये कम से कम तीन सदस्यों का होना बेहद जरूरी है. समाजवादी गढ़ उत्तर प्रदेश के इटावा में जिला पंचायत सदस्यों के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को करारी हार का सामना पहले की करना पड़ा है, लेकिन इसके बाबजूद जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर दावेदारी किसी के भी गले नहीं उतर रही है.

इटावा में समाजवादी पार्टी और प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया ने मिलकर के जिला पंचायत सदस्यों का चुनाव लड़ा, जिसमें 20 सदस्य जीत करके आए जब कि बहुजन समाज पार्टी और भारतीय जनता पार्टी का एक एक सदस्य निर्वाचित हुआ है इसके इतर दो निर्दलीय सदस्यों की भी जीत हुई है. एकमात्र जिला पंचायत सदस्य जीतने के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष बनने का दावा करने वाली भारतीय जनता पार्टी के पास चीज का क्या आधार है यह बात किसी के भी पल्ले नहीं पड़ रही है.

जिला पंचायत सदस्य के चुनाव के लिए अध्यक्ष पद के दावेदार के अलावा दो अन्य सदस्य भी होने चाहिए, जो प्रस्तावक की भूमिका में भी खड़े दिखाई दे लेकिन जब मात्र एक ही जिला पंचायत सदस्य है. तो फिर ऐसे में भारतीय जनता पार्टी के इतने बड़े पद पर बैठे जिम्मेदार पदाधिकारी यह दावा आखिरकार कैसे कर सकते हैं कि इटावा जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर भारतीय जनता पार्टी का प्रतिनिधि काबिज होगा.

असल में हाल में हुए पंचायत चुनाव में इटावा के जिला पंचायत सदस्य के चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को मात्र एक सीट हासिल हुई है जब कि 24 जिला पंचायत सदस्य की सीटें है. मात्र 1 सीट हासिल किए जाने के बावजूद भी भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह इस बात का दावा करते हुए कि इटावा में जिला पंचायत अध्यक्ष उनकी ही पार्टी का बनेगा. यह बात ना तो समाजवादी पार्टी को समझ आई ओर ना ही सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के प्रतिनिधि इस बात को समझ पाए. दोनों दलों के प्रतिनिधि ऐसा नहीं समझ पा रहे हैं कि आखिरकार भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने यह दावा किस बिना पर कर दिया है कि इटावा में जिला पंचायत अध्यक्ष उनके दल का बनेगा.

स्वतंत्र देव सिंह का यह दावा किसी के भी गले नहीं उतर रहा
भारतीय जनता पार्टी इटावा में बढ़पुरा द्वितीय सीट पर नारायणी देवी के रूप में विजय हुई है जबकि किसी भी जिला पंचायत अध्यक्ष पद के उम्मीदवार के नामांकन के लिए कम से कम तीन सदस्यों का होना बेहद आवश्यक है क्योंकि दो सदस्य प्रस्तावक की भूमिका में भी रहेंगे. भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष अजय प्रताप सिंह धाकरे इस बात को पहले ही बोल चुके हैं कि उनकी पार्टी के पास जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए जनमत नहीं है. इसलिए उनकी पार्टी जिला पंचायत अध्यक्ष पद का चुनाव नहीं लड़ेगी लेकिन इसके बाबजूद भी भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह का यह दावा किसी के भी गले नहीं उतर रहा है.

बीजेपी ने अभी तक अपने प्रत्याशी पद की घोषणा नहीं की
कई राजनीतिक इस बात का भी दावा कर रहे हैं कि भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह को इटावा की जमीनी हकीकत के बारे में कोई सही और सटीक जानकारी नहीं है और इसी वजह से भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह इस तरह का बयान देकर के इटावा से चले गए. अब इस बयान के बाद में लगातार बड़े पैमाने पर चर्चाओं का बाजार भी गर्म पड़ा हुआ है. जिला पंचायत चुनाव की प्रक्रिया आज से शुरू हो गई है समाजवादी पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार अभिषेक यादव दूसरी बार इस पद के लिए अपना नामांकन दाखिल करेंगे जबकि भारतीय जनता पार्टी ने अभी तक अपने प्रत्याशी पद की घोषणा नहीं की है. नामांकन पत्रों की बिक्री 25 जून तक चलेगी 26 जून को नामांकन 29 जून को नाम वापसी और आवश्यक होने पर 3 जुलाई को मतदान कराया जाएगा. समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष गोपाल यादव का दावा है कि उनके पास जीत के लिए पर्याप्त संख्या बल है जब कि भाजपा के पास मात्र एक जिला पंचायत सदस्य है ऐसे मे भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ही बता सकते है कि उनके पास जीत का दावा करने का आधार क्या है ? उनका कहना है कि जो हालात है उनके मुताबिक तो भारतीय जनता पार्टी अपने उम्मीदवार तक को घोषित करने की रिथति मे नही है जीत की बात को बहुत दूर है.

1989 से इटावा जिला पंचायत अध्‍यक्ष सीट पर रहा है मुलायम पर‍िवार का कब्‍जा
1989 से इटावा जिला पंचायत अध्यक्ष सीट पर मुलायम परिवार का कब्जा बरकरार चला आ रहा है. इटावा की जिला पंचायत सीट पर वर्ष 1989 से समाजवादी पार्टी का कब्जा बरकरार है. पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सदस्य रामगोपाल यादव, प्रसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव और पूर्व सांसद राम सिंह शाक्य जिला परिषद अध्यक्ष के रूप में इस पद पर काबिज रहे. वर्ष 1995 में पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित की गई तो विधायक महेंद्र सिंह राजपूत अध्यक्ष बने। वर्ष 2000 में एससी वर्ग के लिए आरक्षित होने पर पूर्व सांसद प्रेमदास कठेरिया को मौका मिला. साल 2005 में पिछड़ा वर्ग महिला के आरक्षित होने पर सपा के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के भाई राजपाल सिंह की पत्नी प्रेमलता यादव अध्यक्ष बनीं. उनका कार्यकाल उस समय यादगार बन गया, जब वर्ष 2010 में यह पद सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित होने पर प्रदेश में बीएसपी की सरकार होने के बावजूद वो दूसरी बार अध्यक्ष बनीं. इसके बाद वर्ष 2015 में यह पद फिर से सामान्य रखा गया. तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के चचेरे भाई अभिषेक यादव इस पद पर आसीन हुए.

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