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मुआवजे के नाम पर मजाक, किसी को 23 तो किसी को 53 रुपए का चेक

यूपी सरकार ने प्रदेश के किसानों के साथ मुआवजे के नाम पर एक बार फिर मजाक किया है.

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यूपी सरकार ने प्रदेश के किसानों के साथ मुआवजे के नाम पर एक बार फिर मजाक किया है. चुनाव के दौरान भाजपा ने किसानों को एक लाख रुपए की कर्ज माफी का वादा किया था लेकिन कुछ किसानों की उम्मीद तब टूटी जब उन्हें 23 रुपए व 53 रुपए जैसे कर्ज माफी के प्रमाण पत्र दिए गए.

इटावा जनपद के जसवंत नगर तहसील के गांव कुरसैना के रहने वाले बलवीर पुत्र अतर सिंह बताते हैं कि मेरे पिता बहुत बीमार रहते हैं. उनका और मेरा खाता ज्वाइंट है. हमने किसान क्रेडिट कार्ड से अपनी खेती के लिए बीस हजार रुपए का कर्ज लिया था. भाजपा की सरकार बनते ही उम्मीदें थीं कि मेरा कर्जा माफ हो जाएगा.

मुझे इटावा के नुमाइश मैदान में बुलाया गया था कि भाजपा के मंत्री आ रहे हैं जो कि किसानों के कर्ज माफी के प्रमाण पत्र बांटेंगे. हम भी गए और हमने भी प्रमाण पत्र लिया लेकिन प्रमाण पत्र देखा तो हमारे तो होश उड़ गए. उसमें 23 रुपए 18 पैसे प्रिन्ट थे. हमने सोचा कि कहीं कोई गलती हो गई होगी लेकिन जब बैंक जाकर पता किया तो बैंक ने कह दिया कि यह जो सरकार ने माफ किया है वही हुआ है.



मेरे तो केवल 23 रुपए 18 पैसे माफ किए गए हैं. इटावा प्रमाण पत्र लेने जाने में ही पचास रुपए से अधिक खर्च हो गये थे और हम लोग मजदूर हैं तो वैसे ही एक दिन की मजदूरी भी मारी गई. गांव में जैसे ही आए तो लोगों ने पूछा कि कितना माफ हुआ. हमें तो बताने में शर्म आती है लोग मजाक उड़ाते हैं. शर्म की वजह से हम अब किसी से कुछ नहीं बता पाते हैं. सरकार से बहुत उम्मीदें थी हमारी सभी उम्मीदों पर पानी फिर गया है.
वहीं दूसरे गांव जसवंत नगर का भैंसरई गांव के अहिवरन भी यहीं बताते हैं कि हमने 44000 रुपए का कर्ज लिया था. सोचा था कि सरकार अब माफ कर देगी लेकिन जब हम भी सजधज के इटावा प्रमाण पत्र लेने गए तो 100 रुपए पूरे दिन में खर्च हुए. एक दिन का मेहताना भी गया और प्रमाण पत्र मिला केवल 53 रुपए का. पूरा गांव हम पर हंसता है और मजाक बनाता है कि हो गया कर्जा माफ. हम तो अब किसी से बात भी नही करते हैं बहुत बेइज्जती महसूस होती है.
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