योगी आदित्यनाथ का पूरा इंटरव्यू यहां पढ़ें

News18Hindi
Updated: September 16, 2017, 9:19 PM IST
योगी आदित्यनाथ का पूरा इंटरव्यू यहां पढ़ें
ईटीवी/न्यूज़18 को एक्सक्लूसिव इंटरव्यू देते यूपी के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ
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Updated: September 16, 2017, 9:19 PM IST
मनमोहन राय

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी सरकार के 6 महीने पूरे होने के मौके पर ईटीवी/न्यूज़18 को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में अपनी सरकार की उपलब्धियों से लेकर चुनौतियों तक पर बेबाकी से बात की. उनका पूरा इंटरव्यू यहां पढ़ें-

सवाल- आप गोरखपुर में इतने सालों से सांसद थे, एक महंत हैं और अब एकदम से उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री बन गए अचानक हुए इस बदलाव पर कैसा महसूस करते हैं?

जवाब – मैं पिछले पांच बार से गोरखपुर से सांसद हूं यह अचानक नहीं हुआ. पांच बार से सांसद के रूप में जनअपेक्षाओं पर खरा उतरने के साथ-साथ जो काम सार्वजनिक जीवन में हमने किए हैं, पार्टी, आदरणीय प्रधानमंत्रीजी और राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष ने उस पर मोहर लगाई है. यह मेरी परीक्षा है. 22 करोड़ जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए सूबे की कमान सौंपी है.

योगी आदित्‍यनाथ
योगी आदित्‍यनाथ


सवाल- बेहतर क्‍या लगता है महंत का जीवन या मुख्यमंत्री का कार्यकाल ?

जवाब – देखिए सोच का फर्क है. एक संत का जीवन भी लोक कल्‍याण के लिए है और राजनेता का जीवन भी इसी के लिए समर्पित होता है. यह अलग बात है कि आजादी के बाद से राजनीति को अधिकाधिक स्‍वार्थी बना दिया गया है.

राममनोहर लोहिया ने राजनीति और धर्म को एक दूसरे का पूरक बताया है. लोककल्‍याण के भाव को पूरा करने के लिए मेरा जीवन चाहे संत के रूप में या राजनेता के रूप में हो दोनों में ही समर्पित है.

सवाल- सरकार के छह महीने पूरे हो गए. इन दिनों में कोई एक बड़ी उपलब्धि?  

जवाब – हमने छह महीनों में जनता में विश्‍वास भरा है. यूपी का हर व्‍यक्ति अपने आप को सुरक्षित महसूस कर सकता है. प्रदेश में सुरक्षा का वातावरण बना है.

सवाल- प्रचंड बहुमत भाजपा को मिला है. जनता को आपसे उम्‍मीदें ज्‍यादा बढ़ गई हैं. आपको डर तो नहीं लगता कि इतनी आकांक्षाएं कैसे पूरी करें. आजकल जनता तुरंत काम मांगती है.

जवाब – हमने अपने कार्यक्रम तय किए हैं. किसान, गरीब, मजदूर और महिलाओं के लिए तत्‍काल रूप से योजनाएं लागू कर रहे हैं. जबकि कुछ दीर्घकालीन योजनाएं भी लागू की हैं. ये योजनाएं पार्टी पहले ही लोक कल्‍याण संकल्‍प पत्र के माध्‍यम से जनता के सामने रख चुकी है. इस पत्र को हमने पांच सालों में बांट लिया है. सूबे से जनता के मन से भय को समाप्‍त करना है.

इंसेफेलाइटिस पर बोलते हुए योगी आदित्‍यनाथ


सवाल- गोरखपुर आपकी कार्यस्‍थली है. बीआरडी मेडीकल कॉलेज में बच्‍चों की मौत हुई. आप सत्‍ता शीर्ष पर हैं, लेकिन इससे निपटने में सरकार को वक्‍त लगा. क्‍यों ?   

जवाब – गोरखपुर में इंसेफेलाइटिस से मौत पिछले 40 सालों से हो रही है. इस सच्‍चाई को मैं सड़क और संसद में लेकर गया. मौत दुखद है. इसमें राजनीति नहीं होनी चाहिए. लेकिन इस बार गोरखपुर में मौतों को मीडिया ने नकारात्‍मक रूप से उठाया. कहा गया 60 मौतें हुई लेकिन उस  दिन 11 मौतें हुई थीं.

पहली बार हुआ है कि यूपी में सरकार बनते ही हमने बैठक करके इंसेफेलाइटिस से पीडि़त जनपदों में 1 से लेकर 15 साल तक के 92 लाख बच्‍चों को टीकाकरण के साथ ही 20 अति संवेदनशील जिलों में पीडीयाट्रिक्‍स का 10-12 बैड का आईसीयू संचालित किए थे. वहीं पहली बार इंसेफेलाइटिस, वैक्‍टर बॉर्न और वाटर बॉर्न डिजीजेज के लिए मेडीकल स्‍टाफ को ट्रेनिंग दी.

पहली बार इंसेफेलाइटिस के लिए जिला अस्‍पतालों में पैरामेडीकल स्‍टाफ और डॉक्‍टर तैनात किए. पहली बार इंसेफेलाइटिस के आंकड़े इस साल कम थे. 2015 में 668, 2016 में 585 और इस साल 335 मौतें हुई हैं, इसके बावजूद ऑक्‍सीजन के नाम पर सनसनी फैलाई गई.

मौत पर राजनीति ठीक नहीं. कोर्ट में मामला है सब दूध का दूध और पानी का पानी होगा.

सवाल- आपको नहीं लगता कि कहीं न कहीं लोकल स्‍तर पर लापरवाही हुई.



जवाब – इस साल हर साल की तुलना में आधे आंकड़े हैं. 4-5 महीने की सरकार से आप इससे ज्‍यादा क्‍या उम्‍मीद कर सकते हैं. मैं विश्‍वास के साथ कहता हूं इसका समाधान होगा.

सवाल- प्रदेश में तमाम जगहों की समस्‍याओं से आप रूबरू हो चुके हैं. प्रदेश को कितना पीछे पाते हैं?

जवाब – प्रदेश आजादी के समय प्रतिव्यक्ति आय में पहले नंबर पर था. आज पीछे से तीसरे नंबर पर है. प्रदेश को पिछले 15 सालों के दौरान सरकारों के कामों, भ्रष्‍टाचार, जातिवाद और परिवारवाद ने बहुत पीछे धकेला है. हमारे सामने अब चुनौती है. लेकिन धीरे-धीरे कानून व्‍यवस्‍था सुधर रही है.

हमने माफिया पर नकेल कसनी शुरू की. अब ऐसे अपराधी या तो जेल में हैं या दूसरे प्रदेश में.

सवाल- 17 साल से यूपी में क्षेत्रीय पार्टियों की सरकार थी. राष्‍ट्रीय पार्टी और क्षेत्रीय पार्टियों की सरकार में कितना अंतर है.

जवाब – देखिए सपा-बसपा की कोई राजनीतिक सोच और लोककल्‍याणकारी एजेंडा नहीं है. एक संकीर्ण दायरे में कैद होकर इन्‍होंने प्रदेश को भ्रष्‍टाचार में डुबोया है. राजनीति का अपराधीकरण और अपराध का व्‍यवसायीकरण किया है. इनकी अब यहां कोई जरूरत नहीं है.

सवाल- गोरखपुर मामले में आप भावुक हो गए. एक साधु और नेता के बीच अंतर्विरोध कैसे संभालते  हैं?

जवाब- यह अंतर्विरोध नहीं है. एक संवदेनशील व्‍यक्ति ही इन संवेदनाओं को समझ सकता है.

YOGI ADITYANATH

सवाल- पिछले छह महीनों में क्राइम कम हुआ है लेकिन कुछ संप्रदायों में तनाव देखने को मिला है. ?

जवाब-  जिस प्रदेश में पांच साल में साढ़े 4 सौ से ज्‍यादा दंगे हुए. उस प्रदेश में 6 महीनों में कोई दंगा नहीं हुआ. सहारनपुर में कुछ तनाव था, लेकिन दंगा नहीं था. सरकार की कार्रवाई चल रही है.

सवाल- पुलिस अब थाने में दिखती है लेकिन एनकाउंटर बढ़े हैं. क्‍या पुलिस आक्रमणकारी रवैये की ओर है ?

जवाब- प्रशासन को कहा गया है, आम जनता के साथ संवेदनशील रहिए. जो कानून का सम्‍मान करे, कानून उसका सम्‍मान करे. अपराधी और गुंडों से कड़ाई से निपटा जाए.

सवाल- आपने कहा था अपराधी अपराध नहीं छोड़ेंगे तो ठोक दिए जाएंगे, क्‍या यह पॉलिसी चल रही है ?

जवाब- अपराधी गोली चलाएगा तो गोली का जवाब पुलिस गोली से देगी. पुलिस के जवान अच्‍छा काम कर रहे हैं. मैंने बधाई भी दी है.

सवाल- आप 16-18 घंटे काम करते हैं. क्‍या आपकी टीम, मंत्री इतनी मेहनत से लगे हैं?  

जवाब- हां लगे हैं. मैं अकेला नहीं लगा हूं. पूरा प्रशासन लगा है. लेकिन पुरानी कीचड़ को साफ करने में वक्‍त तो लगेगा.

सवाल- सरकार स्‍कूलों के पाठ्यक्रम में बदलाव चाहती है. आरोप लग रहा है कि सिलेबस को हिंदुत्‍ववादी किया जा रहा है ?

जवाब- शिक्षा के पाठ्यक्रम में बदलाव की आवश्‍यक है. यूपी का बच्‍चा किसी प्रतियोगी परीक्षा में शामिल हो सके इसकी तैयारी चल रही है. हमें लगता है राष्‍ट्रभक्ति और राष्‍ट्रप्रेम से ओतप्रोत शिक्षा हो. 1 लाख 58 हजार बेसिक शिक्षा से जुड़े स्‍कूल हैं. 1 हजार आदर्श विद्यालय बनाए हैं. हमने 30 बच्‍चों पर एक शिक्षक किया. स्‍कूल चलो अभियान चलाया. अभी हालात और सुधरेंगे.

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सवाल- ताजमहल पर बयान, कांवडि़यों  के लिए लाउडस्‍पीकर इस्‍तेमाल पर आपके बयान, क्‍या हिंदुत्‍व से प्रेरित हैं ?

जवाब- हिन्‍दुत्‍ववादी होना कट्टरवादी होना नहीं मानवतावादी होना है. मानवतावादी होना अपराध नहीं.

सवाल- लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ हों, अगर ऐसा हुआ तो डेढ़ साल के भीतर यूपी में फिर चुनाव होगा?

जवाब- इस देश में दो ही चीजें होती हैं, या तो चुनाव होता है या परीक्षाएं होती हैं. यह लोकतंत्र का उपहास है.  प्रधानमंत्रीजी ने एक साथ चुनावों के लिए कहा है, हम तैयार हैं. वहीं हमने शिक्षा विभाग से कहा है कि 15 दिन में प्रवेश परीक्षाएं करिए और एक महीने में परीक्षाएं और परिणाम लाइए. ऐसे ही चुनाव का हाल है. अभी हम चुने गए हैं फिर निकाय चुनाव होने हैं. इसी प्रकार काम बाधित होता रहता है.

क्‍या 5 साल हम सिर्फ चुनाव के लिए बैठे  हैं ? अगर एक साथ चुनाव होंगे तो निश्चित ही सरकारें काम करेंगी और परिणाम सामने आएंगे.

सवाल- आगे के साढ़े 4 सालों में क्‍या कदम उठाएगी, ताक‍ि युवाओं को रोजगार मिले?  

जवाब- हमारी पहल शुरू हो चुकी है. हम लोग छह लाख से अधिक युवाओं को कौशल विकास में पारंगत कर रोजगार से जोड़ चुके हैं. नई औद्यौगिक नीति लागू होने जा रही है.

सवाल- खाली वक्‍त में क्‍या करते हैं?

जवाब- मेरे पास खाली समय नहीं. फिर भी मिलता है तो माला जपते हैं. स्‍वाध्‍याय करते हैं. अभी प्रदेश के विकास का काम बाकी है, उस पर काम करते हैं.

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First published: September 16, 2017
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