26 साल तक बना रहा फर्जी साहब! भेद खुलने पर रिटायरमेंट से पहले DM ने मूल पद पर भेजा
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26 साल तक बना रहा फर्जी साहब! भेद खुलने पर रिटायरमेंट से पहले DM ने मूल पद पर भेजा
फर्जीवाड़े का यह मामला सुर्खियों में आया तो प्रकरण की जांच कराई गई. अभी भी यह मामला सीबीआई की अदालत में विचाराधीन है

नियमों के विरुद्ध प्रमोशन (Promotion) लेकर साहब बने मोहम्मद शफी उल्लाह ने गोरखपुर (Gorakhpur) में जमीनों को लेकर बड़ा खेल किया. उसने जनपद के बहरामपुर गांव की तमाम कीमती जमीनों को लेकर अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर विधि विरुद्ध आदेश पारित किया

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  • Last Updated: September 13, 2020, 8:16 PM IST
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अयोध्या. कहावत है कि सरकार और साहबान के खेल निराले होते हैं. साहब और सरकार सर्वशक्तिमान हैं- वो जो चाहे, जैसा चाहे, वैसा करें. ऐसा ही एक मामला उत्तर प्रदेश के अयोध्या (Ayodhya) में सामने आया है. यहां एक शख्स सरकारी आदेश और नियमों-कानूनों को दरकिनार कर साहब बन गया और 27 वर्षों तक साहबगीरी करता रहा. फर्जी साहिबी की उसकी यह कारस्तानी देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई (CBI) की निगाह में आने और आरोपी बनाए जाने के बावजूद नहीं छिनी. मगर अब योगी सरकार (Yogi Government) के ड्रीम प्रोजेक्ट भगवान राम (Lord Ram) की सबसे ऊंची विशालकाय प्रतिमा के लिए शुरुआती जमीन अधिग्रहण (Land Acquisition) की कवायद के दौरान निशाने पर आए इस शख्स को रिटायरमेंट के एक साल पूर्व मूल पद पर वापस किया गया है.

जानकारी के मुताबिक अयोध्या जनपद में स्थानापन्न सर्वे नायब तहसीलदार के पद पर तैनात रहे मोहम्मद शफी उल्लाह की सरकारी सेवक के रूप में तैनाती सर्वे लेखपाल के पद पर हुई थी. बाद में उसको गोरखपुर में तैनाती के दौरान तत्कालीन जिलाधिकारी की ओर से नियम-कायदों को दरकिनार कर स्थाई व्यवस्था के तहत सर्वे कानूनगो के पद पर प्रमोशन दे दी गई और पदभार भी सौंप दिया गया. अपने प्रमोशन को आधार बनाकर उसने वर्ष 1997 में स्थानापन्न सर्वे नायब तहसीलदार के पद पर तरक्की हासिल कर ली.

कीमती जमीनों को हथियाने के खेल में मिला था नियम विरुद्ध प्रमोशन



बताया जाता है कि गोरखपुर में कीमती जमीनों को हथियाने और करोड़ों के वारे-न्यारे के खेल में मोहम्मद सफी उल्लाह को यहां के तत्कालीन जिलाधिकारी ने 28 मई, 1993 के आदेश से स्थानीय व्यवस्था में स्थानापन्न सर्वे कानूनगो के पद पर प्रमोशन देकर पदभार सौंप दिया था. आदेश में लिखा कि यह नियुक्ति पूर्णतः अल्पकालिक है और बिना पूर्व सूचना के निरस्त (रद्द) की जा सकती है. बावजूद इसके वर्ष 1997 में बिना नियमित सर्वे कानूनगो नियुक्त हुए शफी उल्लाह को वर्ष 1997 में स्थानापन्न सर्वे नायब तहसीलदार के पद पर प्रोन्नत कर दिया गया.
नियमों के विरुद्ध प्रमोशन लेकर साहब बने मोहम्मद शफी उल्लाह ने गोरखपुर में जमीनों को लेकर बड़ा खेल किया. उसने जनपद के बहरामपुर गांव की तमाम कीमती जमीनों को लेकर अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर विधि विरुद्ध आदेश पारित किया. मामला सुर्खियों में आया तो प्रकरण की जांच कराई गई और अभी भी यह मामला सीबीआई की अदालत में विचाराधीन है. (कृष्णा शुक्ला की रिपोर्ट)
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