बाबरी मस्जिद मामला: सुनवाई पूरी करने को विशेष जज ने कोर्ट से मांगा 6 माह का समय

अयोध्या में दिसंबर 1992 में विवादास्पद बाबरी मस्जिद ढांचा गिराए जाने वाले मुकदमे की सुनवाई कर रहे विशेष न्यायाधीश ने सुनवाई पूरी करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से 6 महीने का समय और उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है.

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Updated: July 15, 2019, 11:15 PM IST
बाबरी मस्जिद मामला: सुनवाई पूरी करने को विशेष जज ने कोर्ट से मांगा 6 माह का समय
बाबरी मस्जिद मामला: सुनवाई पूरी करने को विशेष जज ने कोर्ट से मांगा 6 माह का समय (फाइल फोटो).
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Updated: July 15, 2019, 11:15 PM IST
अयोध्या में दिसंबर 1992 में विवादास्पद बाबरी मस्जिद ढांचा गिराए जाने वाले मुकदमे की सुनवाई कर रहे विशेष न्यायाधीश ने सुनवाई पूरी करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से 6 महीने का समय और उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है. विशेष न्यायाधीश ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में 6 महीने और समय दिए जाने के लिए एक आवेदन दायर किया. इस मामले में भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी, डॉ. मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती और कई अन्य नेताओं पर मुकदमा चल रहा है.

लखनऊ स्थित विशेष न्यायाधीश ने 25 मई को शीर्ष अदालत को एक पत्र लिखकर सूचित किया है कि वह 30 सितंबर 2019 को सेवानिवृत्त हो रहे हैं. इस मामले में शीर्ष अदालत ने अपने 19 अप्रैल 2017 के आदेश में आडवाणी, जोशी और उमा भारती के अलावा भाजपा के पूर्व सांसद विनय कटियार और साध्वी ऋतंबरा के खिलाफ भी आपराधिक साजिश के आरोप शामिल किए थे. इस मामले में नामित तीन अन्य अतिविशिष्ट व्यक्तियों का निधन हो चुका है.

कल्याण सिंह को राज्यपाल रहने तक छूट प्राप्त है
शीर्ष अदालत ने कहा था कि कल्याण सिंह जो इस समय राजस्थान के राज्यपाल हैं, को संविधान के तहत इस पद पर रहने तक छूट प्राप्त है. कल्याण सिंह के कार्यकाल के दौरान ही दिसंबर 1992 में इस विवादित ढांचे को गिराया गया था. न्यायमूर्ति आर एफ नरिमन और न्यायमूर्ति सूर्य कांत की पीठ के समक्ष यह मामला सोमवार को विचार के लिए सूचीबद्ध था. पीठ ने कोई ऐसा रास्ता निकालने में उत्तर प्रदेश सरकार से मदद चाही है जिससे विशेष न्यायाधीश द्वारा इस मामले में फैसला सुनाये जाने तक उनका कार्यकाल बढ़ाया जा सके. राज्य सरकार को 19 जुलाई को न्यायालय को इस बारे में अवगत कराना है.

इसी साल 30 सितंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं विशेष न्यायाधीश
पीठ ने कहा, “दो साल तक लगभग रोजाना सुनवाई करने के बाद विशेष न्यायाधीश अब इस मामले की सुनवाई पूरी करने के करीब हैं और वह इसे पूरा करने तथा फैसला सुनाने के लिए छह महीने से थोड़ा अधिक समय चाहते हैं.” पीठ ने कहा, “हालांकि, 25 मई, 2019 को हमें लिखे गये पत्र में उन्होंने संकेत दिया है कि वह 30 सितंबर 2019 को सेवानिवृत्त हो रहे हैं. हमारी राय है कि विशेष न्यायाधीश के लिए यह महत्वपूर्ण होगा कि इस कार्रवाई को पूरा करके अपना फैसला सुनाएं. सारे तथ्यों और परिस्थितियों के मद्देनजर हम राज्य सरकार से इस मामले में हमारी मदद करने का अनुरोध करते हैं. शुक्रवार को इसे सूचीबद्ध किया जाए.”

अनुच्छेद 142 के अधिकार का प्रयोग करके बढ़ाया जा सकता है न्यायाधीश का कार्यकाल
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पीठ ने उप्र सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ऐश्वर्या भाटी से कहा कि इसका रास्ता खोजें. पीठ ने नियमों का भी हवाला दिया जिसके तहत न्यायाधीश का कार्यकाल बढ़ाया जा सकता है. पीठ ने कहा कि आप कोई रास्ता खोजें और यदि संभव हुआ तो हम संविधान के अनुच्छेद 142 में प्रदत्त अधिकार का इस्तेमाल करके उनका कार्यकाल बढ़ा सकते हैं. शीर्ष अदालत ने 19 अप्रैल, 2017 से राजनीतिक रूप से संवेदनशील इस मामले की रोजाना सुनवाई करके इसे दो साल के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया था.

लखनऊ में स्थानांतरित कर दिया गया था मामला
न्यायालय ने इस मध्यकालीन संरचना को गिराये जाने की घटना को अपराध करार देते हुए कहा था कि इसने संविधान के पंथनिरपेक्ष ताने-बाने को चरमरा दिया. न्यायालय ने सीबीआई को इस मामले में अतिविशिष्ट आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश के आरोप बहाल करने की अनुमति प्रदान की थी. शीर्ष अदालत ने आडवाणी और पांच अन्य के खिलाफ रायबरेली के विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में लंबित कार्यवाही लखनऊ में अयोध्या मामले की सुनवाई कर रहे अतिरिक्त विशेष न्यायाधीश की अदालत में स्थानांतरित कर दी थी.

अतिरिक्त आरोप निर्धारित करेगी अदालत
न्यायालय ने कहा था कि सत्र अदालत सीबीआई द्वारा दायर संयुक्त आरोप पत्र में दर्ज प्रावधानों के अलावा भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी तथा अन्य धाराओं के तहत अतिरिक्त आरोप निर्धारित करेगी. जांच ब्यूरो ने चंपत राय बंसल, सतीश प्रधान, धर्म दास, महंत नृत्य गोपाल दास, महामण्डलेश्वर जगदीश मुनि, राम बिलास वेदांती, बैकुण्ठ लाल शर्मा और सतीश चंद्र नागर के खिलाफ संयुक्त आरोप पत्र दाखिल किया था.

कुछ गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित करेगा अभियोजन पक्ष
शीर्ष अदालत ने कहा था कि साक्ष्य दर्ज करने के लिए निर्धारित तारीख पर सीबीआई यह सुनिश्चित करेगी कि अभियोजन के शेष गवाहों में से कुछ उपस्थित रहें ताकि गवाहों की अनुपस्थिति की वजह से सुनवाई स्थगित नहीं करनी पड़े. शीर्ष अदालत ने भाजपा नेता आडवाणी और अन्य आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश के आरोप हटाने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 12 फरवरी, 2001 के फैसले को त्रुटिपूर्ण करार दिया था.

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First published: July 15, 2019, 11:10 PM IST
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