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कौन था वो काला बंदर जो अयोध्या पर फैसले के दिन हर जगह नजर आया

1 फरवरी 1986 को आम लोगों के साथ-साथ देश और दुनिया भर के मीडिया की नज़र फैजाबाद जिला अदालत के फैसले पर टिकी थी. सुबह से लोग अदालत में फैसला सुनने के लिए खड़े थे. अदालत पुलिस प्रशासन और आम लोगों से खचाखच भरी थी, लेकिन सबकी नज़र इन सबको छोड़ एक बंदर पर टिकी थी.

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अयोध्या (Ayodhya) को भगवान राम के नाम से जाना जाता है. ऐसे में यहां भक्ति की बात होनी चाहिए, पर अब भक्ति से ज्यादा अयोध्या विवाद (Ayodhya Case) के कारण मशहूर है.अयोध्या के इतिहास को देखें तो आजादी के बाद तीन अहम पड़ाव हैं. पहला, 1949 जब विवादित स्थल पर मूर्तियां रखी गईं, दूसरा, 1986 जब विवादित स्थल का ताला खोला गया और तीसरा 1992 जब विवादित स्थल गिरा दिया गया. 1992 के बाद की कहानी सबको पता है, लेकिन 1949 से लेकर अब तक ऐसा काफी कुछ हुआ है जो आपको जानना चाहिए. अयोध्या की अनसुनी कहानियों को आप तक पहुंचाने के लिए News18 Hindi एक स्पेशल सीरीज लाया है.

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इस सीरीज़ की तीसरी कहानी उस बंदर से जुड़ी हुई है जो अयोध्या मामले की सुनवाई करते वक्त अदालत में मौजूद था. इस बंदर के अदालत में मौजूद होने के पीछे क्या रहस्य था, पढ़िए इस कहानी में...


1 फरवरी 1986 को आम लोगों के साथ-साथ देश और दुनिया भर के मीडिया की नज़र फैजाबाद जिला अदालत के फैसले पर टिकी थी. सुबह से लोग अदालत में फैसला सुनने के लिए खड़े थे. अदालत पुलिस प्रशासन और आम लोगों से खचाखच भरी थी, लेकिन सबकी नज़र इन सबको छोड़ एक बंदर पर टिकी थी. इसकी वजह यह थी कि अदालत में सुनवाई शुरू होने से लेकर जिला जज पांडे के घर जाने तक वो बंदर हर जगह मौजूद था.



 

फैसले वाले दिन जिला जज केएम पांडे के साथ करीब-करीब पूरा दिन बिताने वाले फैजाबाद के तत्कालीन सीजेएम सी डी राय बताते हैं कि फैसले वाले दिन सुनवाई शुरू होने से पहले एक बंदर अदालत में लगने वाले तिरंगे झडे को पकड़े खड़ा रहा. जज साहब जब अदालत में दाखिल हुए तो उनकी नज़र उस बंदर पर पड़ी और उसे भगाने की कोशिश भी हुई, लेकिन वो बंदर वहीं झंडा पकड़े खड़ा रहा.

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शाम को 4.40 बजे जब जज साहब ने विवादित स्थल का ताला खोलने का आदेश पारित किया, उसके बाद सबने उस बंदर को वहां से जाते हुए देखा. अदालत के फैसले के बाद जज साहब, जिला प्रशासन, पुलिस और लोग वहां से चले गए लेकिन, किसी ने भी उस बंदर की तरफ ना तो ध्यान दिया ना ही ध्यान देने की जरूरत समझी.

सीजेएम सी डी राय बताते हैं कि जैसे ही जिला जज पांडे अपने घर पहुंचे वो बंदर उन्हें उनके घर के बरामदे में बैठा मिला. ये देखने के बाद जज पांडे और उनको उनके घर पर सुरक्षा सहित पहुंचाने वाले लोगों के आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा. साथ में गए लोगों ने उस बंदर के बारे में कई तरह की बातें बनानी शुरू कर दीं. किसी ने उसे हनुमान जी का रूप बताया तो किसी ने उसे भगवान राम का दूत, लेकिन पांडे जी के घर पहुंचने के बाद वो बंदर वहां से चला गया और दुबारा कभी भी किसी को नहीं दिखा. हालांकि, स्थानीय लोग अभी भी इस बात को मानते हैं कि वो बंदर जज साहब को सुरक्षित देखकर ही वापस गया.

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