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अयोध्याः किसने बिगाड़ी मंदिर बनाने की योजना?

इस सीरीज़ की 12वीं कहानी में पढ़िए कि हिंदू महासभा के अध्यक्ष मंहत अवैद्यनाथ और मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह के बीच बनी सहमति के बाद किसने मंदिर बनाने की योजना पर पानी फेर दिया.

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अयोध्या को भगवान राम के नाम से जाना जाता है. ऐसे में यहां भक्ति की बात होनी चाहिए, पर अब भक्ति से ज्यादा अयोध्या विवाद के कारण मशहूर है. इस शहर में आमतौर पर सब कुछ शांत रहता है. साल भर श्रद्धालु आते रहते हैं, राम की बात होती है, लेकिन 6 दिसंबर आते-आते शहर का माहौल गर्म होने लगता है, श्रद्धालु कम होने लगते हैं और नेता बढ़ने लगते हैं. धर्म से ज्यादा चर्चा विवाद की होने लगती है. इस साल इस तादाद और चर्चा दोनों में तेजी आई है. हो भी क्यों नहीं, आखिर यह चुनावी साल जो है.

न्यूज़18 हिंदी एक सीरीज़ की शक्ल में अयोध्या की अनसुनी कहानियां लेकर आ रहा है. इसमें 6 दिसंबर तक हम आपको रोज एक ऐसी नई कहानी सुनाएंगे, जो आपने पहले कहीं पढ़ी या सुनी नहीं होगी. हम इन कहानियों के अहम किरदारों के बारे में भी बताएंगे.

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अयोध्या के इतिहास को देखें तो आजादी के बाद तीन अहम पड़ाव हैं. पहला, 1949 जब विवादित स्थल पर मूर्तियां रखी गईं, दूसरा, 1986 जब विवादित स्थल का ताला खोला गया और तीसरा 1992 जब विवादित स्थल गिरा दिया गया. 1992 के बाद की कहानी सबको पता है, लेकिन 1949 से लेकर अब तक ऐसा काफी कुछ हुआ है जो आपको जानना चाहिए.

इस सीरीज़ की 12वीं कहानी में पढ़िए कि हिंदू महासभा के अध्यक्ष मंहत अवैद्यनाथ और मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह के बीच बनी सहमति के बाद किसने मंदिर बनाने की योजना पर पानी फेर दिया...

अयोध्या में राममंदिर निर्माण के लिए हिंदू महासभा के अध्यक्ष मंहत अवैद्यनाथ और मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह के बीच सहमति हो गई थी.

बैठकों के बाद अयोध्या में स्थानीय स्तर पर भी कोशिश तेज हो गई थी. लगातार बैठकों का दौर शुरू हो गया था. जनमोर्चा के संपादक और वरिष्ठ पत्रकार शीतला सिंह बताते हैं कि मुस्लिम समुदाय ने हिंदुओं को मंदिर के लिए जगह देने के लिए सिर्फ स्थानीय लोगों को बातचीत में शामिल करने की शर्त रखी जो महंत अवैद्यनाथ और मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह दोनों को मंजूर थी.

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इसके बाद विश्व हिंदू परिषद के नेताओं, हिंदू महासभा के नेताओं और बाबरी एक्शन कमेटी के लोगों की ताबड़तोड़ दर्जनों बैठकें हुईं और बैठकों में अयोध्या में मंदिर और मस्जिद दोनों के निर्माण के लिए एक समिति बनाने पर फैसला हो गया. दोनों पक्षों की ओर से इस बात पर सहमित बन गई कि अयोध्या में विवादित स्थल पर भगवान राम का मंदिर ओर पास में ही मस्जिद का निर्माण कराया जाए.

शीतला सिंह बताते हैं कि पहले से तय फॉर्मूले के मुताबिक, हिंदुओं की ओर से पांच नाम समिति में रखे जाने थे और मुस्लिम समुदाय की ओर से भी स्थानीय पांच लोगों का नाम तय होना था. मुस्लिम समाज ने मुहम्मद शहाबुद्दीन, मुहम्मद कोया समेत पांच नामों की लिस्ट शीतला सिंह को दे दी.

हिंदुओं की ओर से पांच नाम तय करने के लिए लखनऊ में स्थानीय व्यापारी और हिन्दू महासभा के सक्रिय सदस्य लक्ष्मीकांत झुनझुनवाला के घर 25 दिसंबर 1987 को एक बैठक बुलाई गई. बैठक में पांच नामों पर फैसला होना था, लेकिन विश्व हिंदू परिषद ने इस बैठक में सिर्फ स्थानीय लोगों के कमेटी में शामिल करने के प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया और मामला अटक गया.

वरिष्ठ पत्रकार शीतला सिंह के इस दावे की तस्दीक करते हुए मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह के संयुक्त सचिव रहे आईएएस अधिकारी एसपी सिंह बताते हैं कि सिर्फ विश्व हिंदू परिषद के अड़ियल रवैये के कारण ही अब तक अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण नहीं हो सका.

यहां पढ़ें इस सीरीज की अन्य कहानियां

भाग 1- राजीव गांधी नहीं, इस शख्स ने खुलवाया था ताला
भाग 2- एक साधु की ललकार सुन मंदिर मामले पर सुनवाई को मजबूर हुए थे फैजाबाद के जिला जज
भाग 3- कौन था वो काला बंदर जो अयोध्या पर फैसले के दिन हर जगह नजर आया
भाग 4- अयोध्या पर फैसला देने वाले जज साहब की जान को किससे था खतरा?
भाग 5- अयोध्या के अनसुने किस्सेः मुलायम ने कैसे रोका जिला जज पांडे का प्रमोशन?
भाग 6- अयोध्या: रिटायरमेंट के बाद किसने कराया जज साहब का प्रमोशन
भाग 7- अयोध्या: मंदिर में ताला किसने लगाया?
भाग 8- अयोध्या: किसने दिया पूजा शुरू करने का आदेश?
भाग 9- नेहरू को अयोध्या आने से किसने रोका?


भाग 10- अंग्रेजों ने नहीं निकलने दिया था अयोध्या मसले का हल, ऐसे रोका मंदिर निर्माण

भाग 11- अयोध्या: CM वीर बहादुर और महंत अवैद्यनाथ की सीक्रेट बैठक में क्या हुआ था तय?


 

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