क्या 6 दिसंबर की योजना पहले से तैयार थी?

इस सीरीज़ की 15वीं कहानी में इस बात का जिक्र किया गया है कि क्या 6 दिसंबर को विवादित ढांचा गिराने की योजना पहले से तैयार की जा चुकी थी...

Anil Rai | News18Hindi
Updated: December 6, 2018, 7:41 AM IST
Anil Rai
Anil Rai | News18Hindi
Updated: December 6, 2018, 7:41 AM IST
अयोध्या को भगवान राम के नाम से जाना जाता है. ऐसे में यहां भक्ति की बात होनी चाहिए, पर अब भक्ति से ज्यादा अयोध्या विवाद के कारण मशहूर है. इस शहर में आमतौर पर सब कुछ शांत रहता है. साल भर श्रद्धालु आते रहते हैं, राम की बात होती है, लेकिन 6 दिसंबर आते-आते शहर का माहौल गर्म होने लगता है, श्रद्धालु कम होने लगते हैं और नेता बढ़ने लगते हैं. धर्म से ज्यादा चर्चा विवाद की होने लगती है. इस साल इस तादाद और चर्चा दोनों में तेजी आई है. हो भी क्यों नहीं, आखिर यह चुनावी साल जो है.

न्यूज़18 हिंदी एक सीरीज़ की शक्ल में अयोध्या की अनसुनी कहानियां लेकर आ रहा है. इसमें 6 दिसंबर तक हम आपको रोज एक ऐसी नई कहानी सुनाएंगे, जो आपने पहले कहीं पढ़ी या सुनी नहीं होगी. हम इन कहानियों के अहम किरदारों के बारे में भी बताएंगे.

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अयोध्या के इतिहास को देखें तो आजादी के बाद तीन अहम पड़ाव हैं. पहला, 1949 जब विवादित स्थल पर मूर्तियां रखी गईं, दूसरा, 1986 जब विवादित स्थल का ताला खोला गया और तीसरा 1992 जब विवादित स्थल गिरा दिया गया. 1992 के बाद की कहानी सबको पता है, लेकिन 1949 से लेकर अब तक ऐसा काफी कुछ हुआ है जो आपको जानना चाहिए.

इस सीरीज़ की 15वीं कहानी में इस बात का जिक्र किया गया है कि क्या 6 दिसंबर को विवादित ढांचा गिराने की योजना पहले से तैयार की जा चुकी थी...



30 अक्टूबर 1990 को अयोध्या में कारसेवकों पर गोली चलाए जाने के बाद कारसेवा भले ही स्थगित कर दी गई हो, लेकिन आंदोलन से जुड़े लोग अभी भी आंदोलन के जरिए अयोध्या में राम मंदिर बनाने पर अड़े हुए थे. बिहार में आडवाणी की गिरफ्तारी के बाद बीजेपी ने जनता दल सरकार से समर्थन वापस ले लिया और चंद्रशेखर कांग्रेस के समर्थन से प्रधानमंत्री बने. उत्तर प्रदेश की मुलायम सरकार भी कांग्रेस के समर्थन से बच गई, लेकिन ये प्रयोग लंबा नहीं चला.
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देश में आम चुनावों के साथ उत्तर प्रदेश में भी विधानसभा के चुनाव हुए. राजीव गांधी की चुनाव के दौरान हत्या के कारण कांग्रेस के प्रति उपजी सहानुभूति के चलते आम चुनावों में बीजेपी को बहुत फायदा नहीं हुआ, लेकिन उत्तर प्रदेश में बीजेपी की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी. ऐसे में मंदिर निर्माण की राह देख रहे लोगों में उम्मीद की नई किरण जगी और कारसेवा की नई तारीख तय की गई 6 दिसंबर 1992.

कारसेवा समिति के अध्यक्ष जगतगुरु शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती बताते हैं कि 6 दिसबंर की कारसेवा दिल्ली सरकार पर सिर्फ दबाव बनाने के लिए की गई थी और उनकी योजना में कहीं भी ये नहीं था कि विवादित स्थल का ढांचा तोड़ दिया जाए.

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कुछ इसी तरह का हलफनामा सरकार ने कोर्ट में भी दिया. उत्तर प्रदेश की कल्याण सिंह सरकार ने यही भरोसा दिल्ली की सरकार को दिया, लेकिन 6 दिसंबर को अपेक्षा से ज्यादा भीड़ इकठ्ठा हुई और कारसेवा की कमान संभाल रहे कई नेताओं ने इरादा बदल दिया. ऐसे समय में शांतिपूर्ण कारसेवा का समर्थन करने वालों की संख्या इतनी कम रह गई की वे चाहकर भी अपनी बात नहीं कह सके.

सरकारी एजेंसियों ने सरकार को समय रहते अयोध्या में हुए इस बदलाव के बारे में सचेत कर दिया था, लेकिन राम मंदिर के नाम पर सरकार में आए कल्याण सिंह के पास बैकफुट पर जाने का रास्ता नहीं बचा था. ऐसे में कल्याण सिंह ने भी वही किया जो भीड़ चाहती थी और विवादित ढांचा गिरा दिया गया.

यहां पढ़ें इस सीरीज की अन्य कहानियांः

भाग 1- राजीव गांधी नहीं, इस शख्स ने खुलवाया था ताला
भाग 2- एक साधु की ललकार सुन मंदिर मामले पर सुनवाई को मजबूर हुए फैजाबाद के जज
भाग 3- कौन था वो काला बंदर जो अयोध्या पर फैसले के दिन हर जगह नजर आया
भाग 4- अयोध्या पर फैसला देने वाले जज साहब की जान को किससे था खतरा?
भाग 5- अयोध्या के अनसुने किस्सेः मुलायम ने कैसे रोका जिला जज पांडे का प्रमोशन?
भाग 6- अयोध्या: रिटायरमेंट के बाद किसने कराया जज साहब का प्रमोशन
भाग 7- अयोध्या: मंदिर में ताला किसने लगाया?
भाग 8- अयोध्या: किसने दिया पूजा शुरू करने का आदेश?
भाग 9- नेहरू को अयोध्या आने से किसने रोका?

भाग 10- अंग्रेजों ने नहीं निकलने दिया था अयोध्या मसले का हल, ऐसे रोका मंदिर निर्माण
भाग 11- अयोध्या: CM वीर बहादुर और महंत अवैद्यनाथ की सीक्रेट बैठक में क्या हुआ था तय
भाग 12 - अयोध्याः किसने बिगाड़ी मंदिर बनाने की योजना?
भाग 13- शिलान्यास के बाद भी क्यों नहीं बना राम मंदिर?
भाग 14- 1990 में मुलायम सिंह यादव ने क्यों चलवाई थी गोली?
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