नियम हुए सख्त, फिर भी ऐसे बन रहे जुगाड़ वाले ड्राइविंग लाइसेंस

नासिर हुसैन | News18Hindi
Updated: July 10, 2019, 4:50 PM IST
नियम हुए सख्त, फिर भी ऐसे बन रहे जुगाड़ वाले ड्राइविंग लाइसेंस
सांकेतिक फोटो.

मुंबई हमले के आरोपी अज़मल कसाब के पास देश में बना ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) था. उसका यह लाइसेंस आगरा, यूपी से बना था. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने सदन में चर्चा के दौरान खुलासा किया कि देश में 30 प्रतिशत डीएल फर्जी हैं.

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मुंबई हमले के आरोपी अज़मल कसाब के पास देश में बना ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) था. उसका यह लाइसेंस आगरा, यूपी से बना था. दिल्ली में हुए कॉमनवेल्थ खेलों के दौरान दिल्ली पुलिस और परिवहन विभाग में बड़ी संख्या में ड्राइवरों की भर्ती हुई थी. बाद में जांच के दौरान पता चला कि ज्यादातर भर्तियां फर्जी लाइसेंस के आधार पर हुई थीं. दो दिन पहले केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने सदन में चर्चा के दौरान खुलासा किया कि देश में 30 प्रतिशत डीएल फर्जी हैं.

पिछले 10 साल की बात करें तो डीएल के फर्जीवाड़े पर रोक लगाने के लिए सरकार कई सख्त कदम उठा चुकी है. डीएल में बायोमेट्रिक, ऑनलाइन टेस्ट, डीएल के डाटा का डिजिटिलाइजेशन कर चुकी है. इसके बाद भी फर्जी डीएल बनने और जुगाड़ से डीएल बनवाने के मामले सामने आ रहे हैं.

ऑनलाइन टेस्ट किया गया अनिवार्य
कानपुर में रीजनल ट्रांसपोर्ट अधिकारी (आरटीओ) संजय सिंह बताते हैं, “डीएल बनवाने के दौरान हर तरीके के फर्जीवाड़े को रोकने के लिए सरकार ने बायोमेट्रिक को अनिवार्य कर दिया है. आवेदक को आफिस आकर अंगूठे और आंखों को स्कैन कराना होगा. आटीओ आफिस में बने टेस्ट ट्रैक पर वाहन चलाकर दिखाना होगा. ऑनलाइन टेस्ट भी शुरू कर दिया गया है."

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संजय सिंह ने कहा, ''डीएल के साथ जो दस्तावेज लगाए गए हैं उनका वैरीफिकेशन होगा. साथ ही स्मार्ट कार्ड को ऐसा बनाया गया है कि जब आपका चालान कटेगा तो उसकी एंट्री कार्ड में हो जाएगी. जब आपके तय संख्या से ज्यादा चालान हो जाएंगे तो आपका डीएल खुद ही कैंसिल हो जाएगा. एक देश में एक लाइसेंस योजना से भी फर्जीवाड़े पर रोक लगी है.”

दलाल और कर्मचारियों की मिलीभगत
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वहीं परिवहन विभाग से रिटायर्ड ओपी सिंह बताते हैं, “यह अच्छी बात है कि सरकार ने बीते कई सालों में कई नए नियम डीएल बनवाने के लिए लागू किए हैं. लेकिन किसी भी आरटीओ आफिस के बाहर बैठे दलाल और कर्मचारियों की मिलीभगत से आज भी जुगाड़ वाले डीएल बन रहे हैं. होता बस इतना है कि डीएल बनवाने के लिए जो दस्तावेज लगाए जाते हैं उसकी फोटोकॉपी में हेरफेर कर दिया जाता है. बाकी का काम कर्मचारी कर देता है. 300 से 400 रुपये में बनने वाले रबड़ के अंगूठे को बायोमीट्रिक में लगा दिया जाता है. वाहन चलाने का टेस्ट देने के दौरान कर्मचारी नियमों की अनदेखी कर देता है.”

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First published: July 10, 2019, 4:18 PM IST
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