क्‍या किसानों की 60 साल की कवायद लाएगी रंग?

News18 Uttar Pradesh
Updated: June 29, 2019, 12:28 PM IST

जमीन के मालिकाना हक के लिए साठ साल से भटक रहे हैं 640 किसान. झांसी के बबीना कस्बे में भारत- पाकिस्तान युद्द के दौरान गोला बारूद को हिफाजत से रखने के लिए सैकड़ों हेक्टेयर किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया था.

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उत्‍तर प्रदेश के झांसी में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जहां जमीन का मालिकाना हक हासिल करने की आस में किसानों का साठ साल से भी ज्यादा का समय बीत गया. हालात ऐसे हैं कि पुनर्वास की जमीन मिलने के बाद भी 640 किसान और उनके परिजन सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने के लिए मजबूर हैं और हर तरफ से आश्‍वासन तो मिल रहे हैं, लेकिन मालिकाना हक की बात बेमानी हो गई है.

न्‍यूज़ 18 के सामने छलका किसानों का दर्द
झांसी कलेक्ट्रेट में डीएम की चौखट के सामने जमीन पर बैठे अन्नदाताओं ने न्यूज 18 से अपना दर्द जताते हुए कहा कि बबीना कस्बे में भारत- पाकिस्तान युद्द के दौरान गोला बारूद को हिफाजत से रखने के लिए सैकड़ों हेक्टेयर किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया था. जबकि इसके बदले में किसानों को सैन्य अधिग्रहण की जमीन से हटाकर पुनर्वास की जमीन दी थी.

किसानों ने आरोप लगाते हुए कहा कि हजारों बार प्रशासनिक अधिकारियों के कार्यालयों पर जाकर पुनर्वास की जमीन पर मालिकाना हक दिलवाने की गुहार लगाई, लेकिन अभी तक कोई कामयाबी नहीं मिली है. जबकि जमीन के मालिकाना हक के लिए कई बार किसान जेल भी गए.

क्‍या खत्‍म होगी कवायद?
पिछले साठ साल से किसानों और उनके परिजनों की जमीन के मालिकाना हक वाली कवायद रंग लाएगी या नहीं यह तो वक्‍त की बताएगा. हालांकि डीम शिव सहाय अवस्‍थी ने न्‍यूज़ 18 से बातचीत के दौरान कहा है कि तीन में दिन में किसानों की जायज मांग को पूरा कर लिया जाएगा.उम्‍मीद है कि किसानों की साठ साल की कवायद खत्‍म हो जाएगा.
(रिपोर्ट-अश्वनी मिश्रा)
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First published: June 29, 2019, 11:47 AM IST
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