Facebook ने बिछड़े बेटे को मां से मिलवाया, 9 साल पहले लापता हो गया था 8 साल का मासूम

आखिर स्कूल प्रबंधन ने रज्जाक को परिजनों से मिलवाया. (Demo Pic)

दिव्यांग रज्जाक किसी तरह ट्रेन में बैठ कर दिल्ली से पंजाब के पटियाला (Patiala) पहुंच गया. सड़क पर रोते मासूम को पटियाला निवासी गुरुनाम सिंह ने देखा था और उसे अपने साथ ले गए थे.

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फर्रुखाबाद. उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद (Farrukhabad) के एक दिव्यांग बालक की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है. 9 साल पहले अपने परिजनों से बिछड़ा एक दिव्यांग सोशल मीडिया के जरिए अपने मां-बाप से मिल गया. बच्चे को देख कर मां ने अपने कलेजे के टुकड़े को गले से लगा लिया. फर्रुखाबाद के सोता बहादुरपुर गांव (Sota Bahadurpur Village) निवासी अब्दुल ताहीद का 17 वर्षीय पुत्र अब्दुल रज्जाक (जो बोल व सुन नहीं सकता है) आज से 9 साल पहले दिल्ली अपने किसी रिश्तेदार के यहां गया था. वहां खेलते-खेलते वह लापता हो गया था. परिजनों ने उसको काफी खोजा, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला.

दिव्यांग रज्जाक किसी तरह ट्रेन में बैठ कर दिल्ली से पंजाब के पटियाला पहुंच गया. सड़क पर रोते मासूम को पटियाला निवासी गुरुनाम सिंह ने देख लिया. इसके बाद गुरुनाम सिंह दिव्यांग बच्चे को लेकर अपने घर गए और उसके परिजनों को खोजने की कोशिश की. कुछ जानकारी न मिलने पर गुरुनाम सिंह ने बच्चे के पालन पोषण की ज़िम्मेदारी ले ली और दिव्यांग बच्चे को पटियाला के मूक बधिर स्कूल में दाखिल करा दिया, जहां स्कूल के संचालक करतार सिंह की देख रेख में वह शिक्षा लेने लगा. इसी बीच रज्जाक सोशल मीडिया पर फेसबुक का उपयोग करने लगा. फेसबुक पर रज्‍जाक ने अपनी फोटो लोड की. किसी तरह उसका बचपन का एक दोस्त उससे फेसबुक पर जुड़ गया. दोस्त ने उसकी फोटो को पहचान कर परिजनों को सूचना दी. परिजनों ने अपने कलेजे के टुकड़े को देखते ही पहचान लिया और पटियाला के स्कूल के माध्‍यम से बच्चे से सम्पर्क किया.

स्कूल प्रबंधन ने रज्जाक को परिजनों से मिलवाया
आखिर स्कूल प्रबंधन ने रज्जाक को परिजनों से मिलवाया. परिजन दिव्यांग रज्जाक को लेकर सोमवार को जब फर्रुखाबाद अपने घर पर आए तब 9 साल पहले बिछड़े अपने कलेजे के टुकड़े को देख कर मां ने अपने आगोश में समेट लिया. वहीं, 9 साल पहले गुम हुए बच्चे को अपने बीच पाकर परिजन काफी खुश हैं. 9 साल बाद वापस घर आए दिव्यांग के पिता ने बताया कि मेरा बेटा रज्जाक जो दिव्यांग है. वह बोल और सुन नहीं सकता है. वह दिल्ली रिश्तेदारी में मेरे साथ गया था. वहां वह खो गया. काफी खोजा लेकिन नहीं मिला. हम लोग थक हार कर घर बैठ गए.

दोस्त ने बताया कि फेसबुक पर रज्जाक की फ़ोटो है
बीते दो माह पहले रज्‍जाक के एक दोस्त ने बताया कि फेसबुक पर रज्जाक की फ़ोटो है. पहले खोए हुए बच्चे की कहानी बताते हुए पिता ने बताया कि दिल्ली से गुम होने के बाद उसका बेटा किसी तरह पंजाब के पटियाला पहुंच गया, जहां उस बच्चे को पटियाला के एक सिख परिवार गुरुनाम सिंह ने अपने घर पर रखा, जिसकी उन्होंने परवरिश की. इतना ही नहीं उन्होंने मूक बधिर बच्चे को स्कूल में दाखिला करा दिया, जहां उसकी पढ़ाई होने लगी. आज यह बच्चा 17 साल का है और उसको अच्छी शिक्षा मिल रही है. हम लोग बहुत खुश हैं. पिता ने बताया कि हम सब सरदार गुरुमीत सिंह व स्कूल के प्रबंधक करतार सिंह का धन्यवाद अदा करते हैं. स्कूल की छुट्टियां खत्म होने के बाद हम लोग इसे स्कूल भेजेंगे.

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