यूपी के इस जिले में लगती है भूतों की अदालत, फांसी तक की दी जाती है सजा

भूतों के अपराधों के हिसाब से उन्हें सजा दी जाती है. सजा में फांसी तक का प्रावधान है. अदालत परिसर में ही फांसी के लिए लोहे खम्भे भी लगे हैं.

Suryaa Bajpai | News18 Uttar Pradesh
Updated: July 25, 2018, 2:45 PM IST
यूपी के इस जिले में लगती है भूतों की अदालत, फांसी तक की दी जाती है सजा
सुलतान शाह के दरबार में सजती है भूतों की अदालत
Suryaa Bajpai | News18 Uttar Pradesh
Updated: July 25, 2018, 2:45 PM IST
वैसे तो देश में अदालतें इंसानों को न्याय दिलाने के लिए हैं, लेकिन क्या आपने कभी भूतों की अदालत के बारे में सुना है. चौंकिए मत, यह सच है यूपी के फर्रुखाबाद में भूतों की अदालत सजती है, जहां बाकायदा उनकी पेशी होती है और सुनवाई के बाद सजा मुक़र्रर की जाती है. भूतों के अपराधों के हिसाब से उन्हें सजा दी जाती है. सजा में फांसी तक का प्रावधान है. अदालत परिसर में ही फांसी के लिए लोहे खम्भे भी लगे हैं.

हम बात कर रहे हैं फर्रुखाबाद स्थित सुल्तान शाह के दरबार की. भूतों की यह अदालत यहीं पर लगती है. फर्रुखाबाद रेलवे लोको स्थित सुल्तान शाह के दरबार में मानसिक रूप से परेशान लोग आते हैं. पीड़ितों के परिजनों को विश्वास है कि उनके ऊपर भूत या किसी ऊपरी हवा का साया है. कहा जाता है कि जुम्मे की रात यहां कव्वाली की जाती है, जिसे सुनते ही भूत से पीड़ित लोग हरकतें करना शुरू कर देते हैं. भूत के मरीज सिर पटक-पटक कर अपनी गलती मानते हैं. गलती मानने के बाद सुल्तान शाह उन्हें भूत-प्रेत जैसी बंदिशों से मुक्त करते हैं. यहां जब मरीजों का ट्रीटमेंट होता है, तब शुरुआत में वे अजीबोगरीब हरकतें करते हैं. लोगों का विश्वास है कि भूत-प्रेत के असर से ये मरीज ऐसी हरकतें करने लगते हैं, जिन्हें संभालना मुश्किल हो जाता है.

बाबा के दरबार में भूतों को उनके जुर्म के मुताबिक सजा सुनाई जाती है. कुछ केसों में भूतों को फांसी तक की सजा दी जाती है. दरबार में फांसी की सजा को पूरा करने के लिए लोहे का खंभा लगा है, जिस पर फांसी की रस्म अदा की जाती है.

दरगाह की देखभाल करने वाले राजा भाई की मानें तो तमाम ऊपरी हवाओं से परेशान लोग यहां आते हैं. पीड़ित बाबा की अदालत में पेशी पर पहुंचकर खुद स्वीकार करते हैं कि वे किस प्रभाव से परेशान हैं. लोगों का दावा है कि वे यहां जंजीरों में बांधकर लाए गए थे और अब रोग व चिंतामुक्त हैं. लोग यहां रहकर अपने मरीजों का इलाज कराते हैं. यहां रुकने वालों के रहने ठहरने का इंतजाम दरगाह की ओर से किया जाता है.

इसे अन्धविश्वास कहिए या फिर कुछ और, लेकिन लोगों का कहना है कि जब किसी की इच्छा पूरी नहीं होती है तो वे तनाव में आ जाते हैं. फिर वे इस दरबार में आते हैं. इस दरगाह में हिन्दू-मुस्लिम सभी धर्मों के लोग आते हैं. भूतों की अदालत महीने में चार बार लगती है. दूसरी तरफ साल में एक बार उर्स का आयोजन किया जाता है.
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