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फर्रुखाबाद: रामगंगा में पानी बढ़ा, छतों में रहने को मजबूर हुए ग्रामीण

रामगंगा और गंगा का पानी खतरे के निशान से ऊपर हुआ. ग्रामीण छतों पर रहने को मजबूर.

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बारिश का कहर इस साल लगभग पूरे देश में टूटा है. उफनते नदी-नाले निचले स्तर पर रहने वालों के लिए मुश्किलें खड़ी रहे हैं. फर्रुखाबाद के कुबेरपुर मड़ैया के हाल भी कुछ अलग नहीं. यहां रामगंगा के जलस्तर में बढ़ोत्तरी के कारण तराई में रहने वालों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है.

गौरतलब है कि रामगंगा का जलस्तर बढ़कर खतरे के निशान से 40 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया है. वहीं गंगा का स्तर भी खतरे के निशान से 10 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया है. बदायूं मार्ग पर ढाई फिट से अधिक बाढ़ का पानी तेज धार के साथ बहने से छोटे वाहनों का आवागमन प्रभावित है. इसकी वजह नरौरा बांध से गंगा में 194057 क्यूसेक पानी छोड़ा जाना है. नदियों के इस तरह उफनने के कारण निचले इलाकों में रहने वालों का रोजमर्रा का जीवन बुरी तरह से प्रभावित हो गया है. यहां कमजोर आर्थिक स्थिति वाले लोग पलायन कर रहे हैं तो ज्यादातर लोग अपने या दूसरों के घरों की ऊंची छतों पर रहने को मजबूर हैं. सड़क सुविधा पूरी तरह से बंद हो चुकी है और राशन या किसी दूसरे काम से घर से बाहर आने-जाने वाले लोग खेतों से नाव तैराकर आवाजाही कर रहे हैं.

गंगा और राम गंगा के स्तर में बढ़ोत्तरी के कारण खेतों में भी तबाही मची हुई है. हजारों बीघा फसल खराब हो गई है. ग्रामीणों पर ये दोगुनी मार है. ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें अब तक प्रशासन की ओर से किसी तरह की कोई मदद नहीं मिल सकी है. लगातार छतों के ऊपर रहने के कारण लोग और खासकर छोटे बच्चे और बूढ़े बीमारियों की जद में हैं.



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