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दंपति ने हर नगर पालिका चुनाव में जीत दर्ज कर बनाया रिकॉर्ड

पति ने निधन के बाद विरमा देवी ने सियासी विरासत संभाला.
पति ने निधन के बाद विरमा देवी ने सियासी विरासत संभाला.

फर्रुखाबाद निकाय चुनाव में एक अजेय योद्धा हैं जो न किसी सियासी आंधी से प्रभावित हुए और न किसी नेता की नेतागिरी से. ये पति पत्नी अब तक सात चुनाव जीत चुके हैं. 1963 के बाद नगर पालिका के हर चुनाव में वह अपने वार्ड से चुनकर टाउन हाल पहुंचते रहे.

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फर्रुखाबाद निकाय चुनाव में एक अजेय योद्धा हैं जो न किसी सियासी आंधी से प्रभावित हुए और न किसी नेता की नेतागिरी से. ये पति पत्नी अब तक सात चुनाव जीत चुके हैं. 1963 के बाद नगर पालिका के हर चुनाव में वह अपने वार्ड से चुनकर टाउन हाल पहुंचते रहे.

70 साल की विरमा देवी अपने परिवार की सियासी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए फिर चुनाव मैदान में हैं. विनम्रता उनकी पूंजी है और ईमानदारी उनका चुनाव जीतने का राज.

इस्माइल गंज सानी की रहने वाली विरमा देवी और उनके पति डॉ. राम लाल वर्मा ने फर्रुखाबाद नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए जब से चुनाव शुरू हुए तब से आज की तारीख तक कभी हार का मुंह नहीं देखा. पांच बार डॉ. राम लाल वर्मा चुनाव जीते और दो बार उनकी पत्नी विरमा देवी. बड़े- बड़े पैसे वाले उनके मुकाबले में आए, लेकिन कोई उनके मुकाबले में टिक नहीं पाया.



2002 में यह वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित हो गया तो आठवीं पास विरमा देवी चुनाव लड़ने के लिए उतारीं और वह जीत भी गईं. 2007 में फिर डॉ. राम लाल वर्मा चुनाव जीते. यह उनका पांचवां चुनाव था. 13 मार्च 2012 को बीमारी के बाद डॉ. राम लाल वर्मा का निधन हो गया.
2012 के चुनाव में विरमा देवी ने पूरी तरह से अपने पति की विरासत संभाल लिया. पति- पत्नी ने दस- पंद्रह हजार में पूरा चुनाव लड़ा और जीता.

बेटे स्क्रीन बनाने का काम करते हैं. वह ही चुनाव प्रचार के लिए एक स्क्रीन बना लेते हैं और घर में ही पोस्टर छाप लेते हैं. उसे घर- घर जाकर बांट देते हैं और उनकी मां चुनाव जीत जाती हैं. तराजू, पतंग और घड़ी उनके कामयाब निशान रहे. उनके वार्ड नंबर बदल कर 11, 26, 28 और 29 हुए पर कुछ नहीं बदला तो उनका चुनाव परिणाम. विरमा देवी बताती हैं कि उनके पास पैसा है ही नहीं. जो लोग सहयोग कर देते हैं वह उसी से चुनाव लड़ लेती हैं.

लगातार उनकी सफलता का राज पूछने पर वह बताती हैं. मीठे बोल देती हैं, चाय पिला देती हैं और जो काम बताते हैं वह करा देती हैं. इस बार लोगों ने फिर उन्हें खड़ा करा दिया है. पर्चे छप कर आ गए हैं. घर- घर जाकर बांट देंगी और वह वोट मांग लेंगी.
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