हिंदू-मुस्लिम एकता की अनूठी मिसाल बने नत्थूलाल, 20 सालों से रोजे के साथ कर रहे बजरंग बली की पूजा
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हिंदू-मुस्लिम एकता की अनूठी मिसाल बने नत्थूलाल, 20 सालों से रोजे के साथ कर रहे बजरंग बली की पूजा
20 सालों से रोजा रखते आ रहे हैं नत्थूलाल

रोजा रखने वालों में नत्थूलाल अपने परिवार के इकलौते नहीं हैं, बल्कि उनके परिवार में पीढ़ियों से चली आ रही यह परंपरा आज भी कायम है.

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फतेहपुर. इस समय पूरी दुनिया जहां कोरोनावायरस (Coronavirus) के भीषण संकट से जूझ रही है, वैसे समय में भी हमारे देश मे तमाम ऐसे लोग हैं जो इस महामारी के दौर को भी साम्प्रदायिक रंग देने में लगे हुए हैं. लेकिन गंगा- जमुनी तहजीब वाले इस देश में बहुत सारे लोग ऐसे हैं जो हर बात को साम्प्रदायिक नजरिये से देखने वाले को आइना भी दिखा रहे हैं. ऐसे ही लोगों में शामिल है फतेहपुर (Fatehpur) जिले के नत्थूलाल, जो पिछले बीस सालों से रमजान (Ramazan) के पाक महीने में रोज़ा रखते चले आ रहे हैं. जिले के खागा तहसील क्षेत्र के यमुना तटीय गांव कोट के रहने वाले नत्थूलाल रोजा रखने के साथ ही अपने घर मे रोज बजरंग बली की पूजा करना नहीं भूलते.

परिवार के अन्य सदस्य भी रखते हैं रोजा

रोजा रखने वालों में नत्थूलाल अपने परिवार के इकलौते नहीं हैं, बल्कि उनके परिवार में पीढ़ियों से चली आ रही यह परंपरा आज भी कायम है. परिवार से जुड़े दूसरे पुरुष जो नौकरी और काम के सिलसिले में अन्य प्रांतों में रहते हैं, वहां वह लोग रमजान के महीने में रोजा रखना नहीं भूलते.रोजा रखने के साथ ही नत्थूलाल के घर मे भगवान की पूजा और हनुमान चालीसा का पाठ रोज होता है. हिंदू-मुस्लिम एकता की अनूठी मिसाल बने नत्थूलाल का कहना है कि उनके बाबा और परदादा भी रमजान के महीने में रोजा रखते चले आये हैं और अपने पिता रामनारायण के जीवन काल से ही उन्होंने रोजा रखना शुरू कर दिया था.



गांव में आज भी कायम है साम्प्रदायिक सौहार्द
रमजान के महीने में रोजा रखने वाले नत्थूलाल की पत्नी फूलकली बताती हैं कि उनके परिवार में यह परम्परा काफी पहले से चली आ रही है और परिवार के बड़े लोग पीढ़ियों से रोजा रखते चले आ रहे हैं. जिस तरीके से मुस्लिम रोजेदार रोज सवेरे उठकर सहरी करते हैं उसी तरीके से नत्थूलाल की दिनचर्या भी पूरे महीने नियमित रहती है. नत्थूलाल के रोजा रखने के बारे में इसी गांव के रहने वाले सितवत अली बताते हैं कि उनके गांव में हिंदू और मुसलमान हमेशा साथ रहते आये हैं. गांव की मुस्लिम बिरादरी भी होली, दीपावली और दशहरा का त्योहार में मुस्लिम बिरादरी के लोग बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते है. गांव में चली आ रही यह परम्परा सैकड़ों सालों से आज भी जस की तस कायम है. राजनीति की रोटियां सेंकने वाले लोग हर मामले को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश भले ही करते हों, लेकिन फतेहपुर जिले के कोट गांव के रहने वाले नत्थूलाल और इस गांव में मिलजुल कर रहने की परम्परा आज भी लोगों के लिए नज़ीर बनी हुई है.

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