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फतेहपुर: ARTO दफ्तर में जिलाधिकारी का छापा, 6 दलाल गिरफ्तार

KS CHATURVEDI | News18 Uttar Pradesh
Updated: October 21, 2019, 5:12 PM IST
फतेहपुर: ARTO दफ्तर में जिलाधिकारी का छापा, 6 दलाल गिरफ्तार
एआरटीओ फतेहपुर में डीएम का छापा

दलालों के पास से बड़े पैमाने पर करेंसी भी बरामद की गई है. जो उनके द्वारा एआरटीओ दफ्तर में काम करवाने आने वाले लोगों से वसूली गई थी.

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फतेहपुर. जिले के एआरटीओ दफ्तर (ARTO) में धड़ल्ले से चल रहे दलालों के खेल का सच सोमवार को जिलाधिकारी के छापे (DM Raid) के दौरान खुल कर सामने आ गया. छापे के दौरान जिस तरीके से दलाल (Middlemen) पूरे कार्यालय में हावी थे. उसे देखकर डीएम साहब भी हैरान रह गए. इस दौरान कार्यालय के भीतर बैठकर काम करने वाले छह दलालों को हिरासत में लिया गया. दलालों के पास से बड़े पैमाने पर करेंसी भी बरामद की गई है. जो उनके द्वारा एआरटीओ दफ्तर में काम करवाने आने वाले लोगों से वसूली गई थी. इतना ही नही इस दौरान कई फाइलें जिन्हें एआरटीओ दफ्तर के भीतर होना चाहिए था वे फाइले दलालो की दुकानों में पाई गई. जिन्हें गाड़ी में भरकर जिलाधिकारी कार्यालय लाया गया.

शहर के नउवाबाग इलाके में एनएच-2 पर स्थित इस कार्यालय में जिलाधिकारी संजीव कुमार ने भारी पुलिस बल के साथ छापा मारा. डीएम के छापे के दौरान एआरटीओ कार्यालय के बाहर सक्रिय दलाल तो भाग खड़े हुए, लेकिन कार्यालय के भीतर बाकायदा कर्मचारियों और अधिकारियों के साथ बैठकर काम करने वाले छह दलाल भाग नही पाए, जिन्हें मौके से ही हिरासत में ले लिया गया.

हर काम का रेट था फिक्स

बताया जा रहा है कि इस कार्यालय में हर काम का रेट पहले से ही फिक्स कर दिया गया था. लाइसेंस बनवाने से लेकर गाड़ियों की फिटनेस और उनका पंजीकरण चाह कर भी कोई व्यक्ति सीधे नही करवा सकता था. इसके लिए पहले दलालों के पास जाना होता था और उसके बाद दलाल ही सारे काम करवाकर संबंधित व्यक्ति को फाइलें वापस करता था. जिसमे हर काम लिए निर्धारित सरकारी शुल्क के अलावा अधिकारियों को दी जाने वाली रिश्वत और इसमें लगने वाली दलाली चुकाने के बाद ही काम पूरा हो पाता था.

दलालों के पास से मिलीं कई फाइल

शिकायतों के बाद डीएम संजीव कुमार ने आज भारी पुलिस के साथ जब एआरटीओ दफ्तर पर छापा मारा तो दफ्तर के आस-पास भगदड़ मच गई. एआरटीओ दफ्तर के बाहर बाकायदा किराए की दुकान लेकर बैठे दलाल मौके से फरार हो गए. दुकानों में ली गई तलाशी के बाद बड़े पैमाने पर फ़ाइलें रखी पाई गई है जिन्हें दलालों द्वारा एआरटीओ दफ्तर से काम करवाने के बाद अपने पास रखा गया था. तमाम फाइलें ऐसी भी हैं जिनका काम होना अभी बाकी था.

अनपढ़ व दिव्यंगों का भी बन रहा था लाइसेंस
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कहा तो यहां तक जा रहा है कि यहां सक्रिय दलाल ड्राइविंग लाइसेंस के लिए निर्धारित ऑनलाइन परीक्षा में बैठे बगैर ही अनपढ़ और दिव्यांग लोगों तक का लाइसेंस मोटी रकम लेकर बनवा दिया करते थे. जिलाधिकारी के छापे के दौरान यहां तैनात एआरटीओ प्रशासन अरविंद त्रिवेदी और आरआई आकांक्षा सिंह की भूमिका पूरी तरह से संदिग्ध पाई गई. दफ्तर में सक्रिय दलाल इन्ही अधिकारियों की सह पर यहां दलाली का काम किया करते थे. दलालों के जरिए ही अच्छी खासी रकम अधिकारियों और कर्मचारियों के पास पहुंचती थी.

जिलाधिकारी संजीव कुमार का कहना है कि दफ्तर से पकड़े गए छह दलालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराए जाने के साथ ही अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कराई जाएगी. अगर अधिकारियों की संलिप्तता मिली तो उनके खिलाफ कार्यवाई के लिए शासन को लिखा जाएगा.

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First published: October 21, 2019, 5:12 PM IST
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