फतेहपुर: ललौली गांव में 100 मौतों को डीएम अपूर्वा दुबे ने बताया भ्रामक, सियासत हुई तेज

फतेहपुर के ललौली गांव में हो रही मौतों पर सियासत तेज

फतेहपुर के ललौली गांव में हो रही मौतों पर सियासत तेज

Fathepur News:डीएम अपूर्वा दुबे ने मजिस्ट्रेट लगाकर सर्वे कराया और सत्यापन में मरने वालों की संख्या 37 पाई गई. खास बात यह है कि मरने वाले किसी भी व्यक्ति व उसके घर में कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट नहीं है.

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फतेहपुर. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के फतेहपुर जिले (Fatehpur) में यमुना नदी किनारे बसे ललौली गांव (Lalauli Village) में लोगों की हो रही मौत के बाद इलाके में दहशत का माहौल है. विगत एक महीने में गांव में लगभग 37 लोगों की मौत हो गई है. ग्रामीणों की माने तो मौत का कारण सिर्फ साधारण सर्दी-जुकाम, बुखार व डाइबिटीज ही है. आपदा के इस दौर में भले ही सरकारी आंकड़ो में इनकी मौत का कारण कोरोना महामारी न हो, लेकिन 50 हजार से ज्यादा आबादी वाले इस गांव में 37 लोगों की मौत के बाद दहशत का माहौल जरूर है. वहीं कई मीडिया संस्थानों में कथित तौर पर 100 लोगों की मौतों की खबर प्रसारित की गई, जिस पर शनिवार को जिला प्रशासन ने स्थिति साफ कर दी. डीएम अपूर्वा दुबे ने मजिस्ट्रेट लगाकर सर्वे कराया, और सत्यापन में मरने वालों की संख्या 37 पाई गई. खास बात यह है कि मरने वाले किसी भी व्यक्ति व उसके घर में कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट नहीं है.

डीएम अपूर्वा दुबे ने बताया कि ललौली गांव में 37 मौतें हुई है, इसका सत्यापन कराया गया है. कोई भी मौत कोरोना संक्रमण से नहीं हुई है. 14 मौतें सीओपीडी, सांस की बीमारी, चार मौतें मधुमेह, दो मौतें हार्टअटैक और दो मौत कैंसर व अस्थमा से हुई हैं. इसके अलावा खून की कमी, प्लेटलेट्स की कमी, पथरी आपरेशन के दौरन मौत होने की पुष्टि हुई है. 100 लोगो की मौत की जो भ्रामक खबरे चल रही है, इस पर नियमानुसार कार्यवाई की जाएगी.

मूलभूत सुविधाओं से जूझ रहा है गांव

यमुना नदी के किनारे बसा 50 हजार से ज्यादा आबादी वाला ललौली गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं से जूझ रहा है. चिकित्सा के नाम पर इस गांव में एक प्राथमिक स्वस्थ केंद्र भले ही है, लेकिन यह नाकाफी साबित हो रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र में महज़ दो लोगों का स्टाफ़ है, जो मरीजों  को ऑनलाइन किसी नोडल से डॉक्टर विजिट कराते है, वो भी सुबह खुलता है और शाम को बंद हो जाता है. जिसका ज्यादा लाभ नहीं हो मिल पाता, जो सिर्फ ढाक के तीन पात साबित हो रहा है.
एक ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र

वहीं ललौली गांव से जिला अस्पताल करीब 30 किलोमीटर दूर है. ऐसे में आकस्मिक चिकित्सा ग्रामीणों की पहुंच से काफी दूर है. गांव में सफाई के मामले में कभी भी सेनेटाइज़ेशन जैसा कोई काम नहीं हुआ है. ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में होने वाली अधिकतर मौतें स्वास्थ अव्यवस्था के अभाव में हुई है. गांव में मुस्लिम आबादी औसतन ज्यादा है. गांव में छोटे-छोटे लगभग 10 कब्रिस्तान है. जिसमे लगभग 1 महीने में दफन लाशे अव्यवस्था की गवाही दे रही है.

विगत एक महीने में 100 कथित मौतों का मामला जब मीडिया में आया तो प्रसाशनिक अमले में हड़कंप मच गया. जिसके बाद प्रशासनिक अफसर व स्वास्थ्य विभाग गांव में पहुंचकर जमीनी हकीकत जानने की कोशिश कर रहा है. संक्रमण से बचाव के लिए गांव में साफ-सफाई के साथ-साथ सेनेटाइजेशन का कार्य कराया जा रहा है.



कांग्रेस प्रतिनिधि मंडल आज करेगा गांव का दौरा

ललौली में 100 कथित मौत के मामले में अब सियासत भी तेज हो गई है. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के निर्देश के बाद प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने प्रदेश महामंत्री राकेश सचान, जिलाध्यक्ष अखिलेश पांडेय की अगुवाई में एक प्रतिनिधि मंडल गठित किया है, जो रविवार को ललौली गांव जाएगा। जिलाध्यक्ष ने बताया कि प्रदेश महासचिव सुशील पासी, सचिव अभिमन्यु सिंह, सचिव सदाशिव, ओम प्रकाश गिहार, राकेश प्रजापति, डॉ. अनुराग श्रीवास्तव की मौजूदगी में पीड़ित परिवारों से मिलेगा, और पीड़ितों को इलाज के लिए दवाएं आदि वितरित की जाएंगी।

(रिपोर्ट- धारा सिंह)

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