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मिसाल! इस टीचर ने खंडहर को आदर्श विद्यालय में किया तब्दील

News18 Uttar Pradesh
Updated: June 18, 2019, 3:38 PM IST
मिसाल! इस टीचर ने खंडहर को आदर्श विद्यालय में किया तब्दील
पहले जर्जर भवन में संचालित हो रहा था विद्यालय

फतेहपुर जिले के बेहद पिछड़े गांव अर्जुनपुर गढ़ा में स्थित यह पाठशाला आज आदर्श स्कूल के तौर पर मशहूर हो चुकी है.

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उत्तर प्रदेश में सरकारी प्राथमिक स्कूलों की स्थिति किसी से छिपी नहीं है. ऐसे में अगर आपको दूर कहीं गांव में कान्वेंट की तर्ज पर स्कूल नजर आ जाए तो चौंकना लाजमी है. फतेहपुर स्थित एक गांव की एक प्राथमिक पाठशाला कुछ ऐसी ही मिसाल पेश कर रही है. इसका श्रेय जाता है स्कूल के प्रधानाध्यापक देवब्रत त्रिपाठी को, जिन्होंने अपने अथक प्रयास से खंडहर हो चुके विद्यालय को आदर्श स्कूल में तब्दील कर दिखाया.

फतेहपुर जिले के बेहद पिछड़े गांव अर्जुनपुर गढ़ा में स्थित यह पाठशाला आज आदर्श स्कूल के तौर पर मशहूर हो चुकी है. इस स्कूल में वो सभी सुविधाएं हैं जो किसी कान्वेंट स्कूल में मिलती हैं. मसलन यहां पढ़ने वाले बच्‍चों के लिये गुणवत्‍तापूर्ण शिक्षा व्‍यवस्‍था के साथ-साथ बड़ा डाइनिंग हॉल, बड़ा बगीचा, स्‍वच्‍छता अभियान को बढ़ावा देने वाला माहौल और ऐसी कई चीजें हैं जो इसे अन्य स्कूलों से अलग बनाती हैं.

देवब्रत त्रिपाठी को इसके लिए सम्मानित भी किया जा चुका है


वर्षों की मेहनत से हासिल किया ये मुकाम

यह स्कूल भी सूबे के अन्य प्राथमिक विद्यालयों की तरह ही था. लगभग खंडहर में तब्दील हो चुके इस स्कूल यहां के प्रधानाध्‍यापक देवब्रत त्रिपाठी ने आदर्श स्कूल में तब्दील करने का जिम्मा उठाया. उन्होंने इसके लिए सरकारी मदद की बाट नहीं जोही. त्रिपाठी ने इसे व्‍यक्तिग‍त जिम्‍मेदारी समझते हुए इस पाठशाला को तमाम ऐसी सुविधाओं से लैस किया, जिनसे कोई स्‍कूल आदर्श विद्यालय में तब्‍दील हो सकता है.

जर्जर भवन पर था कब्ज़ा

त्रिपाठी ने इस प्राथमिक विद्यालय के प्रति अपने लगाव के बारे में जिक्र करते हुए बताया कि 10 सितंबर 1982 को प्राथमिक विद्यालय अर्जुनपुर गढ़ा में बतौर सहायक अध्यापक नियुक्ति के बाद उन्‍होंने इस स्‍कूल को भी उन्‍हीं समस्‍याओं से घिरा पाया, जिनसे अमूमन क्षेत्र का हर प्राथमिक स्‍कूल ग्रस्‍त है. सबसे बड़ी समस्‍या इसका जर्जर भवन और उसमें भी ग्रामीणों का अवैध कब्‍जा था. उन्‍होंने सक्षम अधिकारियों के माध्यम से प्रयास किए, जिससे स्‍कूल की चहारदीवारी का निर्माण हुआ और कब्‍जा खत्‍म हो सका.
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पहले जर्जर भवन पर ग्रामीणों ने किया था कब्ज़ा


छात्रों की संख्या बढ़ाना भी थी चुनौती

त्रिपाठी कहते हैं, 'अन्‍य सरकारी स्‍कूलों की तरह इस प्राथमिक पाठशाला में भी विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाना किसी चुनौती से कम नहीं थी.' त्रिपाठी के मुताबिक इसके लिए शिक्षा व्‍यवस्‍था को मनोवैज्ञानिक तरीके से ढाला गया ताकि बच्‍चों के लिए पढ़ाई बोझ ना बन सके. इसके अलावा परिसर को कौतूहलपूर्ण बनाने के लिये एक बड़ी फुलवारी तैयार की गई, जिसमें फलदार वृक्ष लगाए गए. इसकी देखभाल वह खुद करते हैं. साथ ही बच्चों को बागवानी से जोड़ने के मकसद से इस बगीचे में कई चीजें उगाई जाती हैं. इससे विद्यालय के प्रति और भी आकर्षण उत्पन्न हुआ और छात्रसंख्या में वृद्धि हुई.



अब है अलग पहचान

अर्जुनपुर गढ़ा के प्रधान प्रतिनिधि धर्मराज यादव के मुताबिक पिछले कुछ सालों में गांव के प्राथमिक विद्यालय की तस्‍वीर बदल गई है. पहले इसका भवन जर्जर स्थिति में था, मगर यहां के प्रधानाध्‍यापक और उनके सहयोगियों की मेहनत और लगन का नतीजा है कि यह विद्यालय आसपास के इलाकों में अलग पहचान रखता है. उन्‍होंने कहा कि पहले इस विद्यालय पर लोगों ने कब्जा कर रखा था. उसे कब्‍जामुक्‍त कराने में भी प्रधानाध्‍यापक त्रिपाठी का अहम योगदान है. पहले जहां, स्‍कूल में गिने-चुने छात्र ही थे, वहीं अब यह तादाद बढ़ी है. स्‍कूल में पढ़ाई भी होती है. कुल मिलाकर आस-पास के क्षेत्र में ऐसा कोई और स्कूल नहीं है.

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First published: June 18, 2019, 3:38 PM IST
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